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डेली, वीकली या मंथली SIP...क्या एक से ज्यादा SIP करना सही है? किसमें जल्दी बनता है पैसा

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय अक्सर यह सवाल उठता है कि डेली, वीकली या मंथली में से कौन सी एसआईपी बेहतर है और क्या एक से ज्यादा एसआईपी शुरू करने से आपका धन तेजी से और ज्यादा मात्रा में बढ़ सकता है।

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क्या एक से ज्यादा SIP करना सही है? किसमें जल्दी बनता है पैसा

म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए एसआईपी (SIP - Systematic Investment Plan) को आज के समय में सबसे बेहतरीन और सुरक्षित तरीका माना जाता है। लेकिन निवेशकों के मन में अक्सर एक बड़ा सवाल रहता है कि वे अपनी एसआईपी किस फ्रिक्वेंसी पर रखें यानी पैसे हर दिन (Daily), हर हफ्ते (Weekly) कटवाएं या फिर हर महीने (Monthly) निवेश करें? इसके अलावा, क्या एक ही फंड या अलग-अलग फंड में एक से ज्यादा एसआईपी शुरू करने से आपका धन तेजी से और ज्यादा मात्रा में बढ़ता है? इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए सबसे पहले हमें एसआईपी की मूल भावना को समझना होगा। एसआईपी का मुख्य मकसद बाजार के उतार-चढ़ाव का फायदा उठाना और 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' (Rupee Cost Averaging) करना है, जिससे लंबे समय में आपका रिटर्न बेहतर होता है।

कौन सी SIP है बेहतर?

फ्रीक्वेंसी की बात करें तो दैनिक, साप्ताहिक या मासिक एसआईपी में से कौन सा बेहतर है, यह काफी हद तक आपके निवेश के तरीके पर निर्भर करता है। आंकड़ों और विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, यदि आप लंबी अवधि (5 से 10 साल या उससे अधिक) के लिए निवेश कर रहे हैं, तो मंथली (मासिक) एसआईपी सबसे ज्यादा सुविधाजनक और लोकप्रिय मानी जाती है। इसका कारण यह है कि अधिकांश लोगों की सैलरी महीने के अंत या शुरुआत में आती है, जिससे बजट बनाना आसान हो जाता है। इसके विपरीत, डेली या वीकली एसआईपी में बाजार के हर उतार-चढ़ाव का बहुत बारीक असर पड़ता है, लेकिन लंबे समय में मंथली एसआईपी के मुकाबले इनके रिटर्न में कोई बहुत बड़ा या जादुई अंतर देखने को नहीं मिलता है। हालांकि, छोटी फ्रीक्वेंसी रखने से आपके बैंक खाते से पैसे बार-बार कटते हैं, जिसे मैनेज करना कई बार थोड़ा जटिल हो सकता है।

क्या एक से ज्यादा SIP करने पर पैसे बढ़ते हैं?

अब बात करते हैं कि क्या एक से ज्यादा एसआईपी (Multiple SIPs) शुरू करने से ज्यादा वेल्थ बनती है? कई निवेशकों को लगता है कि अलग-अलग तारीखों पर या अलग-अलग फंड्स में कई सारी एसआईपी चलाने से ज्यादा फायदा होगा। सच यह है कि आपका कुल रिटर्न इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपने कितनी एसआईपी चला रखी हैं, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कुल कितनी रकम (Total Investment Amount) निवेश की है और वह किस फंड के पोर्टफोलियो में गई है। उदाहरण के लिए, अगर आप हर महीने कुल 10,000 रुपये निवेश करना चाहते हैं, तो चाहे आप उसे एक ही फंड में मंथली एसआईपी के जरिए डालें या फिर 5 अलग-अलग फंड्स में बांटकर डालें, रिटर्न मूल रूप से बाजार के प्रदर्शन और उस फंड की क्वालिटी पर ही तय होगा। बहुत ज्यादा एसआईपी या एक जैसे फंड्स में पैसा बांटने से ओवर-डाइवर्सिफ़िकेशन (Over-diversification) हो सकता है, जिससे रिटर्न एवरेज हो जाता है।

इसलिए, समझदारी इसी में है कि अपनी वित्तीय क्षमता और लक्ष्यों के मुताबिक एक स्पष्ट रणनीति बनाई जाए। बार-बार एसआईपी की फ्रीक्वेंसी बदलने या बिना सोचे-समझे ढेਰ सारे छोटे-छोटे निवेश शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। अपने लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए एक अच्छी क्वालिटी के म्यूचुअल फंड में अनुशासित तरीके से मंथली एसआईपी चलाना सबसे सरल और प्रभावी तरीका है। यदि आप अपने पोर्टफोलियो को विविधता देना चाहते हैं, तो दो से तीन अलग-अलग कैटेगरी (जैसे लार्ज कैप, मिड कैप या फ्लेक्सी कैप) के चुनिंदा फंड्स में निवेश कर सकते हैं। सही योजना और लंबे समय तक धैर्य के साथ किया गया निवेश ही आपके पैसों को तेजी से बढ़ाने और वित्तीय रूप से मजबूत बनाने की असली चाबी है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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