दिसंबर 2025 में GST कलेक्शन ₹1.75 लाख करोड़ के पार, घरेलू मांग सुस्त फिर भी 6.1% रही रफ्तार
- Authored by: यतींद्र लवानिया
- Updated Jan 1, 2026, 06:56 PM IST
GST 2.0 के तहत बड़े पैमाने पर टैक्स स्लैब में कटौती और रेट रैशनलाइजेशन के बाद दिसंबर 2025 का GST डेटा सरकार और बाजार दोनों के लिए अहम संकेत लेकर आया है। एक तरफ रिफंड में तेज उछाल और घरेलू बिक्री से सीमित टैक्स ग्रोथ ने नेट GST पर दबाव डाला, तो दूसरी ओर आयात से मिलने वाले रेवेन्यू ने कुल कलेक्शन को सहारा दिया। यही वजह है कि हेडलाइन नंबर मजबूत दिखते हैं, लेकिन अंदरूनी ट्रेंड्स में सावधानी के संकेत साफ नजर आते हैं।
जीएसटी कलेक्शन बढ़ा। (इमेज क्रेडिट, ओपन एआई)
GST Collection December 2025: दिसंबर 2025 में भारत के गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन में 6.1% की सालाना बढ़त दर्ज हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने कुल GST संग्रह बढ़कर करीब ₹1.75 लाख करोड़ पहुंच गया। हालांकि, हेडलाइन ग्रोथ पॉजिटिव रही। लेकिन, घरेलू मांग से जुड़े टैक्स कलेक्शन की सुस्ती और GST 2.0 के तहत रेट कट्स का असर साफ नजर आया।
ग्रोथ की रफ्तार धीमी
दिसंबर 2024 में GST कलेक्शन करीब ₹1.64 लाख करोड़ था, जो दिसंबर 2025 में बढ़कर ₹1.74–1.75 लाख करोड़ के दायरे में पहुंच गया। इस दौरान Central GST और State GST में सालाना आधार पर बढ़त दर्ज हुई, जबकि Integrated GST में गिरावट देखी गई। यह संकेत देता है कि क्रॉस-बॉर्डर और इंटर-स्टेट ट्रांजैक्शंस की तुलना में घरेलू गतिविधियों से जुड़ा कलेक्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।
आयात ने संभाला मोर्चा
आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर 2025 में घरेलू लेनदेन से GST कलेक्शन सिर्फ 1.2% बढ़कर ₹1.22 लाख करोड़ के आसपास रहा। इसके उलट आयातित वस्तुओं से मिलने वाला GST रेवेन्यू 19.7% की तेज छलांग के साथ ₹51,977 करोड़ तक पहुंच गया। साफ है कि कुल कलेक्शन को सहारा देने में आयात से जुड़े टैक्स का योगदान ज्यादा रहा।
नेट GST पर दबाव
दिसंबर में GST रिफंड 31% बढ़कर ₹28,980 करोड़ तक पहुंच गए। इसके चलते रिफंड के बाद नेट GST रेवेन्यू सिर्फ 2.2% की मामूली बढ़त के साथ ₹1.45 लाख करोड़ रहा। वहीं सेस कलेक्शन में बड़ी गिरावट देखने को मिली और यह घटकर ₹4,238 करोड़ रह गया, जबकि एक साल पहले दिसंबर 2024 में सेस से सरकारी खजाने में 12,003 करोड़ रुपये आए थे।
अब तक मजबूत ट्रेंड
वित्त वर्ष (FY) 2025–26 के पहले नौ महीनों यानी अप्रैल से दिसंबर के बीच कुल ग्रॉस GST कलेक्शन 8.6% बढ़कर करीब ₹16.5 लाख करोड़ पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा ₹15.2 लाख करोड़ था। यह दिखाता है कि पूरे साल के स्तर पर GST सिस्टम में ग्रोथ बरकरार है, भले ही कुछ महीनों में दबाव नजर आ रहा हो। भारत का GST सिस्टम FY 2024–25 में ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचा था। पूरे साल में ₹22.08 लाख करोड़ का रिकॉर्ड कलेक्शन हुआ, जो सालाना आधार पर 9.4% की बढ़त थी। औसत मासिक GST कलेक्शन ₹1.84 लाख करोड़ रहा, जो 2017 में GST लागू होने के बाद अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। 2020–21 के ₹11.37 लाख करोड़ से 2023–24 के ₹20.18 लाख करोड़ तक का सफर टैक्स कंप्लायंस और औपचारिक अर्थव्यवस्था की मजबूती को दिखाता है।
रेवेन्यू पर असर
GST ढांचे में बड़े सुधारों की अगुवाई करने वाली GST Council ने सितंबर 2025 में ऐतिहासिक बदलाव किए। प्रधानमंत्री Narendra Modi की घोषणा के बाद GST स्लैब को चार दरों से घटाकर दो मुख्य दरों 5% और 18% में समेट दिया गया, जबकि लग्जरी और सिन गुड्स के लिए 40% का स्पेशल रेट रखा गया। करीब 375 आइटम्स पर टैक्स कटौती से उपभोक्ताओं को राहत मिली, लेकिन शॉर्ट टर्म में कलेक्शन पर दबाव बढ़ा। साथ ही, कंपेंसेशन सेस अब सिर्फ तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों तक सीमित कर दिया गया है।
आगे क्या सुधरेंगे GST आंकड़े
टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि GDP ग्रोथ 8% से ऊपर रहने के बावजूद घरेलू GST रेवेन्यू की सुस्ती इस बात से जुड़ी है कि मौजूदा ग्रोथ का बड़ा हिस्सा सरकारी खर्च से आया है। इसका असर उपभोग और GST कलेक्शन में आने वाले महीनों में दिख सकता है। GST 2.0 के तहत रेट कट्स और पैकेजिंग, फार्मा, एग्री जैसे सेक्टर्स में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के चलते रिफंड बढ़े हैं, जिससे दिसंबर के आंकड़ों पर दबाव आया। हालांकि संकेत यही हैं कि FY 2026–27 में GST कलेक्शन फिर से मजबूत रफ्तार पकड़ सकता है।
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