Fertiliser News : केंद्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा और उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य फसलों के लिए जरूरी उर्वरक यानी खाद की उपलब्धता की समीक्षा करना और किसानों को किसी भी संभावित संकट से बचाना था। एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि यह बैठक विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण उत्पन्न हुई आपूर्ति समस्याओं के मद्देनजर आयोजित की गई। मध्य पूर्व क्षेत्र यानी खाड़ी देश भारत के लिए उर्वरक और इसके कच्चे माल का प्रमुख स्रोत है। वर्तमान में वहां जारी राजनीतिक और भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक आपूर्ति सीरीज प्रभावित हो रही है। इसी संदर्भ में केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी संसद में नड्डा से मुलाकात की और जरूरी कार्रवाई के लिए समन्वय किया।
खाद्य और उर्वरक स्टॉक पर्याप्त: सरकार का भरोसा
कृषि मंत्रालय ने बुधवार को प्रेस ब्रिफिंग में कहा कि किसानों और कृषि क्षेत्र को आगामी खरीफ मौसम में किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। मंत्रालय ने बताया कि बीजों और उर्वरकों का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। अतिरिक्त सचिव मनींदर कौर द्विवेदी ने बताया कि बीज की उपलब्धता 19.29 लाख क्विंटल अधिक है, जबकि अनुमानित आवश्यकता 166.46 लाख क्विंटल है। उन्होंने यह भी कहा कि खरीफ फसलों के लिए आवश्यक उर्वरक की कुल मांग 390.52 लाख मीट्रिक टन है, जिसमें से करीब 46 प्रतिशत यानी 180 लाख मीट्रिक टन पहले से स्टॉक में मौजूद है। यह कदम किसानों की चिंता को कम करने और खेती को सुचारू रूप से चलाने के लिए उठाया गया है।
उर्वरक: खेती की सफलता के लिए महत्वपूर्ण
खरीफ मौसम भारत की कृषि के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवधि है। इस समय फसलों की बोआई और वृद्धि होती है। उर्वरक इस दौरान उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि, भारत का उर्वरक क्षेत्र आयात पर काफी निर्भर है। यह निर्भरता वैश्विक आपूर्ति में किसी भी व्यवधान से सीधे प्रभावित होती है। विशेषज्ञों और एजेंसियों ने खरीफ मौसम में उर्वरक की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई है। क्रिसिल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व संकट के कारण घरेलू उर्वरक उत्पादन में 10-15 प्रतिशत की कमी हो सकती है।
भारत में उर्वरक का वितरण और प्रकार
भारत में उर्वरक की खपत के प्रकार इस प्रकार हैं।
- यूरिया: कुल खपत का 45 प्रतिशत
- कॉम्प्लेक्स उर्वरक (
DAP औरNPK ): करीब 33 प्रतिशत - सिंगल सुपर फॉस्फेट (
SSP ) और म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP): बाकी हिस्सा
यूरिया की करीब 20 प्रतिशत और कॉम्प्लेक्स उर्वरक की करीब एक-तिहाई मात्रा आयात पर निर्भर है। यूरिया उत्पादन में प्राकृतिक गैस की लागत करीब 80 प्रतिशत होती है। अमोनिया और फॉस्फोरिक एसिड जैसे अन्य इनपुट भी ज्यादातर विदेश से आते हैं क्योंकि भारत में इनकी घरेलू उपलब्धता सीमित है।
भारत की उर्वरक आपूर्ति का प्रमुख स्रोत
मध्य पूर्व भारत के उर्वरक आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वित्त वर्ष 2026 की पहली नौ महीनों में करीब 40 प्रतिशत उर्वरक आयात इसी क्षेत्र से हुआ। इसके पिछले वर्षों में आंकड़े इस प्रकार थे। 2025 में: 42 प्रतिशत, 2024 में: 28 प्रतिशत। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की आपूर्ति बाधा भारत के उर्वरक की उपलब्धता और कीमतों पर असर डाल सकती है।
सरकार की रणनीति और किसानों को भरोसा
केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ सक्रिय समन्वय कर किसानों को भरोसा दिलाया है कि खरीफ मौसम में उर्वरक की कमी नहीं होने पाएगी। मंत्रियों और मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में आवश्यक स्टॉक सुनिश्चित करने और आपूर्ति सीरीज को मजबूत करने पर चर्चा हुई। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि बीज और उर्वरक दोनों का पर्याप्त स्टॉक तैयार है। किसानों को फसल बोने और उत्पादन बढ़ाने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। यह कदम भारत की कृषि उत्पादन क्षमता और खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
केंद्र सरकार ने खरीफ मौसम के दौरान उर्वरक की उपलब्धता और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए हैं। विशेषज्ञों की संभावित चिंताओं के बावजूद, किसानों को आश्वस्त किया गया है कि उनकी फसलें और उत्पादन इस संकट से प्रभावित नहीं होंगे।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। बिज़नेस (Business News) अपडेट और आज का सोने का भाव (Gold Rate Today), आज की चांदी का रेट (Silver Rate Today) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।
