प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोने नहीं खरीदने की अपील की है। पीएम मोदी ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए सोने नहीं खरीदने की अपील की है। ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की कीमत में बड़ा उछाल आया है। कच्चे तेल के आयात पर भारत का भारी विदेशी मुद्रा खर्च हो रहा है। तेल के अलावा सोने पर सबसे अधिक विदेशी मुद्रा खर्च होता है। विदेशी मुद्रा को बचाने के लिए सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी भाी बढ़ाई गई है। इसका असर भी अब दिखाई दे रहा है। देश में सोने की मांग में कमी आई है। इस बीच एक अच्छी खबर आई है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमत में गिरावट आ सकती है।
अजय केडिया क्या कहना है?
कमोडिटी मार्केट के दिग्गज एक्सपर्ट और केडिया कमोडिटीज के एमडी अजय केडिया (Ajay Kedia) के मुताबिक, आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में एक बड़ा करेक्शन (गिरावट) देखने को मिल सकता है। इसके पीछे वो कई वजह गिनाते हैं। अजय केडिया के अनुसार, इतिहास खुद को दोहरा सकता है। मौजूदा वैश्विक हालात वैसे ही बन रहे हैं जैसे साल 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस (Global Financial Crisis) और साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरुआती दौर में देखे गए थे। मौजूदा समय में कच्चे तेल से महंगाई तेजी से बढ़ रही है। कच्चे तेल की कीमत जल्द कम होने की उम्मीद नहीं है। इससे ग्लोबल मार्केट में सुस्ती (Slowdown) आएगी।
उनके अनुसार, इतिहास गवाह है कि जब भी ऐसी आर्थिक सुस्ती या संकट की शुरुआत होती है, तो लिक्विडिटी (कैश) की कमी के कारण शुरुआती दौर में सोने और चांदी में तेजी के बजाय गिरावट दर्ज की जाती है। अभी भी बाजार में ठीक वैसी ही स्थिति बन रही है। इसलिए दोनों कीमती धातु में गिरावट आ सकती है।
कितना सस्ता हो सकता है सोना और चांदी?
सोना (Gold) गिरकर ₹1.40 लाख से ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है।
चांदी (Silver) टूटकर ₹2.20 लाख से ₹2.25 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर तक आ सकती है।
अजय केडिया का मानना है कि अगर अगस्त-सितंबर तक अगर सोने और चांदी गिरकर इस लेवल पर पहुंच जाता है तो यह लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी का सबसे सुनहरा मौका हो सकता है।
सितंबर के बाद तेजी की संभावना
सितंबर तक वैश्विक हालात ठीक होने की उम्मीद है। उसके बाद त्योहारी सीजन भी शुरू होगा। इस कारण सोने और चांदी में सितंबर के बाद तेजी देखने को मिल सकती है। एक बड़ा कारण सेंट्रल बैंक्स (केंद्रीय बैंक) द्वारा लगातार सोने की भारी खरीदारी भी है। सेंट्रल बैंकों की यह मजबूत बाइंग लॉन्ग टर्म में कीमतों को नए रिकॉर्ड स्तर पर ले जाएगी।
