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नारायण मूर्ति के 70 घंटे काम की सलाह पर लोग बंटे, जानें दुनिया में सबसे ज्यादा कहां काम करते हैं लोग

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Oct 28, 2023, 08:23 AM IST

Narayan Murthy Says 70 Hours Working And Debate: इंफोसिस के सीएफओ मोहनदास पई के साथ ‘3वन4’ कैपिटल के पॉडकास्ट 'द रिकॉर्ड' के उद्घाटन एपिसोड में बातचीत के दौरान मूर्ति ने कहा कि युवाओं को अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए अतिरिक्त घंटे काम करना चाहिए।उन्होंने भारत की तुलना चीन, जापान और जर्मनी से करते हुए कहा कि भारत की कार्य उत्पादकता दुनिया में सबसे कम उत्पादक देशों में एक है।

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विकसित देश बनाने के लिए छिड़ी नई बहस

Narayan Murthy Says 70 Hours Working And Debate: इंफोसिस के सह-संस्थापक एन. आर. नारायण मूर्ति के काम करने के घंटे को लेकर दिए गए बयान के बाद देश में बहस छिड़ गई है। मूर्ति ने कहा कि देश की उत्पादकता बढ़ाने के लिए युवाओं को सप्ताह में 70 घंटे काम करना चाहिए जिसे लेकर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ में लोग बंटे नजर आ रहे हैं। इसमें कॉरपोरेट जगत से लेकर आम लोग भी अपनी राय रख रहे हैं। असल में इस समय दुनिया में कही भी 70 घंटे काम नहीं किया जा रहा है। अगर दुनिया का औसत देखा जाय तो वह सप्ताह में 40-44 घंटे का है। वहीं सबसे ज्यादा वर्किंग घंटे Mauritania में 54 घंटे हैं। इसके बाद मिस्र में 53, गांबिया में 51 और कतर में 50 घंटे हैं। जबकि भारत में यह 48 घंटे है। फिर सवाल उठता है कि मूर्ति ने ऐसा क्यों कहा..

क्यों बोले नारायण मूर्ति

इंफोसिस के सीएफओ मोहनदास पई के साथ ‘3वन4’ कैपिटल के पॉडकास्ट 'द रिकॉर्ड' के उद्घाटन एपिसोड में बातचीत के दौरान मूर्ति ने कहा कि युवाओं को अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए अतिरिक्त घंटे काम करना चाहिए।उन्होंने भारत की तुलना चीन, जापान और जर्मनी से करते हुए कहा कि भारत की कार्य उत्पादकता दुनिया में सबसे कम उत्पादक देशों में एक है। जब तक हम अपनी कार्य उत्पादकता में सुधार नहीं करते... हम उन देशों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे जिन्होंने बहुत अधिक प्रगति की है। इसलिए, मेरा अनुरोध है कि हमारे युवाओं को कहना चाहिए, ‘यह मेरा देश है। मैं सप्ताह में 70 घंटे काम करना चाहूंगा।’

लोगों ने क्या कहा

मूर्ति की टिप्पणियों की कुछ लोगों ने ‘अधिक काम करने की संस्कृति’ को बढ़ावा देने वाली करार देकर आलोचना की जबकि कुछ अन्य लोगों ने युवाओं को काम करने के लिए प्रेरित करने की कोशिश के लिए उनकी प्रशंसा की।भारतीय हास्य कलाकार और अभिनेता वीर दास ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि जीवन कठिन है। आप एक लड़की से मिलते हैं, प्यार में पड़ जाते हैं, शादी कर लेते हैं। उसके पिता चाहते हैं कि आप सप्ताह में 70 घंटे काम करें। आप इतनी मेहनत नहीं कर सकते, आप बस आराम करना चाहते हैं और इंग्लैंड चलाओ।

एक अन्य ‘एक्स’यूजर ने कहा कि अधिक काम से उन्हें तनाव और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं हुईं। उसने कहा कि 38 साल की उम्र में ज्यादा काम करने से मुझे दिल का दौरा पड़ा और जीवन भर दवाइयों पर निर्भर रहना पड़ा! कृपया इन लोगों की बात न सुनें, खून चूसने वाली जोंकें ऊंची कुर्सियों पर बैठकर व्याख्यान देती हैं।

कॉरपोरेट दिग्गजों ने किया सपोर्ट

मूर्ति के बयान का कई लोगों ने समर्थन भी किया है और कहा है कि यह भारत को आगे ले जाने के प्रति समर्पण को दर्शाता है।जेएसडब्ल्यू समूह के अध्यक्ष सज्जन जिंदल ने कहा कि मैं नारायण मूर्ति के बयान का दिल से समर्थन करता हूं। यह थकावट के बारे में नहीं है, यह समर्पण के बारे में है। हमें भारत को 2047 में एक आर्थिक महाशक्ति बनाना है जिस पर हम सब गर्व कर सकें। पांच दिवसीय सप्ताह की संस्कृति वह नहीं है जो हमारे आकार के तेजी से विकासशील देश को चाहिए।ओला कैब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) भाविश अग्रवाल ने भी ‘एक्स’पर समर्थन में पोस्ट किया कि माननीय मूर्ति के विचारों से पूरी तरह सहमत हूं। यह हमारा समय नहीं है कि कम काम करे और अपना मनोरंजन करें। बल्कि यह हमारा वह पल है जब हम सब कुछ करें और एक ही पीढ़ी में वह बनाएं जो अन्य देशों ने कई पीढ़ियों में बनाया है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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