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LPG या PNG घर के लिए कौन सी गैस पड़ती है सस्ती? दोनों का कनेक्शन लेने में कितना आता है खर्चा?

आज के समय में जब महंगाई हर तरफ बढ़ रही है, तो घर के बजट में रसोई गैस का खर्च एक बड़ा हिस्सा होता है। ऐसे में हर गृहणी और परिवार के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या सिलेंडर (LPG) का इस्तेमाल जारी रखना सही है या फिर पाइप वाली गैस (PNG) लगवाना ज्यादा फायदेमंद होगा?

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LPG Vs PNG

मिडिल ईस्ट ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच के संघर्ष ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है, अब भारतीय रसोई के बजट पर भी सीधा असर डालने लगा है। वैश्विक स्तर पर गैस सप्लाई चेन बाधित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। वहीं, देश पैनिक की स्थिति न बने और लोगों को समय पर गैस मिलती रहे इसके लिए कई नियम हाल ही में एलपीजी को लेकर बनाया है. अनिश्चितता के माहौल में हर भारतीय परिवार के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर रसोई के लिए कौन सा विकल्प सबसे सुरक्षित और किफायती है एलपीजी (LPG) सिलेंडर या फिर पाइप वाली पीएनजी (PNG) गैस?

ये दोनों ही ईंधन अपनी-अपनी खूबियों और खर्चों के साथ आते हैं। भारत के कई शहरों में अब पाइपलाइन बिछ चुकी है, जिससे लोगों के पास अब चुनाव करने का मौका है। आइए जानते हैं कि इस वैश्विक संकट के बीच आपके घर के लिए कौन सा कनेक्शन लेना सस्ता पड़ेगा और दोनों को लगवाने में कितना खर्च आता है।

कौन सी गैस है सस्ती?

कीमत की बात करें तो पीएनजी (PNG) को आमतौर पर एलपीजी के मुकाबले 20% से 30% तक सस्ता माना जाता है। इसके पीछे मुख्य कारण इसकी मापन प्रक्रिया है। एलपीजी सिलेंडर में आप एक मुश्त पैसा देते हैं और सिलेंडर में कितनी गैस बची है, इसका सही अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। कई बार सिलेंडर के नीचे कुछ गैस बची रह जाती है जो बर्बाद चली जाती है। इसके विपरीत, पीएनजी में बिजली के मीटर की तरह ही मीटर लगा होता है। आप महीने भर में जितनी गैस इस्तेमाल करते हैं, आपको केवल उतने ही यूनिट्स का पैसा देना होता है। चूंकि इसमें सिलेंडर की ट्रांसपोर्टेशन और रिफिलिंग की लागत नहीं जुड़ी होती, इसलिए यह लंबी अवधि में ज्यादा बचत कराती है।

कनेक्शन लेने में कितना आता है खर्चा?

नया कनेक्शन लेने के मामले में एलपीजी (LPG) शुरुआती तौर पर थोड़ा सस्ता पड़ सकता है। एक नए एलपीजी कनेक्शन (सिंगल सिलेंडर) के लिए आपको लगभग 3,000 से 4,500 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इसमें रेगुलेटर, पाइप, सुरक्षा डिपॉजिट और नीली किताब (Blue Book) का खर्च शामिल होता है। अगर आप उज्ज्वला योजना के तहत पात्र हैं, तो यह कनेक्शन आपको काफी कम कीमत या मुफ्त में भी मिल सकता है।

वहीं, पीएनजी (PNG) कनेक्शन लेने का शुरुआती खर्च थोड़ा ज्यादा होता है। अलग-अलग शहरों और गैस कंपनियों (जैसे इंद्रप्रस्थ गैस या गेल) के हिसाब से इसका शुरुआती रजिस्ट्रेशन और सिक्योरिटी डिपॉजिट 5,000 से 7,000 रुपये के बीच हो सकता है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि कई कंपनियां अब इस राशि को आसान किश्तों (EMIs) में भी वसूलती हैं, जिसे आप अपने मासिक गैस बिल के साथ चुका सकते हैं। एक बार कनेक्शन लगने के बाद, आपको बार-बार सिक्योरिटी देने की जरूरत नहीं होती और मेंटेनेंस का खर्च भी न के बराबर होता है।

सुविधा और सुरक्षा का अंतर

सुविधा के मामले में पीएनजी का कोई मुकाबला नहीं है। आपको कभी भी गैस खत्म होने की चिंता नहीं करनी पड़ती और न ही सिलेंडर बुक करने या डिलीवरी बॉय का इंतजार करने का झंझट होता है। यह 24 घंटे उपलब्ध रहती है। सुरक्षा के लिहाज से भी पीएनजी को बेहतर माना जाता है। एलपीजी सिलेंडर में गैस काफी उच्च दबाव (High Pressure) पर स्टोर होती है, जिससे लीक होने पर आग लगने का खतरा ज्यादा होता है। पीएनजी पाइपलाइन में गैस का दबाव बहुत कम होता है। साथ ही, पीएनजी हवा से हल्की होती है, इसलिए अगर कभी रिसाव (Leakage) हो भी जाए, तो यह तुरंत खिड़कियों के जरिए बाहर निकल जाती है, जबकि एलपीजी भारी होने के कारण जमीन की सतह पर जमा हो जाती है जो बेहद खतरनाक है।

हालांकि, पीएनजी की एक सीमा यह है कि यह केवल उन्हीं इलाकों में उपलब्ध है जहां गैस कंपनियों ने अपनी पाइपलाइन बिछाई है। अगर आप किराए के घर में रहते हैं और बार-बार घर बदलते हैं, तो एलपीजी सिलेंडर आपके लिए ज्यादा व्यावहारिक है क्योंकि इसे आप आसानी से कहीं भी ले जा सकते हैं। पीएनजी का कनेक्शन पते के साथ जुड़ा होता है और इसे शिफ्ट करना एक लंबी प्रक्रिया है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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