Home Loan EMI : महीने का 1 लाख रुपये हाथ में आना (टेक-होम सैलरी) एक बेहतरीन अहसास है। इससे अपना घर खरीदने का सपना बहुत पास नजर आने लगता है। लेकिन केवल एक अच्छी सैलरी यह तय नहीं करती कि आप बिना तनाव के कितना बड़ा होम लोन चुका सकते हैं। बैंक भले ही आपकी कमाई का आधा हिस्सा EMI में काटने की मंजूरी दे दें, लेकिन समझदारी इसी में है कि आपकी जेब पर कोई भारी दबाव न पड़े। आइए समझते हैं कि 1 लाख रुपये सैलरी वाले इंसान के लिए कितनी EMI सुरक्षित है और घर खरीदने से पहले किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
कितनी होनी चाहिए आपकी होम लोन EMI?
अक्सर लोग सोचते हैं कि जब बैंक लोन पास कर रहा है, तो ज्यादा EMI देने में क्या बुराई है। लेकिन बैंक आपकी क्षमता (Eligibility) देखता है, आपकी असली सहूलियत (Affordability) नहीं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर आपकी टेक-होम सैलरी 1 लाख रुपये है, तो आपकी कुल EMI 30,000 से 40,000 रुपये (30-40%) के बीच होनी चाहिए। अगर आप एकदम तनावमुक्त रहना चाहते हैं, तो EMI को 25,000 से 30,000 रुपये (25-30%) तक ही सीमित रखें। इससे आपके पास बचत, अन्य जरूरतों और इमरजेंसी के लिए पर्याप्त पैसा बचेगा। अगर आप 35,000 रुपये की EMI चुनते हैं, तो आपके पास बाकी खर्चों के लिए 65,000 रुपये बचते हैं। इसमें से 43,000 रुपये घर के जरूरी और सामान्य खर्चों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जबकि 22,000 रुपये को आप SIP, म्यूचुअल फंड या अन्य सेविंग्स में लगा सकते हैं।
बैंक की मंजूरी और जमीनी हकीकत का फर्क
बैंक आमतौर पर आपकी सैलरी का 50 से 55 फीसदी हिस्सा EMI के रूप में मंजूर कर सकते हैं। यानी 1 लाख रुपये की सैलरी पर आपको 50,000 से 55,000 रुपये तक की EMI वाला लोन आसानी से मिल सकता है। लेकिन यह एक बड़ा जोखिम साबित हो सकता है। अगर कल को आपकी सैलरी में गिरावट आती है या कोई अनपेक्षित बड़ा खर्च आ खड़ा होता है, तो 50% EMI चुकाना आपकी कमर तोड़ सकता है। इसलिए बैंक की मैक्सिमम लिमिट तक जाने की गलती कभी न करें।
घर खरीदने से पहले जमा रखें भारी Down Payment और अन्य खर्च
केवल महीने की EMI प्लान कर लेना ही काफी नहीं है। घर की चाबी हाथ में आने से पहले आपको अपने पास एक बड़ा कैश फंड तैयार रखना होता है। 30 लाख तक के घर के लिए लोन अमाउंट के अलावा कम से कम 10% रकम खुद देनी होती है। 75 लाख तक के घर के लिए 20% तक डाउन पेमेंट लगता है। प्रॉपर्टी की कुल कीमत का 5 से 8 फीसदी हिस्सा सरकारी कागजी कार्रवाई, रजिस्ट्रेशन और स्टैंप ड्यूटी में जाता है। यह खर्च लोन की रकम में शामिल नहीं होता, इसे आपको अपनी जेब से देना पड़ता है। नया घर लेने के बाद इंटीरियर, फर्नीचर, मेंटेनेंस और प्रॉपर्टी टैक्स जैसे छिपे हुए खर्च भी सामने आते हैं।
इमर्जेंसी फंड को कभी न करें नजरअंदाज
होम लोन लेने से पहले आपके पास कम से कम 6 से 12 महीने के खर्चों का बैकअप (इमर्जेंसी फंड) तैयार होना चाहिए। इस फंड में आपके घर के महीने भर के राशन, बिलों के साथ-साथ आपकी होम लोन EMI भी शामिल होनी चाहिए। मान लीजिए अगर आपकी EMI और घर का कुल मासिक खर्च मिलाकर 60,000 से 70,000 रुपये बनता है, तो आपके बैंक खाते में 3.6 लाख से 8.4 लाख रुपये तक का इमर्जेंसी फंड हमेशा अलग से जमा रहना चाहिए।
बाकी सपनों को दांव पर न लगाएं
घर खरीदना जीवन का एक बड़ा मील का पत्थर है, लेकिन इसके चक्कर में बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट की प्लानिंग या हर महीने होने वाली SIP जैसी जरूरी वित्तीय योजनाओं को रोकना समझदारी नहीं है। अगर आपकी सैलरी 1 लाख रुपये है, तो EMI को 30,000 से 35,000 रुपये के दायरे में रखें और लोन लेने से पहले जरूरी डाउन पेमेंट व इमर्जेंसी फंड की व्यवस्था जरूर कर लें। सही प्लानिंग से लिया गया घर आपको खुशी देगा, वित्तीय तनाव नहीं।
