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Hormuz खोलने के लिए ईरान ने मांगे $11 ट्रिलियन, सीजफायर पर 48 घंटे का अल्टीमेटम

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत पटरी से उतरती दिख रही है। ईरान ने होर्मुज को खोलने और अमेरिका से बात करने के लिए 48 घंटे के भीतर 11 ट्रिलियन डॉलर के एसेट्स को अनफ्रीज करने की मांग की है।

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बढ़ता जा रहा तनाव

Hormuz Strait Crisis : अमेरिका-ईरान के बीच तनाव गहराता जा रहा है। एक तरफ जहां अमेरिका ने होर्मुज की नाकेबंदी कड़ी कर दी है। वहीं, ईरान ने अमेरिका को 48 घंटे में उसके जब्त किए गए 11 लाख करोड़ डॉलर के एसेट्स को अनफ्रीज करने के लिए कहा है। ईरानी विदेश मंत्री ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि अगर उनकी यह मांग नहीं मानी गई, तो 48 घंटे बाद ईरान सीजफायर को खत्म कर सकता है।

US Iran Talk के दूसरे दौर की बातचीत टलने के बाद होर्मुज डबल पहरे में है। एक तरफ अमेरिका ने नाकेबंदी कर रखी है। दूसरी तरफ ईरान भी होर्मुज से किसी को नहीं गुजरने दे रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची (Abbas Araghchi) ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट तब तक बंद रहेगा, जब तक ईरान के 11 ट्रिलियन डॉलर के फ्रोजन एसेट्स जारी नहीं किए जाते। उन्होंने अमेरिका को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि अगर इस अवधि में कोई प्रस्ताव नहीं आया तो मौजूदा सीजफायर समाप्त हो सकता है।

$11 ट्रिलियन की मांग ने बढ़ाई चिंता

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के बयान ने होर्मुज को लेकर पहले से जारी जियो-पॉलिटिकल टेंशन को चरम पर पहुंचा दिया है।अरागची के बयान से साफ पता चलता है कि ईरान किसी भी सूरत में अमेरिका के सामने झुकने को राजी नहीं है। इसके अलावा होर्मुज उसके लिए ऐसा रणनीतिक हथियार है, जिसके जरिये फ्रोजन एसेट्स को वापस हासिल करने की उम्मीद कर रहा है।

11 ट्रिलियन डॉलर पर उठे सवाल

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अपने बयान में यह साफ नहीं किया है कि 11 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा कैसे से आया और कहां-कहां ईरान की कितनी संपत्ति फ्रोजन है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान के वास्तविक फ्रोजन एसेट्स करीब 300 बिलियन डॉलर से 1 ट्रिलियन डॉलर के बीच में हो सकते हैं। ऐसे में 11 ट्रिलियन डॉलर की मांग एक कूटनीतिक दबाव की रणनीति मानी जा सकती है।

तेल बाजार में उबाल, भारत पर सीधा असर

Strait of Hormuz से दुनिया के करीब 20% तेल का व्यापार होता है। इसके बंद होते ही कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। वहीं, ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इसका असर एशिया और यूरोप के साथ भारत जैसे बड़े आयातकों पर साफ दिख रहा है। भारत के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती बन सकती है। एक तरफ आयात बिल बढ़ेगा, दूसरी ओर महंगाई का दबाव तेज होगा। उर्वरक और ईंधन की लागत बढ़ने से कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ने का खतरा है।

फिर भड़क सकता है युद्ध

फिलहाल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी तरफ से अनिश्चितकाल के लिए सीजफायर का ऐलान कर रखा है। लेकिन, ईरान की तरफ से सीजफायर को खत्म करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम देना चिंता बढ़ा रहा है। क्योंकि, इससे युद्ध फिर भड़क सकता है।इसका मतलब होगा वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा झटका और तेल बाजार में और उछाल। फिलहाल दुनिया की नजरें होर्मुज पर टिकी हैं, जहां से गुजरने वाला हर जहाज अब भू-राजनीति का हिस्सा बन चुका है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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