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दादा-दादी से मिला सोना टैक्स फ्री है या नहीं? विरासत में मिले शेयरों पर टैक्स का क्या है गणित?

क्या दादा-दादी या माता-पिता से वसीयत में मिले सोने के गहनों पर सरकार टैक्स वसूलती है? विरासत में संपत्ति मिलने के समय और उसे भविष्य में बेचने के समय इनकम टैक्स के नियम बिल्कुल अलग हैं। अगर आप भी इनहेरिटेंस टैक्स (Inheritance Tax) के गणित को लेकर कन्फ्यूज्ड हैं, तो यह खबर आपके लिए है।

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Gifted Gold tax

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल होता है कि अगर उन्हें अपने परिवार, जैसे दादा-दादी या माता-पिता से गहने, जमीन, शेयर या कोई अन्य संपत्ति विरासत में मिलती है, तो क्या उस पर तुरंत टैक्स देना पड़ता है? भारत में टैक्स के नियम काफी स्पष्ट हैं, लेकिन कई बार जानकारी के अभाव में लोग बड़ी गलती कर बैठते हैं। यह समझना बहुत जरूरी है कि विरासत में संपत्ति मिलने के समय और उसे भविष्य में बेचने के समय टैक्स के नियम कैसे काम करते हैं। आइए जानते हैं, इनहेरिटेंस टैक्स (Inheritance Tax) के गणित का पूरा सच।

विरासत में मिली संपत्ति पर टैक्स का नियम

सबसे अच्छी खबर यह है कि भारत में विरासत में संपत्ति मिलने पर कोई टैक्स नहीं लगता। अगर आपको वसीयत के जरिए सोना, शेयर, जमीन या कोई भी संपत्ति मिली है, तो उसके मालिक बनते ही आपको सरकार को कोई टैक्स नहीं देना होगा। भारत में इनहेरिटेंस टैक्स (Inheritance Tax) या एस्टेट ड्यूटी (Estate Duty) जैसा कोई कानून वर्तमान में नहीं है। इसलिए, दादा-दादी या पूर्वजों से मिले सोने के गहनों पर आपको तुरंत कोई टैक्स नहीं देना है।

शेयरों पर टैक्स का गणित

टैक्स तब लगता है जब आप उस विरासत में मिली संपत्ति को बेचते हैं। जब आप विरासत में मिले शेयर बेचते हैं, तो उसे 'कैपिटल गेन' (पूंजीगत लाभ) के दायरे में लाया जाता है। यहाँ गणित यह है कि टैक्स की गणना पुराने मालिक (जिन्होंने शेयर खरीदे थे) के आधार पर की जाती है। यदि आपने शेयर मिलने के बाद उसे लंबे समय तक अपने पास रखा है, तो उसे 'लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन' (LTCG) माना जाएगा।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG): अगर आपने शेयर को लंबे समय तक रखा है, तो लाभ पर टैक्स की दर 12.5% होती है (एक निश्चित छूट सीमा के बाद)। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG): अगर आपने शेयर मिलने के तुरंत बाद या कम समय में बेच दिया, तो लाभ पर टैक्स आपकी आयकर स्लैब (Income Tax Slab) के अनुसार लगता है।

आयकर रिटर्न (ITR) में खुलासा जरूरी

टैक्स न लगने का मतलब यह नहीं है कि आप उसकी जानकारी छिपा सकते हैं। यदि आपकी कुल संपत्ति की वैल्यू एक निश्चित सीमा (जैसे 50 लाख रुपये) से ज्यादा है, तो आपको अपने आयकर रिटर्न (ITR) में विरासत में मिली संपत्ति का खुलासा करना अनिवार्य है। विशेष रूप से यदि संपत्ति विदेश में है, तो उसका अलग से खुलासा करना बहुत जरूरी है, वरना जुर्माना लग सकता है।

ध्यान रखें ये बात

विरासत में मिले सोने के लिए उसका सही वैल्यूएशन (Valuation) कराना जरूरी है, ताकि जब आप उसे बेचें तो टैक्स की गणना सही हो सके। शेयर और म्यूचुअल फंड के मामले में यदि नॉमिनी (Nominee) दर्ज है, तो ट्रांसफर आसान होता है। नॉमिनी न होने पर कानूनी प्रक्रिया लंबी हो सकती है। इसके अलावा, विरासत में मिली क्रिप्टोकरेंसी पर सीधा 30% टैक्स लगता है, और इसमें किसी तरह की छूट नहीं मिलती।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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