Inherited Gold And Tax Rules : हाल ही में इनकम टैक्स विभाग की एक छापेमारी में मिराज दिग्विजय शाह के ठिकानों और लॉकरों से 3,233.11 ग्राम आभूषण मिले, जिनकी कीमत करीब 1.56 करोड़ रुपये थी। इस पर टैक्स अधिकारियों ने सवाल उठाए। शाह ने सफाई दी कि ये गहने उनके दिवंगत रिश्तेदारों और उनके पिता के हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक मामला 'मिराज दिग्विजय शाह बनाम इनकम टैक्स कमिश्नर' के तहत कोलकाता इनकम टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल (ITAT) पहुंचा। ट्रिब्यूनल ने उनकी दलीलों और सबूतों को सही मानते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया। इस मामले ने यह साबित कर दिया कि खरीद का बिल न होने पर भी अगर पुराने पारिवारिक रिकॉर्ड संभालकर रखे जाएं, तो आप बड़े टैक्स विवाद से बच सकते हैं।
सिर्फ लॉकर में होना मालिकाना हक की गारंटी नहीं
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ घर या लॉकर में गहने रखे होने से आप उसके कानूनी मालिक साबित नहीं होते। आपको विभाग को यह समझाना होगा कि वे गहने कहाँ से आए और उनका असली जरिया (सोर्स) क्या है। अधिकारी यह भी जाँचते हैं कि लॉकर किसके नाम पर है और उसका इस्तेमाल कौन-कौन करता था। अगर आपकी दी गई सफाई से आयकर अधिकारी संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे उन गहनों को 'अघोषित आय' (Unexplained Income) मान सकते हैं, जिस पर बहुत भारी टैक्स और जुर्माना देना पड़ सकता है।
बिल न हो तो वसीयत और पुराने दस्तावेज ही हैं असली सहारा
अगर आपके पास गहनों की पुरानी रसीदें नहीं हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसे में पुराने वैल्यूएशन (मूल्यांकन) रिपोर्ट, वसीयत, पारिवारिक बंटवारे के कागजात, पुराने वेल्थ-टैक्स रिकॉर्ड, बीमा के दस्तावेज, पुरानी तस्वीरें और लॉकर एक्सेस के रिकॉर्ड बहुत काम आते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, कोई एक अकेला कागज शायद पर्याप्त न हो, लेकिन ये सभी दस्तावेज मिलकर यह साबित करने में मदद करते हैं कि गहने पुश्तैनी हैं और पिछली पीढ़ियों से आपके पास आए हैं।
वर्तमान वैल्यूएशन रिपोर्ट का सीमित इस्तेमाल
आज के समय में किसी सुनार या वैल्युअर से बनवाई गई रिपोर्ट से गहनों का वजन और उसकी मौजूदा कीमत तो तय हो सकती है, लेकिन यह साबित नहीं होता कि वे आपको कब और किससे मिले। इसलिए नई वैल्यूएशन रिपोर्ट को हमेशा पुराने ऐतिहासिक कागजात और सबूतों के साथ ही जोड़कर पेश करना चाहिए, ताकि आपकी बात मजबूत हो सके।
घर में गहने रखने की सीमा और सीबीडीटी (CBDT) के नियम
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के निर्देशों के तहत छापेमारी के दौरान जब्ती से छूट के लिए कुछ सीमाएँ तय की गई हैं। एक शादीशुदा महिला अपने पास 500 ग्राम, अविवाहित महिला 250 ग्राम और पुरुष सदस्य 100 ग्राम तक सोने के गहने रख सकते हैं। इस तय सीमा वाले गहनों को आमतौर पर बिना किसी पूछताछ के मान लिया जाता है और उन्हें जब्त नहीं किया जाता। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप इससे ज्यादा गहने नहीं रख सकते। यदि आपके पास अपनी वैध कमाई, बचत या पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा कोई ठोस सबूत है, तो आप इससे अधिक गहने भी सुरक्षित रख सकते हैं।
पारिवारिक लॉकर और नए आयकर कानून के कड़े नियम
इनकम टैक्स एक्ट 2025 के सेक्शन 524 के अनुसार, छापेमारी में जिसके पास या जिसके लॉकर में गहने पाए जाते हैं, कानून प्राथमिक रूप से उसी को उनका मालिक मानता है। इसलिए अगर परिवार के कई सदस्य एक ही लॉकर का इस्तेमाल करते हैं, तो सावधानी बरतनी जरूरी है। लॉकर के अंदर हमेशा एक हस्ताक्षरित लिस्ट रखें, जिसमें लिखा हो कि कौन सा गहना किस सदस्य का है। सबसे बेहतर तरीका यह है कि परिवार के सदस्य अलग-अलग लॉकर रखें।
टैक्स नोटिस मिलने पर अपील करने का सही तरीका
अगर इनकम टैक्स विभाग आपकी दलीलों से असहमत होकर टैक्स की मांग जोड़ देता है, तो आप इसके खिलाफ कमिश्नर (अपील) और उसके बाद ट्रिब्यूनल (ITAT) में चुनौती दे सकते हैं। हालांकि, इन कानूनी अपीलों के निपटारे में सालों लग जाते हैं और इस दौरान जब्त किए गए गहने सरकार के पास ही रहते हैं। इस लंबे झंझट और जुर्माने से बचने के लिए शुरू से ही अपने आभूषणों का एक स्पष्ट और मजबूत पोर्टफोलियो बनाकर रखना ही सबसे बुद्धिमानी है।
