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अपस्ट्रीम सेक्टर में में इज ऑफ डूइंग बिजनेस को लेकर JWG की रिपोर्ट जारी, MoPNG को नीतिगत सुधारों की सिफारिश

भारत के अपस्ट्रीम तेल और गैस क्षेत्र में नीतिगत सुधारों की दिशा में एक अहम पहल के तहत, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) द्वारा गठित संयुक्त कार्य समूह (JWG) की अंतरिम रिपोर्ट को तेल एवं गैस महानिदेशालय (DGH) की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य देश के अन्वेषण और उत्पादन (E&P) क्षेत्र में व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना है।

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अपस्ट्रीम क्षेत्र में व्यापार सुगमता को लेकर JWG की रिपोर्ट जारी

Photo : iStock

भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने अपस्ट्रीम तेल और गैस क्षेत्र में सुधारों के लिए एक अहम पहल की शुरुआत की है। मंत्रालय द्वारा गठित संयुक्त कार्य समूह (JWG) की अंतरिम रिपोर्ट अब तेल एवं गैस महानिदेशालय (DGH) की वेबसाइट पर उपलब्ध है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य देश के अन्वेषण और उत्पादन (E&P) क्षेत्र में व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना है।

रिपोर्ट में उजागर किए गए प्रमुख मुद्दे

रिपोर्ट में उद्योग से प्राप्त 83 प्रमुख मुद्दों की समीक्षा की गई, जिसमें से 16 मुद्दों को मंत्रालय के स्तर पर तत्काल सुलझाने के लिए पहचाना गया। इनमें सबसे प्रमुख समस्या वैधानिक अनुमोदनों में देरी, खासकर पर्यावरण और वन स्वीकृतियों की है।

रिपोर्ट में सुझाए गए सुधार

  • "एक्सक्यूजेबल डिले" की परिभाषा विस्तार से: OALP और DSF ब्लॉक्स में अनुमोदन की देरी को समझने के लिए 120 दिनों की सीमा तय की गई है।
  • विकसित अवसंरचना लागत में कमी: यदि किसी ऑपरेटर का उत्पादन बिंदु अनुबंध क्षेत्र से बाहर है तो उसे लचीलापन देने की सिफारिश की गई है।
  • पूर्वोत्तर और अंडमान में विशेष भुगतान आधारित विस्तार: नियामकीय देरी से समय की भरपाई के लिए यह कदम सुझाया गया है।
  • नई तकनीकों का उपयोग: मौजूदा अनुबंधों में संशोधन कर नए और वैकल्पिक अन्वेषण तकनीकों का उपयोग करने की सिफारिश की गई है।
  • संसाधन साझेदारी के लिए सहयोगात्मक अवसंरचना मॉडल: छोटे ऑपरेटरों के लिए रिग्स, उपकरण और सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने के लिए यह कदम सुझाया गया है।

अंतर-मंत्रालयी समन्वय की आवश्यकता

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि कई महत्वपूर्ण मसले, जैसे वन और पर्यावरण मंजूरी, रक्षा से जुड़े एनओसी, और कर प्रणाली, विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों के समन्वय के बिना हल नहीं हो सकते। इसके लिए संयुक्त स्थायी समिति (Joint Standing Committee) का गठन करने की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट में अन्य सुधार प्रयास

इस रिपोर्ट में पहले से जारी सुधार प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है, जैसे:-

  • नेशनल डेटा रिपॉजिटरी (NDR) का उन्नयन
  • मिशन अन्वेषण के तहत नए सिस्मिक सर्वेक्षण
  • इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट सिस्टम (IMS) की स्थापना
  • DGH UrjaVarta के माध्यम से तकनीकी कार्यशालाओं का आयोजन
  • हाइड्रोकार्बन एफिशिएंसी एंड न्यू एनर्जी (HENE) विभाग की स्थापना
  • कार्बन कैप्चर पर फोकस

भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम

भारत में कच्चे तेल का आयात निर्भरता 88% और प्राकृतिक गैस का 51% होने के कारण, यह रिपोर्ट समय पर एक ठोस प्रयास है जो घरेलू उत्पादन बढ़ाने, निवेश को आकर्षित करने और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की ओर अग्रसर होने में सहायक साबित हो सकता है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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