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Home-Car Loan महंगे होंगे! जानें ₹10 लाख के कार लोन और ₹50 लाख के होम लोन पर कितनी बढ़ेगी EMI?

आरबीआई ने आखिरी बार फरवरी, 2023 में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 6.50 प्रतिशत किया था।

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लोन ईएमआई

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन-दिवसीय बैठक सोमवार को शुरू हो गई। मंहगाई को काबू कने के लिए इस बार आरबीआई रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फैसला कर सकता है। अगर ऐसा होगा तो आपकी होम लोन, कार लोन समेत दूसरे लोन की EMI बढ़ सकती है।

एमपीसी बैठक में संभावित फैसलों को लेकर 16 अर्थशास्त्रियों और बैंकर के बीच कराए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक, मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान नीतिगत ब्याज दर में बढ़ोतरी का फैसला नीतिगत रुख में बदलाव को भी दर्शाएगा। आरबीआई ने 2025 में दरों में कटौती शुरू करने के बाद लंबे समय तक अपने मौद्रिक रुख को अपरिवर्तित रखा है।

कितनी बढ़ सकती है आपकी ईएमआई?

₹50 लाख Home Loan - 20 साल

ब्याज दरEMIEMI में बढ़ोतरी
7.50%₹40,280-
7.75%₹41,047₹768/माह
यानी 0.25% की बढ़ोतरी से EMI करीब ₹768 प्रति माह बढ़ेगी। 20 साल में अगर पूरी अवधि तक नई दर लागू रहती है, तो कुल अतिरिक्त भुगतान करीब ₹1.84 लाख होगा।

₹10 लाख Car Loan - 5 साल

ब्याज दरEMIEMI में बढ़ोतरी
8.50%₹20,517-
8.75%₹20,637₹121/माह
यानी 0.25% की बढ़ोतरी से कार लोन की EMI करीब ₹121 प्रति माह बढ़ेगी। पूरे 5 साल में अतिरिक्त भुगतान करीब ₹7,242 होगा।

2025 में आखिरी बार रेपो रेट बढ़ाया था

आरबीआई ने आखिरी बार फरवरी, 2023 में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 6.50 प्रतिशत किया था। इसके बाद उसने 2023-24 के दौरान दर को अपरिवर्तित रखा था। फिर 2025 में दरों में कटौती का सिलसिला शुरू हुआ था और रेपो दर फिलहाल 5.25 प्रतिशत पर है।

सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश प्रतिभागियों को बुधवार को होने वाली मौद्रिक नीति घोषणा में दर बढ़ोतरी और सख्त मौद्रिक रुख की उम्मीद है।

हालांकि, नीतिगत रुख में बदलाव होने के मुद्दे पर जानकारों की राय बंटी हुई है। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि रिजर्व बैंक अल्पकालिक ऋण दर (रेपो) को मौजूदा स्तर पर बनाए रख सकता है। उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि अगला ब्याज दर चक्र 0.50-0.75 प्रतिशत की वृद्धि वाला होगा, लेकिन हमारा मानना है कि अक्टूबर की समीक्षा में दरों पर विराम ही रहेगा।

निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक का ब्योरा नीतिगत बयान की तुलना में काफी अधिक सख्त रुख वाला था। सदस्यों ने माना कि खाद्य और ईंधन से उपजी महंगाई के कारण इसके दूसरे दौर के प्रभाव सामने आ सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि कीमतों का दबाव व्यापक और अधिक टिकाऊ होने पर नीतिगत कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसलिए अब हम अक्टूबर और दिसंबर 2026 में आरबीआई द्वारा 0.25-0.25 प्रतिशत अंक की रेपो दर बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं। इसके साथ एमपीसी अपने रुख को 'तटस्थ’ से बदलकर 'संतुलित सख्ती’ या ’समायोजन वापस लेने’ वाला कर सकती है।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि पिछली मौद्रिक समीक्षा के बाद से मुद्रास्फीति का दबाव और बढ़ा है, जिसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में संघर्ष का फिर बढ़ना तथा ऊर्जा और जिंस कीमतों पर दबाव है। उन्होंने कहा कि अगर ये दबाव बने रहते हैं तो ब्याज दरों में और वृद्धि की उम्मीद है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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