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1.5 लाख का Emergency Fund ऐसे होगा तैयार, हर महीने की बचत का समझें पूरा हिसाब

पैसों की अचानक जरूरत आ पड़ने पर पर्सनल लोन/ क्रेडिट कार्ड पर निर्भर न रहना पड़े इसके लिए जरूरी है कि आपके पास एक इमरजेंसी फंड हो। इमरजेंसी फंड के लिए हर महीने छोटी बचत से शुरुआत कर सकते हैं।

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1.5 लाख का Emergency Fund कितने समय में होगा तैयार (Photo: iStock)

अचानक नौकरी छूट जाए, मेडिकल इमरजेंसी आ जाए या गाड़ी की मरम्मत पर बड़ा खर्च करना पड़ जाए, तो ऐसी स्थिति में इमरजेंसी फंड (Emergency Fund) ही काम आता है। इससे आपको खर्चों के लिए पर्सनल लोन (Personal Loan) लेने या क्रेडिट कार्ड (Credit Card) पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन सवाल यह है कि 1.5 लाख रुपये का इमरजेंसी फंड तैयार करने के लिए हर महीने कितने रुपये बचाने होंगे? आइए समझते हैं पूरा हिसाब-

कितने महीने के खर्च की रकम करें तैयार

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि इमरजेंसी फंड में कम से कम 3 से 6 महीने के जरूरी खर्चों के बराबर रकम होनी चाहिए। अगर आपकी नौकरी या आमदनी स्थिर नहीं है, तो 9 से 12 महीने के खर्च के बराबर फंड बनाना बेहतर हो सकता है।

हर महीने कितने रुपये होंगे खर्च

अब उदाहरण के लिए मान लीजिए आपके घर का जरूरी मंथली खर्च 25,000 रुपये है और आप परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां संभालते हैं तो 6 महीने के खर्च के हिसाब से 1.5 लाख रुपये का इमरजेंसी फंड तैयार करना होगा। इसमें राशन, बिजली-पानी के बिल, ईएमआई, बीमा प्रीमियम, स्कूल फीस और परिवहन जैसे जरूरी खर्च शामिल होने चाहिए।

हर महीने कितने रुपये बचाने होंगे?

अगर आप बिना किसी ब्याज या निवेश रिटर्न की गणना किए 1.5 लाख रुपये जमा करना चाहते हैं तो बचत की रकम आपके लक्ष्य की समयसीमा पर निर्भर करेगी-

समयावधि (लक्ष्य)आवश्यक मासिक बचत
1 साल में12,500 रुपये
2 साल में6,250 रुपये
2.5 साल में5,000 रुपये
3 साल में4,167 रुपये

अगर आप हर महीने 5,000 रुपये अपने बचत खाते में जमा करते हैं, तो करीब ढाई साल में 1.5 लाख रुपये का फंड तैयार कर सकते हैं। ब्याज मिलने पर यह लक्ष्य थोड़ा पहले भी पूरा हो सकता है।

इमरजेंसी फंड कहां रखें?

इमरजेंसी फंड का उद्देश्य केवल रिटर्न कमाना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर पैसा आसानी से निकाल पाना भी है। इसलिए पूरी रकम शेयर बाजार या जोखिम वाले निवेश विकल्पों में लगाने से बचें।

आप कुछ रकम बचत खाते में रख सकते हैं, ताकि तत्काल जरूरत पूरी हो सके। बाकी रकम अपनी जरूरत और जोखिम क्षमता के अनुसार स्वीप-इन एफडी, बैंक एफडी या लिक्विड और ओवरनाइट म्यूचुअल फंड में रखने पर विचार कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड में रिटर्न की गारंटी नहीं होती और पैसा निकालने में भी कुछ समय लग सकता है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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