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प्रवासी मजदूरों के लिए सरकार ने लिया बड़ा फैसला, ऐसे हाथों-हाथ मिलेगा LPG सिलेंडर

गैस किल्लत के बीच सरकार ने प्रवासी मजदूरों और छात्रों को बड़ी राहत दी है। 5 किलो वाले 'छोटू' सिलेंडर की सप्लाई दोगुनी कर दी है, जिसे बिना एड्रेस प्रूफ के सिर्फ एक आईडी दिखाकर तुरंत लिया जा सकता है।

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LPG gas Cylinder

अगर आप अपने घर से दूर किसी दूसरे शहर में पढ़ाई कर रहे हैं या काम के सिलसिले में आए एक प्रवासी मजदूर हैं, तो केंद्र सरकार ने आपके लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर दी है। मिडिल-ईस्ट (ईरान-अमेरिका) में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर गैस सप्लाई पर संकट मंडरा रहा है, जिससे भारत में भी एलपीजी की किल्लत की खबरें आ रही थीं। इस स्थिति को देखते हुए मोदी सरकार ने एक 'मास्टरस्ट्रोक' चलते हुए राज्यों के लिए 5 किलो वाले 'छोटू' (FTL) गैस सिलेंडर का कोटा दोगुना करने का आदेश दिया है। सरकार के इस फैसले का सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के सबसे कमजोर वर्ग, विशेषकर प्रवासी कामगारों और छात्रों को खाना पकाने के लिए गैस के लिए भटकना न पड़े और न ही उन्हें ब्लैक मार्केट में ऊंचे दाम चुकाने पड़ें। यह अतिरिक्त सप्लाई राज्यों को मिलने वाले नियमित कोटे के अलावा होगी, जिससे बाजार में गैस की उपलब्धता बनी रहेगी।

हाथों-हाथ मिलेगा सिलेंडर

प्रवासी मजदूरों और छात्रों के लिए सबसे बड़ी समस्या अक्सर 'पक्का एड्रेस प्रूफ' न होना होती है, जिसकी वजह से उन्हें सामान्य 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर लेने में काफी परेशानी आती थी। इसी दिक्कत को दूर करने के लिए सरकार ने 5 किलो वाला 'छोटू' सिलेंडर पेश किया था, जिसे खरीदने के लिए किसी भारी-भरकम कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ती। अब सरकार ने पेट्रोलियम मंत्रालय के माध्यम से राज्यों को चिट्ठी लिखकर इसके डेली एलोकेशन (दैनिक आवंटन) को डबल करने का निर्देश दिया है। नए नियमों के अनुसार, मार्च 2026 के शुरुआती दिनों की औसत सप्लाई को आधार मानकर राज्यों को अतिरिक्त कोटा दिया जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जो किराए के छोटे कमरों में रहते हैं या काम के सिलसिले में बार-बार अपनी जगह बदलते हैं। अब वे सिर्फ एक आईडी प्रूफ (पहचान पत्र) दिखाकर हाथों-हाथ गैस सिलेंडर ले सकेंगे।

कम खर्च का फायदा

सरकार का यह कदम न केवल महंगाई पर लगाम लगाएगा, बल्कि गैस की ब्लैक मार्केटिंग को भी खत्म करेगा। तेल कंपनियां (OMCs) अब राज्य सरकारों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेंगी कि ये छोटे सिलेंडर सीधे जरूरतमंदों तक पहुँचें। इन सिलेंडरों की खासियत यह है कि इन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाना बेहद आसान है और इनका रिफिल खर्च भी कम होता है, जो दिहाड़ी मजदूरों और सीमित पॉकेट मनी वाले छात्रों के बजट में बिल्कुल फिट बैठता है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस विशेष कोटे का इस्तेमाल केवल कमजोर वर्गों के लिए ही किया जाएगा। कुल मिलाकर, युद्ध की अनिश्चितता और सप्लाई चेन में रुकावट के बावजूद, सरकार का यह फैसला यह सुनिश्चित करता है कि देश के हर गरीब और प्रवासी का चूल्हा बिना किसी रुकावट के जलता रहे।

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Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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