देशभर के कारोबारियों के लिए अच्छी खबर है। माल एवं सेवा कर परिषद (GST) इस सप्ताह होने वाली बैठक में जीएसटी में व्यापक सुधारों के तहत कर रिफंड की समयसीमा घटाकर 17 दिन कर सकती है। आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। फिलहाल जीएसटी रिफंड में 21 से 45 दिन का समय लगता है। इसके साथ ही करदाताओं को नोटिस जारी करने के मामले में एक समान मानक बनाने और एक निर्धारित सीमा से नीचे के मामलों में कोई नोटिस नहीं देने के प्रस्ताव पर भी जीएसटी परिषद विचार करेगी।
8 अक्टूबर को जीएसटी परिषद की बैठक
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद की बैठक बृहस्पतिवार को होगी। परिषद में राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्री भी शामिल हैं। सूत्रों ने कहा कि इस बार की बैठक में प्रक्रिया में सुधारों पर जोर है जिसके तहत रिफंड (कर वापसी) की समयसीमा को घटाने समेत कुल पांच क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि रिफंड की दस दिन के भीतर पुष्टि कर दी जाएगी, जिसमें जोखिम जांच के आधार पर 90 प्रतिशत राशि जारी की जाएगी।
रिफंड प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा
सूत्रों ने कहा कि सभी मामलों में रिफंड 17 दिन में पूरा करने का प्रस्ताव है जिसपर जीएसटी परिषद विचार करेगी।
उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर इस पर बार रिफंड प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ पांच क्षेत्रों पर जोर है। इसके साथ नोटिस, सुनवाई और आदेश के लिए एक समान मानक बनाने का प्रस्ताव है। साथ ही एक तय सीमा से कम के मामलों में कोई नोटिस नहीं देने का प्रस्ताव है। इस पर परिषद विचार करेगी।
रजिस्ट्रेशन को भी आसान बनाया जाएगा
सूत्र ने कहा कि इसके अलावा, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 61 प्रतिशत करदाताओं को बिना किसी अधिकारी के हस्तक्षेप के तीन कार्यदिवस में पंजीकरण दिया जा रहा है। शेष करदाताओं के लिए प्रक्रिया को इस तरह सरल बनाया जा रहा है कि अनावश्यक सवालों और आवेदन खारिज होने से बचा जा सके।
सूत्र ने कहा कि इसके साथ प्रक्रिया को इस तरह सरल बनाना है कि किए गए संशोधनों को उचित तरीके से दर्ज किया जाए, जिससे बदलावों का पूरा रिकॉर्ड रहे और खरीदार के बही-खाते में संबंधित बदलाव स्वतः दर्ज हो जाएं।
नोटिस देने की जरूरत नहीं होगी
उन्होंने कहा कि चालान मिलान की इस प्रक्रिया का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ’इनपुट टैक्स क्रेडिट’ की पुष्टि उसे दर्ज किए जाने के समय ही हो जाए। इससे बड़ी संख्या में विसंगतियों से संबंधित नोटिस जारी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सूत्र ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि प्रणाली को वह काम करना चाहिए जो आंकड़ों के आधार पर किया जा सकता है। अधिकारी के पास केवल वही मामले रहने चाहिए, जिनमें निर्णय की आवश्यकता हो।
