भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चेक से पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों को लेकर एक अहम फैसला लिया है। RBI ने उस नए सिस्टम की शुरुआत फिलहाल टाल दी है, जिसके तहत बैंकों को चेक मिलने के सिर्फ तीन घंटे के भीतर उसे पास या रिजेक्ट करना था। यह व्यवस्था 3 जनवरी 2026 से लागू होने वाली थी, लेकिन अब इसे अगली सूचना तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस फैसले के बाद चेक क्लियरेंस को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। आइए आसान भाषा में पूरे मामले को समझते हैं।
क्या था RBI का नया प्लान?
RBI देश में चेक क्लियरेंस की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए लगातार बदलाव कर रहा है। इसी कड़ी में उसने कंटीन्यूअस क्लियरिंग एंड सेटलमेंट (CCS) फ्रेमवर्क की घोषणा की थी। इस फ्रेमवर्क को दो चरणों में लागू किया जाना था। इसका दूसरा चरण यानी फेज़ 2 सबसे अहम माना जा रहा था, क्योंकि इसमें चेक क्लियरेंस का समय काफी कम हो जाता।
फेज 2 में क्या होने वाला था बदलाव?
फेज़ 2 के तहत जैसे ही किसी बैंक को चेक की डिजिटल इमेज मिलती, उसके पास सिर्फ तीन घंटे का वक्त होता कि वह चेक को स्वीकार करे या अस्वीकार करे। अगर बैंक तय समयसीमा के भीतर कोई जवाब नहीं देता, तो चेक अपने आप क्लियर माना जाता। इससे चेक क्लियरेंस में देरी की समस्या लगभग खत्म हो जाती और ग्राहकों को उसी दिन या कुछ ही घंटों में भुगतान मिल सकता था।
RBI ने अचानक ब्रेक क्यों लगाया?
24 दिसंबर को जारी सर्कुलर में RBI ने बताया कि CCS फ्रेमवर्क के फेज़ 2 को फिलहाल टाल दिया गया है। हालांकि, इसके पीछे कोई एक ठोस वजह सार्वजनिक तौर पर नहीं बताई गई है। लेकिन माना जा रहा है कि कई बैंकों की तकनीकी तैयारी, सिस्टम अपग्रेड, साइबर सिक्योरिटी और ऑपरेशनल चुनौतियों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। RBI नहीं चाहता कि जल्दबाजी में लागू किए गए सिस्टम से ग्राहकों को नुकसान हो या बैंकों के सामने बड़ी तकनीकी दिक्कतें खड़ी हों।
अभी चेक क्लियरेंस कैसे हो रहा है?
फिलहाल CCS फ्रेमवर्क का फेज 1 लागू है, जिसे इस साल की शुरुआत में लागू किया गया था। इसके तहत चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) के जरिए चेक की फिजिकल मूवमेंट खत्म कर दी गई है। अब चेक की डिजिटल इमेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा के जरिए ही क्लियरेंस होता है। इससे पहले की तुलना में प्रक्रिया काफी तेज और सुरक्षित हो गई है।
पहले चेक क्लियरेंस के लिए बैंकों को तय बैच का इंतजार करना पड़ता था। लेकिन अब जैसे ही चेक मिलता है, उसकी इमेज क्लियरिंग हाउस को भेज दी जाती है। ड्रॉई बैंक उस इमेज को देखकर फैसला करता है और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से अप्रूवल या रिजेक्शन भेज देता है। इससे कई मामलों में उसी दिन चेक क्लियर हो रहा है।
चेक प्रोसेसिंग टाइम में क्या बदलाव हुआ?
RBI ने चेक प्रोसेसिंग के कामकाजी घंटों में भी बदलाव किया है। अब चेक जमा करने की विंडो सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक खुली रहती है। वहीं, बैंक सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक चेक को कन्फर्म या रिजेक्ट कर सकते हैं। इस बदलाव से ग्राहकों को तेजी से क्लियरेंस मिलने की संभावना बढ़ी है।
फेज 2 टलने का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
फेज़ 2 के टलने का मतलब है कि फिलहाल तीन घंटे की सख्त समयसीमा लागू नहीं होगी। यानी चेक पास होने में अभी थोड़ा समय लग सकता है। हालांकि, मौजूदा सिस्टम पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज है, इसलिए ग्राहकों को बहुत बड़ी परेशानी नहीं होगी। चेक से पेमेंट करने वालों को बस इतना समझना होगा कि सुपर-फास्ट क्लियरेंस के लिए उन्हें अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा।
RBI ने साफ किया है कि जब तक नई तारीख घोषित नहीं होती, तब तक मौजूदा सिस्टम यानी फेज 1 पहले की तरह चलता रहेगा। माना जा रहा है कि बैंकों की पूरी तैयारी के बाद RBI फेज़ 2 को दोबारा लागू करेगा। तब चेक क्लियरेंस भारत में भी डिजिटल पेमेंट की तरह बेहद तेज और भरोसेमंद हो जाएगा।
