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अटल पेंशन योजना में 210 रुपए जमा कर कितनी पेंशन मिलेगी?

आइए जानते हैं कि अटल पेंशन योजना के तहत अगर आप हर महीने 210 रुपये जमा करते हैं, तो आपको 60 साल के बाद कितनी पेंशन मिलेगी और इस स्कीम के क्या-क्या नियम हैं।

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Atal Pension Yojana

बुढ़ापे में लाठी का सहारा भले ही कोई बने या न बने, लेकिन जेब में आने वाली पेंशन इंसान का सबसे बड़ा सहारा होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए 'अटल पेंशन योजना' (Atal Pension Yojana) की शुरुआत की थी। इस सरकारी योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि कम उम्र से ही छोटी-छोटी बचत करके लोग अपने बुढ़ापे यानी 60 साल की उम्र के बाद की जिंदगी को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बना सकें। इस योजना को लेकर लोगों के मन में अक्सर एक सवाल रहता है कि आखिर कितना पैसा जमा करने पर कितनी पेंशन मिलेगी? '210 रुपये प्रति माह' वाले प्रीमियम प्लान को लेकर लोग काफी उत्सुक रहते हैं। आइए जानते हैं कि अटल पेंशन योजना के तहत अगर आप हर महीने 210 रुपये जमा करते हैं, तो आपको 60 साल के बाद कितनी पेंशन मिलेगी और इस स्कीम के क्या-क्या नियम हैं।

210 रुपये जमा करने पर कितनी मिलेगी पेंशन?

अटल पेंशन योजना में आपको हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किस उम्र में इस योजना में निवेश करना शुरू किया है। अगर हम 210 रुपये महीने वाले प्रीमियम की बात करें, तो इसके तहत आपको 60 साल की उम्र के बाद हर महीने 5,000 रुपये की गारंटीड पेंशन मिलती है।

हर महीने 210 रुपये जमा करके 5,000 रुपये की मासिक पेंशन पाने का लाभ केवल उन लोगों को मिलता है जो ठीक 18 वर्ष की उम्र में इस योजना से जुड़ते हैं। चूंकि इस योजना में 60 साल की उम्र तक पैसा जमा करना होता है, इसलिए 18 साल के युवा को कुल 42 सालों तक हर महीने 210 रुपये का योगदान देना होगा। जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती जाएगी, वैसे-वैसे 5,000 रुपये की पेंशन पाने के लिए आपके महीने के प्रीमियम की रकम भी बढ़ती जाएगी। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति 25 साल की उम्र में इस स्कीम को चुनता है, तो उसे ₹5,000 की पेंशन के लिए हर महीने लगभग 376 रुपये जमा करने होंगे। वहीं, 30 साल की उम्र में जुड़ने पर यह प्रीमियम बढ़कर करीब 577 रुपये महीना हो जाता है।

अटल पेंशन योजना से कौन-कौन जुड़ सकता है?

  • योजना में शामिल होने के लिए आपकी उम्र कम से कम 18 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष होनी चाहिए। 40 साल से ज्यादा उम्र के लोग इस स्कीम का हिस्सा नहीं बन सकते।
  • आवेदक के पास एक एक्टिव सेविंग्स बैंक अकाउंट या पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट होना चाहिए, क्योंकि पेंशन की किस्तें सीधे इसी खाते से ऑटो-डेबिट (अपने आप कट जाना) होती हैं।
  • सरकार के नए नियमों के मुताबिक, जो लोग इनकम टैक्स (आयकर) के दायरे में आते हैं या टैक्स भरते हैं, वे अब अटल पेंशन योजना का लाभ नहीं उठा सकते। यह योजना विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों व कामगारों के लिए है।

इस योजना के अन्य शानदार फायदे

अटल पेंशन योजना सिर्फ पेंशन ही नहीं देती, बल्कि यह आपके परिवार को एक सुरक्षा कवच भी प्रदान करती है। 60 साल के बाद जब तक खाताधारक जीवित रहता है, उसे हर महीने 5,000 रुपये की पेंशन मिलती है। यदि किसी कारणवश खाताधारक की मृत्यु हो जाती है, तो उसकी पत्नी या पति (Spouse) को उतनी ही रकम यानी 5,000 रुपये हर महीने पेंशन के रूप में मिलने जारी रहते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि अगर दोनों (पति-पत्नी) की मृत्यु हो जाती है, तो आपके द्वारा जमा की गई पूरी आपके बच्चों या नॉमिनी को एकमुश्त वापस सौंप दी जाती है।

अटल पेंशन योजना में निवेश करने के लिए आपको किसी दफ्तर के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। आप अपने नजदीकी बैंक शाखा में जाकर या अपने नेट बैंकिंग अकाउंट के जरिए घर बैठे ऑनलाइन ही इस स्कीम को शुरू कर सकते हैं। अपनी सहूलियत के हिसाब से आप पैसे कटने का विकल्प मासिक, त्रैमासिक (3 महीने) या छमाही (6 महीने) चुन सकते हैं। अगर आप भी बेहद कम निवेश में अपने बुढ़ापे के लिए एक बंधी-बंधाई फिक्स्ड इनकम चाहते हैं, तो अटल पेंशन योजना का यह 210 रुपये वाला फॉर्मूला आपके लिए सबसे बेस्ट साबित हो सकता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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