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EU के नए 'कार्बन टैक्स' प्लान से बढ़ सकती है भारतीय निर्यातकों की टेंशन! GTRI ने दी एक्सपोर्ट लागत बढ़ने की चेतावनी

EU Plans to Expand Carbon Tax: यूरोपीय संघ (EU) अपने कार्बन टैक्स सिस्टम जिसे CBAM (कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म) कहा जाता है का दायरा और अधिक बढ़ाने की योजना बना रहा है।

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EU Plans to Expand Carbon Tax (Photo: iStock)

EU Plans to Expand Carbon Tax: शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, यूरोपीय संघ (EU) अपने कार्बन टैक्स सिस्टम CBAM (Carbon Border Adjustment Mechanism) का दायरा और बढ़ाने की तैयारी में है। यह कदम भारत जैसे देशों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यूरोप को होने वाले भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त लागत बढ़ सकती है।

भारतीय निर्यातकों की बढ़ सकती है मुश्किल

पीटीआई (भाषा) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि यूरोप में निर्यात करने वाले भारतीय निर्यातकों को देश के प्रमुख निर्यात बाजारों में से एक में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए उत्सर्जन लेखांकन, आपूर्ति श्रृंखला का पता लगाने की क्षमता और कार्बन उत्सर्जन में कमी के उपायों में निवेश में तेजी लाने की जरूरत पड़ सकती है।

CBAM का दायरा बढ़ाने की है तैयारी

दरअसल, CBAM एक ऐसा टैक्स सिस्टम है जो यूरोप के बाहर बने उत्पादों पर उनके उत्पादन के दौरान हुए कार्बन उत्सर्जन के आधार पर लगाया जाता है। अभी यह टैक्स मुख्य रूप से लौह और इस्पात, एल्युमीनियम, सीमेंट, उर्वरक, हाइड्रोजन और बिजली जैसे सीमित सेक्टर पर लागू है। लेकिन अब यूरोपीय संसद की पर्यावरण, जलवायु और खाद्य सुरक्षा समिति (ENVI) ने 10 अप्रैल 2026 को जारी एक ड्राफ्ट रिपोर्ट में इसके विस्तार का प्रस्ताव दिया है।

जीटीआरआई ने कहा कि इन बदलावों में एक जनवरी, 2028 से लगभग 180 अतिरिक्त इस्पात और एल्यूमीनियम आधारित विनिर्मित उत्पादों तक सीबीएएम का विस्तार करना और कबाड़ आधारित उत्पादन के लिए लेखांकन नियम को सख्त करना शामिल है। इसमें ज्यादा क्षेत्रों में बिजली के उपयोग से होने वाले अप्रत्यक्ष उत्सर्जन के लिए व्यवस्था के विस्तार की जांच करना भी शामिल है।

औद्योगिक विनिर्मित वस्तुएं भी होंगी शामिल

GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ’’इन कदमों से सीबीएएम को मुख्य रूप से इस्पात और एल्युमीनियम कच्चे माल पर लगने वाले कर से बदलकर एक व्यापक कार्बन कर में बदला जा सकेगा, जिसमें औद्योगिक विनिर्मित वस्तुएं भी शामिल होंगी।’’

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विस्तार से कई नए उत्पाद सीबीएएम के दायरे में आ जाएंगे। इनमें गढ़े हुए धातु उत्पाद, ट्यूब, पाइप, फास्टनर, संरचनात्मक उपकरण, मशीनरी कल- पुर्जे, एल्यूमीनियम कंटेनर और अन्य अर्ध-निर्मित और तैयार इंजीनियरिंग वस्तुएं शामिल हैं। श्रीवास्तव ने कहा कि यूरोपीय संघ ने अभी तक उत्पादों का ब्योरा प्रकाशित नहीं किया है। लेकिन प्रस्ताव से पता चलता है कि इस कर का विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में विस्तार किया जा रहा है।

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Shivani Kotnala
शिवानी कोटनाला author

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने ... और देखें

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