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किराया देते हैं पर HRA नहीं मिलता? इनकम टैक्स बचाने का यह फॉर्मूला जान लें

अगर आप मंथली रेंट का भुगतान करते हैं तो आयकर की धारा 134 के तहत सिर्फ पुरानी टैक्स व्यवस्था में इनकम टैक्स छूट पा सकते हैं।

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रेंट भुगतान पर टैक्स छूट

क्या आप मंथली रेंट का भुगतान करते हैं? अगर हां, तो आप इसका फायदा इनकम टैक्स रिटर्न में टैक्स छूट पाने के लिए कर सकते हैं। बता दें कि बहुत सारे करदाताओं को लगता है कि कंपनी से हाउस रेंट अलाउंस (HRA) मिलने के बाद ही वह टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। हालांकि, यह सही नहीं है। अगर आपको अपनी सैलरी के हिस्से के तौर पर HRA नहीं भी मिलता है, तो भी इनकम टैक्स एक्ट आपको कुछ शर्तों के साथ किराए के भुगतान पर डिडक्शन क्लेम करने की इजाजत देता है। आइए जानते हैं कि आप मंथली रेट भुगतान पर टैक्स छूट कैसे पा सकते हैं।

आयकर की धारा 134 के तहत मिलती है टैक्स छूट

टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि जिन टैक्सपेयर्स को HRA नहीं मिलता है, वे इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के सेक्शन 134 (पहले इनकम टैक्स एक्ट, 1961 का सेक्शन 80GG) के तहत किराए के भुगतान पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। यह डिडक्शन सैलरी पाने वाले और खुद का काम करने वाले (सेल्फ-एम्प्लॉयड), दोनों तरह के लोगों के लिए उपलब्ध है, बशर्ते वे कुछ जरूरी शर्तों को पूरा करते हों।

टैक्स छूट पाने की क्या हैं शर्तें?

टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि रेंट भुगतान पर टैक्स छूट पाने के लिए, टैक्सपेयर को उस फाइनेंशियल ईयर के दौरान एम्प्लॉयर से HRA नहीं मिला होना चाहिए। इसके अलावा, टैक्सपेयर, उनके जीवनसाथी, नाबालिग बच्चे या उस HUF (जिसके टैक्सपेयर सदस्य हैं) के पास उस शहर में कोई रिहायशी प्रॉपर्टी नहीं होनी चाहिए जहां वे आम तौर पर रहते हैं या काम करते हैं। इस दावे के साथ इनकम टैक्स रूल्स, 2026 के फॉर्म 31 (पहले फॉर्म 10BA) में बताया गया डिक्लेरेशन (घोषणा-पत्र) देना जरूरी है। अगर फॉर्म नहीं भरा जाता है या ऐसा दावा किया जाता है जिसके लिए सही कागजात नहीं हैं, तो टैक्स डिपार्टमेंट इसकी जांच कर सकता है।

आपके, आपके जीवनसाथी, नाबालिग बच्चे या उस हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के पास, जिसके आप सदस्य हैं, उस जगह पर कोई घर नहीं है जहां आप आम तौर पर रहते हैं या काम करते हैं। आप फॉर्म 10BA में तय घोषणा-पत्र जमा करते हैं।

कौन से दस्तावेज रखने चाहिए?

टैक्सपेयर्स को किराये की रसीदें, एक वैध रेंटल एग्रीमेंट और किराया चुकाने का सबूत (जैसे बैंक ट्रांसफर) अपने पास रखना चाहिए। जिन मामलों में सालाना किराया ₹1 लाख से ज्यादा होता है, वहां मकान मालिक का PAN बताना जरूरी है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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