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7 साल में कितनी बढ़ी भारतीयों की सैलरी, सरकार ने जारी किया शॉकिंग डाटा

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सात सालों में सैलरी बढ़ने के साथ ही नौकरी के अवसर और रोजगार की क्वालिटी में भी सुधार दर्ज किया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या आसमान छूती महंगाई के सामने ये सैलरी बढ़ोतरी पर्याप्त है? आइए जानते हैं आखिर कितनी सैलरी 7 साल में बढ़ी है?

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Salary job Data

देश में आम आदमी की जेब पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन क्या सैलरी भी उसी रफ्तार से बढ़ी है? सरकार ने हाल ही में नए आंकड़े जारी किए हैं और जो तस्वीर उभरी है, वो हैरान करने वाली है। सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 7 सालों में भारतीयों की सैलरी में जो बढ़ोतरी हुई है, वो उम्मीद से काफी कम है। आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर सेक्टर्स में इनकम में मामूली बढ़त हुई है, जबकि खर्च दोगुनी रफ्तार से बढ़ा है यानी कमाई से तेज महंगाई बढ़ी है। आइए आपको भी बताते हैं कि बीते 7 सालों में भारतीयों की सैलरी में कितना इजाफा हुआ है?

7 साल में कितनी बढ़ी सैलरी?

भारत सरकार की नई रोजगार रिपोर्ट ने देश के आम कर्मचारी और मजदूरों की कमाई पर जो खुलासा किया है वो काफी चौकाने वाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सात सालों में सैलरी बढ़ने के साथ ही नौकरी के अवसर और रोजगार की क्वालिटी में भी सुधार दर्ज किया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या आसमान छूती महंगाई के सामने ये सैलरी बढ़ोतरी पर्याप्त है? श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, रेगुलर सैलरी पाने वाले कर्मचारियों की एवरेज मंथली सैलरी जुलाई-सितंबर 2017 में 16,538 रुपये थी, जो अप्रैल-जून 2024 तक बढ़कर 21,103 रुपये हो गई। यानी 7 साल में सिर्फ 4,565 रुपये ही सलारी बढ़ी है। वहीं, कैजुअल लेबर यानी दिहाड़ी मजदूरों की औसत रोजाना कमाई 294 रुपये से बढ़कर 433 रुपये हो गई।

रोजगार के मोर्चे पर राहत की खबर

सरकार की नई रिपोर्ट के मुताबिक देश में बेरोजगारी दर में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है। 2017-18 में जहां बेरोजगारी दर 6% थी, वहीं 2023-24 में यह घटकर सिर्फ 3.2% रह गई है यानी लगभग 50% की कमी। युवाओं में भी सुधार दिखा है, जहां बेरोजगारी दर 17.8% से घटकर 10.2% पर आ गई है। यह ग्लोबल एवरेज 13.3% से काफी कम है। अगस्त 2025 में पुरुषों की बेरोजगारी दर घटकर 5% तक पहुंच गई, जो पिछले चार महीनों में सबसे निचला स्तर है।

औपचारिक नौकरियों में तेजी

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024–25 में अब तक 1.29 करोड़ नए सदस्य जुड़े हैं। सितंबर 2017 से अब तक कुल 7.73 करोड़ से ज्यादा नेट सब्सक्राइबर जोड़े जा चुके हैं। सिर्फ जुलाई 2025 में ही 21.04 लाख नए लोग EPFO से जुड़े, जिनमें से करीब 60% युवा (18–25 वर्ष आयु वर्ग) थे। यह दर्शाता है कि नौकरी के अवसर बढ़ रहे हैं और कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं।

रोजगार का पैटर्न भी बदल रहा है

रिपोर्ट बताती है कि लोग अब नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय स्वरोजगार और उद्यमिता की ओर बढ़ रहे हैं। देश में स्वरोजगार का अनुपात 2017-18 के 52.2% से बढ़कर 58.4% तक पहुंच गया है। वहीं, कैजुअल लेबर का अनुपात घटकर 19.8% रह गया है। यानी अब ज्यादा लोग खुद का काम शुरू कर रहे हैं या छोटे बिजनेस चला रहे हैं।

क्या बढ़ी हुई सैलरी महंगाई को मात दे पाएगी?

भले ही आंकड़े रोजगार में सुधार दिखा रहे हों, मगर महंगाई की मार ने आम आदमी की जेब पर भारी दबाव डाला है। पेट्रोल-डीजल, खाने-पीने का सामान और घर किराए में बढ़ोतरी के कारण खर्च तेजी से बढ़ा है। अब देखना यह होगा कि बढ़ती सैलरी और स्वरोजगार की यह लहर महंगाई के तूफान के सामने कितनी टिकाऊ साबित होती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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