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अडानी पर हिंडनबर्ग रिपोर्ट से सहमा LIC, ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए बनाया अब नया प्लान

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 25, 2023, 09:17 AM IST

अडानी मामले में हिंडनबर्ग रिपोर्ट सामने आने के बाद एलआईसी के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई है। इस रिपोर्ट के बाद से एलआईसी के निवेश पर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

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एलआईसी

Photo : PTI

LIC Investment Exposure Policy: अडानी समूह पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद एलआईसी के निवेश पर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं। एलआईसी के एक्सपोजर को लेकर भी जमकर हंगामा हो रहा है, इसका सीधा असर बीमा कंपनियों के शेयर पर पड़ा है और कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई है।

हालांकि, अब देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC इस विवाद से सीख लेते हुए अपने निवेश, कर्ज और इक्विटी एक्सपोजर को बदलने की योजना बना रही है। कंपनी के इस कदम के पीछे रिस्क को कम करना है। एलआईसी को उम्मीद है कि उसके इस कदम से बीमाधारकों का भरोसा दोबारा कायम होगा और निवेश बढ़ेगा।

कंपनी ने यह योजना की तैयार

दरअसल, अब एलआईसी कर्ज और कंपनियों में इक्विटी एक्सपोजर पर कैप लगाने की योजना बना रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एलआईसी अपने निवेश और इक्विटी में एक्सपोजर पर सीमा तय करेगी, जिससे रिस्क को कम किया जा सके। वर्तमान में एलआईसी किसी कंपनी में बकाया इक्विटी का 10 प्रतिशत से अधिक और बकाया डेट का 10 प्रतिशत निवेश नहीं कर सकती है। हालांकि, एलआईसी की नई योजना को अभी बोर्ड की मंजूरी नहीं मिली है।

अडानी मामले के बाद शेयर हुए धड़ाम

बता दें, एलआईसी ने अडानी समूह की सात कंपनियों में निवेश किया है। यह निवेश हजारों करोड़ में है, लेकिन जब अडानी मामले पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट सामने आई तो एलआईसी के शेयरों को काफी नुकसान हुआ और शेयर ऑल टाइम लो पर पहुंच गए। बीते शुक्रवार को एलआईसी के शेयर की कीमत घटकर 562 रुपये तक पहुंच गई।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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