टैरिफ से निपटने के लिए भारत सरकार ने बनाई 4 रणनीति, जानें क्या है प्लान
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Jan 11, 2026, 10:39 AM IST
Indian Economy: प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के अध्यक्ष एस. महेंद्र देव ने कहा कि भारत सरकार टैरिफ से निपटने के लिए 4 सूत्रीय रणनीति अपना रही है। इसमें उद्योगों को समर्थन देना, निर्यात को एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में विविध बनाना, अन्य देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) करना और अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता जारी रखना शामिल है।
एस. महेंद्र देव ने बताया: भारत की नई रणनीति करेगी वैश्विक व्यापार मजबूत (तस्वीर-istock)
Indian Economy : प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के अध्यक्ष एस महेंद्र देव ने कहा है कि भारत सरकार टैरिफ और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की चुनौतियों से निपटने के लिए 4 प्रमुख कदम उठा रही है। उन्होंने यह जानकारी दिल्ली में स्कॉच शिखर सम्मेलन में समाचार एजेंसी आईएएनएस को दी। साथ ही उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य के बारे में बातचीत करते हुए कहा कि जापान, साउथ कोरिया और अन्य कई देश इसे हासिल कर चुके हैं। हमारे पास सही नीतियां हैं और विकसित भारत के लिए 7 से 8 प्रतिशत की वृद्धि दर जरूरी है। इसके लिए हमारी निवेश दर 35 प्रतिशत होनी चाहिए, जो कि फिलहाल 30 प्रतिशत है। इसे बढ़ाने की जरुरत है। आगे जानिए 4 प्रमुख रणनीतियां क्या हैं।
- महेंद्र देव ने बताया कि पहला कदम उद्योगों को मदद पहुंचाना है। इसका मतलब है कि सरकार उन सेक्टर्स और कंपनियों का समर्थन करेगी, जो विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने में कठिनाई महसूस कर रही हैं।
- दूसरा कदम निर्यात में विविधीकरण लाना है। भारत अब सिर्फ अमेरिका या यूरोप पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे देशों में अपने उत्पादों का निर्यात बढ़ाने पर ध्यान देगा।
- तीसरा कदम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) करना है। इसका उद्देश्य अन्य देशों के साथ व्यापार को आसान और अधिक लाभकारी बनाना है।
- चौथा और अंतिम कदम अमेरिका के साथ ट्रेड डील के लिए बातचीत जारी रखना है। इस तरह भारत वैश्विक व्यापार और टैरिफ से जुड़ी चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए ठोस रणनीति बना रहा है।
विकसित भारत के लिए आवश्यक आर्थिक नीतियां
महेंद्र देव ने आगे बताया कि भारत का लक्ष्य विकसित देश बनना है। उन्होंने कहा कि जापान, दक्षिण कोरिया और कई अन्य देश इस मुकाम को पहले ही हासिल कर चुके हैं। इसके लिए जरूरी है कि देश की विकास दर सात से आठ प्रतिशत के बीच रहे। वर्तमान में भारत की निवेश दर 30 प्रतिशत है, लेकिन विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए इसे 35 प्रतिशत तक बढ़ाने की जरूरत है। निवेश दर बढ़ाने का मतलब है कि देश में ज्यादा पैसा उद्योगों, इन्फ्रास्ट्रक्चर और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगाया जाए, जिससे रोजगार और उत्पादन दोनों बढ़ सकें।
विकास दर और भविष्य की उम्मीदें
महेंद्र देव ने बताया कि इस साल भारत की विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने की संभावना है। अगले साल यह दर 6.5 से 7 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना महामारी के बाद पिछले चार वर्षों में देश की औसत विकास दर 7.7 प्रतिशत रही है। इसका मतलब है कि भारत ने महामारी के बावजूद तेजी से आर्थिक सुधार किया है और भविष्य में भी विकास की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
कारोबार में आसानी और नए अवसर
- सरकार ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पाने के लिए कारोबार में आसानी बढ़ाने पर भी जोर दिया है। इसके तहत कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
- परमाणु सेक्टर अब निजी कंपनियों के लिए खोला गया है। इसका मतलब है कि अब निजी कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश और कारोबार कर सकती हैं।
- इंश्योरेंस सेक्टर में अब 100 प्रतिशत एफडीआई (विदेशी निवेश) की मंजूरी दी गई है। इससे विदेशी कंपनियां भारत में पूरी तरह से निवेश कर सकती हैं।
- कई कानूनों का गैर-अपराधीकरण और अविनियमन किया गया है। इसका उद्देश्य नियमों को सरल बनाना और व्यवसाय के लिए बाधाओं को कम करना है।
- महेंद्र देव ने कहा कि इन कदमों से न सिर्फ निवेश बढ़ेगा, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और देश की आर्थिक मजबूती को नए आयाम मिलेंगे।
सरकार की यह चार-स्तरीय रणनीति और सुधारात्मक कदम भारत को वैश्विक व्यापार में प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ विकसित भारत 2047 का सपना पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उद्योगों को मदद, निर्यात में विविधीकरण, एफटीए और अमेरिका से व्यापार समझौते के जरिए भारत अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। बिज़नेस (Business News) अपडेट और आज का सोने का भाव (Gold Rate Today), आज की चांदी का रेट (Silver Rate Today) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।