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EPFO ला रहा है नया पोर्टल E-PRAAPTI, पुराने और बंद पड़े PF खातों का पैसा ढूंढना होगा आसान

EPFO जल्द ही 'E-PRAAPTI' डिजिटल पोर्टल लॉन्च करेगा। इसके जरिए कर्मचारी अपने पुराने या बंद पड़े पीएफ खातों (इनऑपरेटिव अकाउंट्स) को आसानी से खोजकर, आधार-वेरिफिकेशन से अपने नए UAN से लिंक कर सकेंगे।

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भूल गए हैं पुराना PF खाता? टेंशन खत्म! EPFO का 'E-PRAAPTI' पोर्टल बिना चक्कर काटे दिलाएगा आपका पैसा (तस्वीर-AI)

E-PRAAPTI Portal : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के उन करोड़ों कर्मचारियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है, जिनके पुराने या बंद पड़े (इनऑपरेटिव) पीएफ खातों का पैसा फंसा हुआ है। EPFO बहुत जल्द एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म 'E-PRAAPTI' (ई-प्राप्ति) पेश करने की तैयारी में है। इस नए पोर्टल की मदद से अंशधारक अपने पुराने, बिखरे या निष्क्रिय पीएफ खातों को आसानी से खोज सकेंगे, उन्हें अपने Universal Account Number (UAN) से लिंक कर सकेंगे और अपने फंसे हुए पैसों पर क्लेम कर सकेंगे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संगठन इस सुविधा को अगस्त के अंत तक शुरू करने की योजना बना रहा है।

पोर्टल लॉन्च से पहले बैक-एंड सॉफ्टवेयर अपग्रेड जारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, EPFO वर्तमान में एक मजबूत और सुरक्षित नेशनल डेटाबेस तैयार करने के लिए अपने बैक-एंड सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर रहा है। इस सिस्टम की टेस्टिंग पूरी होते ही ई-प्राप्ति पोर्टल को आम जनता के लिए लॉन्च कर दिया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सालों से बिना दावे के पड़े अरबों रुपये के पीएफ फंड की समस्या का स्थायी समाधान निकालना है। आंकड़ों के अनुसार, देश में फिलहाल 30.91 लाख से अधिक इनऑपरेटिव EPF खाते हैं, जिनमें करीब 9,330 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि अनक्लेम्ड पड़ी है।

कब बंद या निष्क्रिय हो जाता है पीएफ खाता?

EPFO के नियमों के अनुसार अगर किसी पीएफ खाते में लगातार तीन वर्षों (36 महीनों) तक कोई नया योगदान या अंशदान जमा नहीं होता है, तो उस खाते को 'इनऑपरेटिव' यानी निष्क्रिय घोषित कर दिया जाता है। वर्तमान में करीब 8 करोड़ एक्टिव मेंबर्स हर महीने 7.89 लाख कंपनियों और संस्थानों के जरिए अपने पीएफ खातों में योगदान देते हैं, लेकिन नौकरी बदलने या पुराने पीएफ खातों को ट्रांसफर न करा पाने के कारण लाखों कर्मचारियों का पैसा पुराने खातों में ही अटका रह जाता है।

क्या है E-PRAAPTI पोर्टल और कैसे करेगा काम?

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने इस साल अप्रैल में इस पहल की घोषणा की थी। E-PRAAPTI (EPF Aadhaar-Based Access Portal for Tracking Inoperative Accounts) एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह पोर्टल मुख्य रूप से उन अंशधारकों के काम आएगा जिनके पास 2014 में UAN व्यवस्था लागू होने से पहले के पुराने मेंबर्स आइडेंटिफिकेशन नंबर (MID) हैं।

  • आधार आधारित सुरक्षित लॉगिन: यूजर्स बिना किसी जटिल कागजी कार्रवाई के केवल अपनी आधार-आधारित प्रामाणिकता के जरिए पोर्टल पर लॉगिन कर सकेंगे।
  • ऑनलाइन आवेदन की सुविधा: पुराने खातों को खोजने के लिए मेंबर्स को एक सरल ऑनलाइन फॉर्म में अपनी बेसिक जानकारी दर्ज करनी होगी।
  • ऑटोमेटिक खाता विलय (PF Merge): अगर सिस्टम को पुराने MID और मौजूदा UAN के बीच मिलान मिल जाता है, तो पुराने पीएफ का पैसा अपने आप नए UAN में ट्रांसफर या मर्ज कर दिया जाएगा।
  • नया UAN जनरेट होना: ऐसे सदस्य जिनके पास पुराना MID तो है लेकिन UAN नहीं बना है, पोर्टल उनके लिए नया UAN जारी कर देगा।

कागजी कार्रवाई और नियोक्ताओं पर निर्भरता होगी खत्म

इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कर्मचारियों को अपने पुराने पीएफ के पैसे निकालने या ट्रांसफर करने के लिए अपने पूर्व नियोक्ताओं (पिछली कंपनी) के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अधिकांश मामलों में कंपनियां बंद हो जाने या पुराने रिकॉर्ड न मिलने के कारण कर्मचारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। E-PRAAPTI पोर्टल के जरिए सत्यापन प्रक्रिया आधार आधारित होने से न सिर्फ दफ्तरी भागदौड़ खत्म होगी, बल्कि क्लेम सेटलमेंट का समय भी बहुत कम हो जाएगा।

भविष्य में बिना MID वालों को भी मिलेगा फायदा

शुरुआती चरण में यह पोर्टल उन सदस्यों के लिए शुरू किया जाएगा जिनके पास अपने पुराने मेंबर्स ID (MID) उपलब्ध हैं। हालांकि, सरकार की योजना इसके अगले चरणों में इस व्यवस्था का विस्तार करने की है, ताकि जिन लोगों को अपना पुराना पीएफ अकाउंट नंबर या MID याद नहीं है, वे भी केवल अपनी पहचान प्रमाणित करके अपने भूले-बिसरे पीएफ फंड को ट्रैक और क्लेम कर सकें।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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