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रिपब्लिक डे पर हो सकता है इंडिया-यूरोप ट्रेड डील का ऐलान, फुस्स होगा ट्रंप का टैरिफ प्लान!

ट्रंप की टैरिफ धमकियों से पूरी दुनिया के बाजारों में उथल-पुथल का माहौल है। लेकिन, भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) भारत के रिपब्लिक डे पर 'मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील' का ऐलान कर सकते हैं। भारत और ईयू के बीच ड्रेड डील से सीधे तौर पर अमेरिका को झटका लगेगा, क्योंकि ट्रंप दोनों को लगातार टैरिफ बढ़ाने की धमकी दे रहे हैं।

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ट्रंप को लगेगा झटका

Photo : TN Innovations

Republic Day 2026 पर मिसाइलों और फाइटर जेट्स से ज्यादा बड़ा आकर्षण ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स’ यानी India-EU FTA रह सकता है। भारत और ईयू के अधिकारी लंबे समय से इस डील को फाइनल करने में जुटे हैं। इस डील को भारत और ईयू के साथ ही टैरिफ वाले खेल के लिहाज से ग्लोबल गेमचेंजर माना जा रहा है। क्योंकि, यह डील टैरिफ को लेकर अमेरिका की तरफ से दिखाई जा रही मनमानी पर लगाम लगाने का रास्ता खोल सकती है।

परेड से आगे ‘पॉलिसी शो’

ET की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार रिपब्लिक डे पर दिल्ली की परेड सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़े जियो-इकोनॉमिक संकेत की तरह देखी जा रही है। वजह है भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के बीच लगभग दो दशक से अटका फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA), जिसका 27 जनवरी को नई दिल्ली में होने वाले समिट में ऐलान किया जा सकता है। यह वही डील है जिसे वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल “मदर ऑफ ऑल डील्स” कह चुके हैं।

भारत में होंगे EU के टॉप लीडर्स

रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपीय काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनिया कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी के बीच भारत दौरे पर रहेंगे। रिपब्लिक डे समारोह में EU नेतृत्व चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल होगा।

पहली बार परेड में EU का सैन्य दल

खास बात यह भी है कि 26 जनवरी की परेड में EU का एक छोटा सैन्य दल भी हिस्सा ले सकता है। यह पहली बार होगा जब EU फोर्स रिपब्लिक डे परेड में दिखेगी।

19 साल चली बातचीत

भारत-EU की ट्रेड बातचीत 2007 में ब्रॉड बेस्ड ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट (BTIA) के नाम से शुरू हुई थी। लेकिन, ऑटोमोबाइल, वाइन-स्पिरिट्स, डेटा नियम, पब्लिक प्रोक्योरमेंट, IPR, लेबर स्टैंडर्ड जैसे मुद्दों पर यह 2013 के बाद ठप हो गई। 2022 में बदले हुए ग्लोबल ट्रेड माहौल के बीच बातचीत फिर शुरू हुई। इस बार रणनीति बदली गई और कंप्लीट “मेगा पैक्ट” की जगह एक “एक्जीक्यूटेबल” FTA पर फोकस किया गया। यानी अब डील को India–EU FTA कहा जा रहा है।

डील का स्केल कितना बड़ा है?

यह डील सिर्फ भारत या EU की नहीं, बल्कि ग्लोबल ट्रेड सिस्टम के लिए भी बड़ा सिग्नल है। क्योंकि EU के पास 45 करोड़ से ज्यादा कंज्यूमर की ताकत है और करीब 20 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी है। वहीं, भारत के पास 1.4 अरब से ज्यादा कंज्यूमर और दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।

क्यों अचानक तेजी आई?

इस FTA को तेजी से आगे बढ़ाने की वजह सिर्फ ट्रेड नहीं, जियोपॉलिटिक्स भी है। ग्लोबल स्तर पर प्रोटेक्शनिज्म बढ़ा है। सप्लाई चेन में झटके लगे हैं। यूरोप चीन पर निर्भरता घटाने की कोशिश में है। इसी बीच अमेरिका की तरफ से हाई टैरिफ का माहौल ट्रेड फ्लो को डिस्टर्ब कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ देशों पर US ने नए टैरिफ की घोषणा की है और 1 फरवरी से लागू होने की बात कही गई है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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