गर्मियों का मौसम आते ही घरों में एसी (AC) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ जाता है, लेकिन इसके साथ ही शॉर्ट सर्किट और एसी ब्लास्ट की घटनाएं भी बढ़ लगी हैं। हाल ही में दिल्ली के पॉश इलाके हौज खास में एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया, जहां पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी धनेंद्र कुमार के घर में एसी फटने से भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में दम घुटने के कारण पूर्व आईएएस अधिकारी की जान चली गई, जबकि परिवार के अन्य लोग किसी तरह बच पाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आग को भड़काने और कमरे को पल भर में गैस चैंबर बनाने में घर के इंटीरियर यानी 'फॉल्स सीलिंग' (False Ceiling) ने सबसे बड़ी और खतरनाक भूमिका निभाई। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि घरों को सुंदर बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली फॉल्स सीलिंग सिर्फ फैशन या जरूरत की चीज नहीं है, बल्कि थोड़ी सी लापरवाही से यह एक जानलेवा जाल भी बन सकती है।
ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि अगर आपके घर में फॉल्स सीलिंग हैं तो गर्मी के मौसम में आपको कौन कौन सी बातों पर ध्यान देना चाहिए जिससे आपकी एक गलती आपकी जान पर भारी न पड़े।
फॉल्स सीलिंग कैसे बनती है जान का खतरा
घरों में फॉल्स सीलिंग का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। लोग छतों को आकर्षक लुक देने, लाइटें छुपाने और कमरे को ठंडा रखने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। लेकिन ज्यादातर लोग इसके पीछे छिपे खतरों से पूरी तरह अनजान होते हैं। फॉल्स सीलिंग और असली छत के बीच में एक खाली जगह होती है, जिसमें से होकर एसी की गैस पाइपलाइन, बिजली के अनगिनत तार और गिजक की वायरिंग गुजरती है। जब गर्मी के दिनों में एसी लगातार कई घंटों तक चलता है, तो तारों पर लोड बढ़ता है। यदि वायरिंग में कहीं भी थोड़ा सा भी शॉर्ट सर्किट होता है, तो फॉल्स सीलिंग के भीतर छिपी चिंगारी को फैलने का पूरा मौका मिल जाता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि छत के ऊपर चल रही इस गड़बड़ी का पता तब तक नहीं चलता, जब तक कि आग विकराल रूप न ले ले।
फॉल्स सीलिंग से आग कैसे लगती है?
इतना ही नहीं, फॉल्स सीलिंग को बनाने में अक्सर थर्माकोल, पीवीसी (PVC), प्लाईवुड या कम गुणवत्ता वाले जिप्सम बोर्ड का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता है। ये सामग्रियां अत्यधिक ज्वलनशील होती हैं। हौज खास वाले हादसे में भी यही हुआ; जैसे ही एसी के इनडोर यूनिट में आग लगी, कमरे की फॉल्स सीलिंग ने उस आग को तेजी से पकड़ लिया और पूरे घर में फैला दिया। फॉल्स सीलिंग के जलने से निकलने वाला जहरीला धुआं और प्लास्टिक की गैस इतनी खतरनाक होती है कि इंसान को संभलने का मौका भी नहीं मिलता। कमरा पूरी तरह से धुएं से भर जाता है, जिससे आंखों में जलन होने लगती है और दम घुटने के कारण व्यक्ति बेहोश हो जाता है। यही कारण है कि फॉल्स सीलिंग वाले कमरों में आग लगने पर जान का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
इन सेफ्टी टिप्स को करें फॉलो
- फॉल्स सीलिंग के अंदर इस्तेमाल होने वाले सभी बिजली के तार केवल 'फायर रिटार्डेंट' (Fire Retardant) या आईएसआई (ISI) मार्क वाले ही होने चाहिए, जो अधिक गर्मी या शॉर्ट सर्किट होने पर आसानी से आग नहीं पकड़ते।
- गर्मी के सीजन में एसी को बिना सर्विस कराए बिल्कुल न चलाएं। एसी के तार और प्लग की समय-समय पर जांच कराते रहें ताकि ओवरहीटिंग की समस्या न हो।
- घर के मेन बोर्ड में अच्छी क्वालिटी का सर्किट ब्रेकर (MCB) जरूर लगवाएं, ताकि कहीं भी शॉर्ट सर्किट होते ही पूरे घर की बिजली तुरंत कट जाए।
- अगर आप नई फॉल्स सीलिंग करवा रहे हैं, तो पीवीसी या थर्माकोल के बजाय केवल फायर-रेसिस्टेंट (आग प्रतिरोधी) जिप्सम बोर्ड का ही चयन करें।
- फॉल्स सीलिंग के भीतर हवा के वेंटिलेशन के लिए छोटी सी जगह या जालियां छोड़ना बेहद जरूरी है, ताकि अंदर की गर्म हवा बाहर निकल सके और गैस का दबाव न बने।
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