Gold Silver Returne : भारत में सोना और चांदी सिर्फ गहनों या परंपरा तक सीमित नहीं हैं। धनतेरस और दिवाली जैसे मौकों पर इनकी खरीदारी को शुभ माना जाता है, वहीं बड़ी संख्या में लोग इन्हें निवेश का विकल्प भी समझते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों के रिटर्न पर नजर डालें तो एक दिलचस्प तस्वीर सामने आती है। पिछले 1 और 3 साल में चांदी ने सोने को पीछे छोड़ा है, जबकि 5 साल की अवधि में सोने ने बाजी मार ली है।
यानी किस धातु में निवेश करना बेहतर रहा, इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कितने समय के लिए पैसा लगाया। MCX के ऐतिहासिक रेट के आधार पर 3 नवंबर, 2026 तक के प्रदर्शन को देखें, तो सोने ने 5 साल में करीब 190% रिटर्न दिया है, जबकि चांदी का रिटर्न करीब 178% रहा। दूसरी तरफ, 3 साल में चांदी ने करीब 148% की बढ़त के साथ सोने को पीछे छोड़ दिया।
1 साल में चांदी ने सोने को पछाड़ा
पिछले एक साल में चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी आई। 3 नवंबर 2025 को चांदी का भाव 1,48,717 रुपये प्रति किलो था, जो 3 नवंबर 2026 को बढ़कर 1,75,117 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। इस दौरान चांदी ने करीब 17.75% रिटर्न दिया। वहीं, सोने का भाव इसी अवधि में 1,20,156 रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,37,034 रुपये हो गया। इससे निवेशकों को करीब 14.05% रिटर्न मिला।
इस हिसाब से अगर किसी ने एक साल पहले सोने में 1 लाख रुपये लगाए होते तो उसकी वैल्यू करीब 1.14 लाख रुपये होती। वहीं, चांदी में लगाए गए 1 लाख रुपये बढ़कर करीब 1.18 लाख रुपये हो जाते।
3 साल में चांदी ने दिया करीब 148% रिटर्न
तीन साल की अवधि में भी चांदी का प्रदर्शन सोने से बेहतर रहा। 3 नवंबर 2023 को चांदी की कीमत 70,556 रुपये प्रति किलो थी, जो 3 नवंबर 2026 को बढ़कर 1,75,117 रुपये हो गई। इस तरह चांदी ने करीब 148.20% की बढ़त दर्ज की। इसी अवधि में सोने का भाव 60,843 रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,37,034 रुपये पहुंच गया। सोने ने इस दौरान करीब 125.23% रिटर्न दिया।
अगर किसी निवेशक ने तीन साल पहले दोनों में से किसी एक धातु में 1 लाख रुपये लगाए होते तो चांदी में निवेश की वैल्यू करीब 2.48 लाख रुपये हो जाती। वहीं, सोने में निवेश बढ़कर करीब 2.25 लाख रुपये होता।
5 साल में सोना निकला आगे
पिछले 5 साल का प्रदर्शन देखें तो तस्वीर बदल जाती है। इस अवधि में सोने ने चांदी से ज्यादा रिटर्न दिया। 3 नवंबर 2021 को सोने की कीमत 47,257 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो 3 नवंबर 2026 को बढ़कर 1,37,034 रुपये हो गई। इस तरह सोने ने करीब 189.98% का रिटर्न दिया।
दूसरी तरफ, चांदी का भाव 3 नवंबर 2021 को 62,908 रुपये प्रति किलो था। 3 नवंबर 2026 तक यह बढ़कर 1,75,117 रुपये हो गया। इस दौरान चांदी ने करीब 178.28% रिटर्न दिया।
| निवेश की अवधि | सोने का रिटर्न | सोने में ₹1 लाख की वैल्यू | चांदी का रिटर्न | चांदी में ₹1 लाख की वैल्यू |
| 1 साल | 14.05% | ₹1.14 लाख | 17.75% | ₹1.18 लाख |
| 3 साल | 125.23% | ₹2.25 लाख | 148.20% | ₹2.48 लाख |
| 5 साल | 189.98% | ₹2.90 लाख | 178.28% | ₹2.78 लाख |
यानी 5 साल की अवधि में सोने ने चांदी को पीछे छोड़ दिया। अगर किसी ने 5 साल पहले सोने में 5 लाख रुपये लगाए होते तो 3 नवंबर 2026 तक उसकी वैल्यू करीब 14.50 लाख रुपये हो गई होती। वहीं, चांदी में लगाए गए 5 लाख रुपये की कीमत करीब 13.92 लाख रुपये होती। MCX के ऐतिहासिक रेट के आधार पर 3 नवंबर 2026 तक एक निवेश की वैल्यू इस तरह होती।
कीमतों में इमना अंतर क्यों?
सोने और चांदी की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों, वैश्विक आर्थिक हालात और भू-राजनीतिक तनाव का असर पड़ता है। हालांकि, दोनों की मांग के स्रोत अलग-अलग हैं। सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश यानी Safe Haven Asset माना जाता है। आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और बाजार में गिरावट के दौर में निवेशक सोने की तरफ रुख करते हैं। इसके अलावा केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी सोने की कीमतों को प्रभावित करती है।
चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा क्यों?
चांदी की खास बात यह है कि इसका इस्तेमाल निवेश के साथ-साथ औद्योगिक उत्पादन में भी होता है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे उद्योगों में चांदी की मांग रहती है। इसलिए औद्योगिक मांग में तेजी आने पर चांदी की कीमतों को भी सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि, यही वजह चांदी को ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला निवेश भी बनाती है। औद्योगिक मांग कमजोर होने या निवेशकों की दिलचस्पी घटने पर इसकी कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है।
