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ईरान टेंशन बढ़ा और रुपया हुआ धड़ाम! ​डॉलर के सामने आज फिर बड़ी गिरावट, देखें ताजा रेट

रुपये में गिरावट थम नहीं रही है। ईरान और अमेरिका में युद्ध शुरू होने और कच्चे तेल की कीमत में उछाल से रुपया फिर टूट गया है।

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रुपया बनाम डॉलर

ईरान संकट गहराने से रुपये पर दबाब बढ़ा है। आज शुरुआती कारोबार में रुपये में बड़ी गिरावट आई है। रुपया गुरुवार को शुरुआती कारोबार में 32 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.57 पर पहुंच गया। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से घरेलू मुद्रा पर दबाव है। इसके अलावा विदेशी मुद्रा की निरंतर निकासी, घरेलू शेयर बाजारों के कमजोर रुख और डॉलर में मामूली मजबूती ने भी स्थानीय मुद्रा पर दबाव डाला। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.55 प्रति डॉलर पर खुला और फिर टूटकर 95.57 प्रति डॉलर पर पहुंच गया।

बुधवार को बढ़त के साथ बंद हुआ था

रुपया बुधवार को 16 पैसे की बढ़त के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.25 पर बंद हुआ था। अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने तथा घरेलू मुद्रा में और गिरावट को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप से रुपये को समर्थन मिला था।

इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.01 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.95 पर रहा। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.65 प्रतिशत की बढ़त के साथ 94.64 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा।

टूटता रुपया बढ़ा रहा आपका खर्च

महंगाई का बोझ: भारत अपना अधिकतर तेल आयात करता है। रुपया कमजोर होने पर तेल कंपनियों को डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं। हाल के दिनों में पेट्रोल, डीजल से लेकर सीएनजी महंगा हुआ है। तेल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी हुई है, जिससे सब्जियां, फल, अनाज और दूध जैसी रोजमर्रा की चीजें महंगी हुई है। यानी कमजोर रुपया आप पर महंगाई का बोझ बढ़ा रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स महंगे: आप जो स्मार्टफोन, लैपटॉप, या टीवी इस्तेमाल करते हैं, उनके ज्यादातर पार्ट्स विदेशों से आयात होते हैं। रुपये के गिरने से कंपनियों को आयात के लिए ज्यादा पैसा चुकाना पड़ता है, जिसका बोझ वे ग्राहकों पर डालती हैं। यानी कमजोर रुपया इन चीजों की कीमत में बढ़ोतरी करने का काम करेगा।

विदेशी शिक्षा और यात्रा पर अधिक खर्च: अगर आपके बच्चे विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं, तो कमजोर रुपया आप पर वित्तीय बोझ बढ़ा रहा है। बच्चों की फीस और रहने का खर्च बढ़ जाएगा। इसी तरह, विदेश घूमने जाने का बजट (होटल, फ्लाइट, शॉपिंग) भी काफी महंगा हो जाएगा।

दवाइयां और इलाज महंगा: भारत की फार्मा कंपनियां दवाइयां बनाने के लिए कच्चा माल चीन और अन्य देशों से डॉलर में खरीदती हैं। रुपया कमजोर होने पर दवाइयों की कीमत बढ़ेगी।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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