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गिरता शेयर बाजार, टूटता सोना-चांदी और रसातल में रुपया, पहली बार 94 के पार बंद, जानें क्या होगा असर?

शेयर बाजार और सोना-चांदी में बड़ी गिरावट के बीच रुपये की गिरावट को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करें। रुपये की गिरावट गहराने का ही असर इन सभी पर दिखाई दे रहा है। करेंसी एक्सपर्ट का कहना है कि रुपये में जारी गिरावट पूरी इकोनॉमी के लिए सही नहीं है।

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रसातल में रुपया

रुपया सोमवार को 50 पैसे टूटकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 94.03 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह पहली बार है जब रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले टूटकर 94 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण घरेलू मुद्रा में यह गिरावट आई। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, मजबूत अमेरिकी डॉलर और घरेलू शेयर बाजारों में भारी गिरावट ने भी रुपये पर दबाव डाला। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 93.84 पर खुला और पूरे दिन गिरावट में रहा। अंततः यह पहली बार 94 के स्तर को पार करते हुए 94.03 (अस्थायी) पर आ गया, जो पिछले बंद भाव से 50 पैसे की गिरावट है। करेंसी एक्सपर्ट के अनुसाार, विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और शेयर बाजारों में आई भारी गिरावट ने स्थानीय मुद्रा को और कमजोर कर दिया।

लगातार टूट रहा भारतीय रुपया

ईरान युद्ध के चलते रुपये पर दबाब बढ़ा है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार टूट रहा है। आज अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, डॉलर के मुकाबले 93.84 पर खुला। हालांकि बाद में यह लुढ़कता हुआ 93.94 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया जो पिछले बंद भाव से 41 पैसे की गिरावट दर्शाता है। रुपया शुक्रवार को रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 93 के स्तर से नीचे चला गया था और अंततः 64 पैसे टूटकर 93.53 के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ था। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.66 पर रहा। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.60 प्रतिशत की गिरावट के साथ 112.90 डॉलर प्रति बैरल रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) शुक्रवार को बिवकाल रहे थे और उन्होंने 5,518.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

रुपया टूटने का क्या होगा असर?

डॉलर के मुकाबले रुपया टूटने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था से लेकर आम आदमी की जेब पर चौतरफा होगा। सबसे बड़ा असर कच्चे तेल के आयात पर पड़ेगा। रुपया गिरने से सरकारी तेल कंपनियों को कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे। इसके चलते आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस और महंगी हो सकती है। ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा। इससे फल, सब्जी और दूध जैसी बुनियादी चीजों के दाम बढ़ेंगे। इसके अलावा मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की कीमतें भी 5-10% तक चढ़ सकती हैं क्योंकि इनके ज्यादातर पार्ट्स डॉलर में खरीदे जाते हैं। इसके अलावा, विदेश में पढ़ाई और यात्रा करना महंगा हो जाएगा। रुपये की कमजोरी से विदेशी निवेशक (FIIs) भी अपना पैसा भारतीय शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड से निकाल रहे हैं, जिससे निवेशकों का पोर्टफोलियो लाल निशान में है। अंततः, यह स्थिति देश के विदेशी कर्ज को बढ़ाएगी और व्यापार घाटे को गहरा कर पूरी इकोनॉमी पर बुरा असर डालेगी।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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