अगर आपका होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन या बिजनेस लोन HDFC Bank के MCLR (Marginal Cost of Funds Based Lending Rate) से जुड़ा है तो ये खबर आपके लिए और भी जरूरी हो जाती है। HDFC Bank ने एमसीएलआर में बदलाव कर दिया है, जो 7 जुलाई 2026 से लागू हो गया है। इस बदलाव का असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा, जिनके लोन MCLR आधारित हैं।
क्या है MCLR?
MCLR यानी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट वह न्यूनतम ब्याज दर होती है, जिसके नीचे बैंक सामान्य परिस्थितियों में लोन नहीं दे सकते। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2016 में इस व्यवस्था को लागू किया था, ताकि रेपो रेट में बदलाव का असर ग्राहकों तक जल्दी पहुंच सके। MCLR में बदलाव होने पर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन और कुछ बिजनेस लोन की EMI प्रभावित हो सकती है।
किन अवधियों की ब्याज दरों में हुआ बदलाव?
HDFC Bank ने इस बार अलग-अलग अवधि की MCLR दरों में अलग-अलग बदलाव किए हैं। बैंक ने ओवरनाइट MCLR को 5 बेसिस प्वाइंट (0.05%) घटा दिया है, जबकि 1 वर्ष और 3 वर्ष की MCLR में 5 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है। कुछ अवधियों की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
| Tenure | MCLR |
|---|---|
| Overnight | 8.05% |
| 1 Month | 8.05% |
| 3 Month | 8.20% |
| 6 Month | 8.35% |
| 1 Year | 8.45% |
| 2 Year | 8.55% |
| 3 Year | 8.70% |
आपकी EMI पर क्या होगा असर?
लोन लेने वालों को क्या करना चाहिए?
अगर आपका लोन MCLR से जुड़ा है तो सबसे पहले यह जांचें कि आपका लोन किस अवधि की MCLR से लिंक है। इसके बाद अपने लोन की रीसेट डेट देखें। अगर आपकी EMI बढ़ने की संभावना है तो अतिरिक्त प्रीपेमेंट या बैलेंस ट्रांसफर जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। साथ ही, बैंक की ओर से जारी नई ब्याज दरों की जानकारी समय-समय पर जांचते रहें।
