मई 2025 की शुरुआत में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त निवेश किया है। 9 मई तक एफपीआई ने कुल ₹14,167 करोड़ के शेयर खरीदे हैं, जो घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और वैश्विक समर्थन के संकेत देता है। भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बावजूद एफपीआई का भरोसा डिगा नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, एफपीआई ने अप्रैल से ही निवेश की शुरुआत की थी जब उन्होंने ₹4,223 करोड़ शेयरों में लगाए थे। इससे पहले जनवरी से मार्च तक लगातार निकासी हुई थी।
जनवरी से मार्च में निकासी, अप्रैल से खरीदारी शुरू
- जनवरी: ₹78,027 करोड़ निकाले
- फरवरी: ₹34,574 करोड़ निकाले
- मार्च: ₹3,973 करोड़ निकाले
- अप्रैल: ₹4,223 करोड़ निवेश
- मई (अब तक): ₹14,167 करोड़ निवेश
डॉलर की कमजोरी और घरेलू सुधार बने निवेश के कारक
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार के अनुसार, डॉलर में गिरावट, अमेरिका और चीन की सुस्त अर्थव्यवस्था, जीडीपी में मजबूती और ब्याज दरों में स्थिरता जैसे कारण एफपीआई के लिए भारत को आकर्षक बना रहे हैं।
क्या कहते हैं बाजार विशेषज्ञ?
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट के हिमांशु श्रीवास्तव ने बताया कि अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और भारतीय रुपये की मजबूती ने एफपीआई को भारतीय परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित किया है। इसके साथ ही कई भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे बेहतर आए हैं जिससे भी निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
एक दिन में बिकवाली का भी असर
हालांकि 9 मई को भारत-पाकिस्तान विवाद बढ़ने के बाद एफपीआई ने ₹3,798 करोड़ की बिकवाली की। बावजूद इसके, महीने की कुल खरीदारी मजबूत बनी हुई है।
बॉन्ड से निकासी, इक्विटी में दिलचस्पी
एफपीआई ने सामान्य सीमा के तहत बॉन्ड से ₹3,725 करोड़ निकाले जबकि वॉलंटरी रिटेंशन रूट (VRR) से ₹1,160 करोड़ का निवेश किया है। इसका मतलब है कि निवेशकों की प्राथमिकता अब भी इक्विटी पर केंद्रित है।
