Indian Economy : केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने कहा है कि अगर भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है, तो उसे आयात कम करने और निर्यात बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि देश को ऊर्जा और संसाधनों के मामले में आत्मनिर्भर बनना बेहद जरूरी है। गडकरी यह बात बुधवार को वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समारोह को संबोधित करते हुए कही।
कृषि अपशिष्ट से बन सकता है अवसर
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक गडकरी ने कहा कि कृषि अपशिष्ट यानी एग्रो-वेस्ट को बेकार समझने की बजाय उसे एक उपयोगी संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए। पराली और अन्य कृषि अवशेषों से ईंधन और निर्माण सामग्री बनाई जा सकती है। इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी मिलेगी और देश का कच्चे तेल पर निर्भर रहना भी कम होगा। उन्होंने कहा कि इससे पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण भी काफी हद तक घटेगा।
बायो-बिटुमेन: सड़क निर्माण में नई पहल
मंत्री ने सड़क निर्माण में पेट्रोलियम आधारित बिटुमेन की जगह बायो-बिटुमेन के इस्तेमाल को एक बड़ा और बदलाव लाने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगी। बायो-बिटुमेन कृषि अपशिष्ट से तैयार किया जाता है, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान होता है और प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है।
भारत बना दुनिया का पहला देश
गडकरी ने कहा कि भारत दुनिया का पहला देश है, जिसने व्यावसायिक स्तर पर बायो-बिटुमेन का उत्पादन शुरू किया है। इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों को अपनी फसल के अवशेष बेचकर अतिरिक्त आय मिलेगी। उन्होंने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया।
ईंधन में मिलावट से बड़ी बचत
मंत्री ने बताया कि अगर वाहन ईंधन में 15 प्रतिशत तक वैकल्पिक ईंधन की मिलावट की जाए, तो भारत करीब 4,500 करोड़ डॉलर की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता में बड़ी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी जरूरी है।
तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य
गडकरी ने कहा कि इस समय भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। तीसरे स्थान पर पहुंचने के लिए देश को अपने आयात में कटौती करनी होगी और निर्यात को बढ़ाना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि घरेलू संसाधनों और तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल ही इस लक्ष्य को हासिल करने का रास्ता है।
वैकल्पिक ईंधन और फ्लेक्स-इंजन पर जोर
मंत्री ने कृषि और निर्माण उपकरण बनाने वाली कंपनियों से अपील की कि वे वैकल्पिक ईंधन और फ्लेक्स-इंजन आधारित वाहनों को बढ़ावा दें। इससे ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण भी कम होगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है।
हरित हाइड्रोजन की पहल
गडकरी ने बताया कि सरकार ने हरित हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रकों के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में 10 राजमार्ग खंड चिन्हित किए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि हाइड्रोजन ईंधन का परिवहन एक बड़ी चुनौती है, जिस पर काम करने की जरूरत है।
ऊर्जा आयातक से निर्यातक बनने की जरूरत
अंत में गडकरी ने कहा कि भारत को ऊर्जा का आयातक नहीं, बल्कि निर्यातक देश बनना चाहिए। उन्होंने बताया कि देश हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये जीवाश्म ईंधन के आयात पर खर्च करता है। इससे न सिर्फ विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ता है, बल्कि प्रदूषण की समस्या भी बढ़ती है। वैकल्पिक और स्वदेशी ऊर्जा स्रोतों को अपनाकर ही भारत टिकाऊ और आत्मनिर्भर विकास की ओर बढ़ सकता है।
