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IPO Market 2026 : पिछले साल 365 IPO, इस साल सन्नाटा! डर गईं कंपनियां या निवेशकों ने मोड़ा मुंह?

पिछले साल 2025 में भारतीय शेयर बाजार में रिकॉर्ड 365 IPO आए। लेकिन, 2026 में अचानक IPO बाजार सुस्त पड़ गया है। इस साल 77 IPO आए हैं। जानें निवेशकों की सतर्कता और इस खामोशी की 5 बड़ी वजहें।

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एक्सपर्ट इसे तूफान से पहले की खामोशी बता रहे

IPO Market 2026 : भारतीय शेयर बाजार जियो पॉलिटिकल वजहों से फिलहाल भारी वोलैटिलिटी के दौर से गुजर रहा है। इसका सीधा असर प्राइमरी मार्केट यानी IPO मार्केट पर भी दिख रहा है। 2025 में साल के तकरीबन हर दिन एक IPO आया। लेकिन, 2026 में सुस्ती का साफ दिख रही है। NSE के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में 365 से ज्यादा IPO लॉन्च हुए। लेकिन, 2026 में यह रफ्तार काफी धीमी है। इस साल 21 मई, 2026 तक सिर्फ 77 IPO ही बाजार में आए हैं। जबकि, पिछले साल जनवरी से मई के बीच 95 IPO आए। इस तरह पिछले साल की तुलना में साल के पहले 5 महीनों में IPO में करीब 19 फीसदी की कमी आई है।

अवधि (Period)कुल IPO की संख्याजुटाई गई रकम
पूरा साल 2025365 IPO$22.4 अरब
जनवरी से मई 202595 IPO₹27,686 करोड़
21 मई 2026 तक77 IPO$3.5 अरब

हर निवेशक के सामने यह बड़ा सवाल है कि आखिर IPO बाजार में आई इस खामोशी की वजह क्या है? क्या यह रिटेल निवेशकों की बेरुखी है या फिर कंपनियां खुद बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर घबराई हुई हैं। 2025 और 2026 के आंकड़ों में इससे जुड़े सवालों के जवाब छिपे हैं। 2025 में IPO बाजार ने रिकॉर्ड कायम किए। इस दौरान 106 मेनबोर्ड और 259 SME कंपनियां बाजार में लिस्ट हुईं। 2025 में IPO के जरिये कंपनियों ने भारतीय बाजार से रिकॉर्ड 22.4 अरब डॉलर जुटाए। वहीं, इस साल केवल 3.5 अरब डॉलर ही जुटाए जा सके हैं।

IPO बाजार में खामोशी की 5 सबसे बड़ी वजहें (Why IPO Market is Slowing Down?)

1. प्रीमियम वैल्यूएशन (Premium Valuation) को लेकर बढ़ी सतर्कता

पिछले दो वर्षों में कई टेक और न्यू-एज कंपनियों ने बहुत ऊंचे वैल्यूएशन पर IPO लाने की कोशिश की थी। 2025 में कुछ बड़ी लिस्टिंग्स के बाद शेयर इश्यू प्राइस से नीचे फिसल गए, जिससे रिटेल निवेशकों का भारी नुकसान हुआ। अब निवेशक सिर्फ कंपनी का नाम देखकर नहीं, बल्कि प्रॉफिटेबिलिटी, बिजनेस मॉडल और सही वैल्यूएशन देखकर पैसा लगा रहे हैं।

2. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली

साल 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) और FIIs द्वारा भारतीय बाजार से लगातार की जा रही फंड निकासी (Capital Outflow) ने मार्केट सेंटीमेंट को कमजोर किया है। जब सेकेंडरी मार्केट में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है, तो कंपनियां प्राइमरी मार्केट (IPO) में उतरने से बचती हैं।

3. SME IPO सेगमेंट में आई ठंडक

पिछले साल तक SME IPO बाजार में अंधाधुंध कमाई हो रही थी और कई छोटे इश्यूज को भारी ओवरसब्सक्रिप्शन मिल रहा था। लेकिन कमजोर लिक्विडिटी और लिस्टिंग के बाद शेयरों में आई तेज गिरावट ने छोटे निवेशकों को सतर्क कर दिया है। रेगुलेटर की सख्त निगरानी ने भी इस सेगमेंट की रफ्तार धीमी की है।

4. वैश्विक अनिश्चितता और जियोपॉलिटिकल तनाव

यह सुस्ती सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। वैश्विक स्तर पर ऊंचे ब्याज दर (Interest Rates), कच्चे तेल की अस्थिर कीमतें और जियोपॉलिटिकल तनाव (Geopolitical Tensions) के कारण दुनियाभर के बाजारों में सतर्कता का माहौल है।

क्या साल की दूसरी छमाही (H2 2026) में लौटेगी तेजी?

भले ही अभी बाजार शांत दिख रहा हो, लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स इसे 'तूफान के पहले की शांति' मान रहे हैं। Bloomberg की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिग्गज ब्रोकरेज फर्म Citigroup का मानना है कि भारत में IPO बाजार फिलहाल धीमा जरूर पड़ा है, लेकिन साल की दूसरी छमाही (H2) में फिर से जबरदस्त तेजी लौट सकती है। ऐतिहासिक रूप से, भारत में ज्यादातर बड़े IPO साल के अंतिम महीनों में ही आते हैं। Citigroup India के इक्विटी कैपिटल मार्केट हेड अरविंद वशिष्ठ के अनुसार, "2026 का कुल IPO वॉल्यूम 2025 के बराबर या उससे 5 से 10% ज्यादा भी हो सकता है।"

Jio और NSE जैसे मेगा IPO का इंतजार

बाजार की नजरें अब देश के सबसे बड़े संभावित पब्लिक इश्यूज पर टिकी हैं। Reliance Group की Jio Platforms और National Stock Exchange (NSE) की संभावित लिस्टिंग को लेकर निवेशकों में भारी उत्सुकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर Jio Platforms का IPO बाजार में आता है, तो यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा IPO साबित हो सकता है। इन बड़े इश्यूज के आते ही बाजार का सेंटीमेंट पूरी तरह बदल जाएगा।

'कहानी' नहीं, अब 'कमाई' देख रहे हैं निवेशक

कुल मिलाकर, 2026 में IPO बाजार बंद नहीं हुआ है, बल्कि यह 'मैच्योर' (Mature) हो गया है। अब कंपनियां और निवेशक दोनों ही 'वेट एंड वॉच' मोड में हैं। बाजार अब केवल हवा-हवाई कहानियों पर नहीं, बल्कि मजबूत बैलेंस शीट और सही प्राइसिंग की मांग कर रहा है, जो कि लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए एक बेहतरीन संकेत है।

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FAQs

साल 2025 के मुकाबले 2026 में IPO क्यों कम आ रहे हैं?

विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली, मार्केट में उतार-चढ़ाव, और कंपनियों के अत्यधिक ऊंचे वैल्यूएशन (High Valuation) के कारण निवेशक अब सतर्क हो गए हैं। यही वजह है कि कंपनियां सही समय का इंतजार कर रही हैं।

क्या 2026 में Jio Platforms का IPO आएगा?

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानिया author

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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