बिजनेस

Cyclone Biparjoy: तूफानों से लग चुकी है 1.40 लाख करोड़ की चपत, बिपारजॉय दे सकता है महंगाई से लेकर ये झटके

Cyclone Biparjoy Tracking: बीते तीन वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों ने ऐसी प्राकृतिक आपदाओं पर राहत एवं बचाव कार्य के लिए 140478.16 करोड़ रुपये से अधिक पैसा खर्च किया है। 13 जून से 15 जून तक 'बिपारजॉय' तूफान के लिए चेतावनी जारी कर दी गई है।

Image

चक्रवात बिपारजॉय लाइव ट्रैकिंग

Photo : iStock
KEY HIGHLIGHTS
  • तूफान कई तरीकों से पहुंचाते हैं नुकसान
  • बढ़ा सकते हैं महंगाई
  • बिपारजॉय के हो सकते हैं कई निगेविट असर

Cyclone Biparjoy Live Tracking: भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक चक्रवात 'बिपारजॉय' (Cyclone Biparjoy) काफी नुकसान कर सकता है। बिपारजॉय के गुजरात के कच्छ, देवभूमि द्वारका और जामनगर जिलों को सबसे अधिक प्रभावित करने की संभावना है। इस चक्रवात से इन जिलों में बहुत अधिक बारिश हो सकती है। बिपारजॉय के चलते बहुत अधिक वित्तीय नुकसान होने की भी संभावना है।

जब भी कोई तूफान आता है तो उसकी तैयारी पर राज्य और केंद्र सरकारों हजारों करोड़ रु खर्च करती हैं। इस तरह की कोई भी प्राकृतिक आपदा सरकारी खजाने को काफी नुकसान पहुंचाती है। राहत एवं बचाव कार्यों पर सरकार को बहुत पैसा खर्च करना पड़ता है। साथ ही कारोबारियों को भी कई तरह से नुकसान होता है।

1,40,478 करोड़ रु हो चुके हैं खर्च

बीते तीन वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों ने ऐसी प्राकृतिक आपदाओं पर राहत एवं बचाव कार्य के लिए 140478.16 करोड़ रुपये से अधिक पैसा खर्च किया है। 13 जून से 15 जून तक 'बिपारजॉय' तूफान के लिए चेतावनी जारी कर दी गई है।

कैसे-कैसे होता है नुकसान

जब कोई चक्रवात या तूफान आता है तो वो कई तरीकों से नुकसान पहुंचाता है

  • प्रोडक्शन पर असर पड़ता है
  • प्रोडक्शन के अलावा सप्लाई भी प्रभावित होती है
  • महंगाई में बढ़ोतरी की संभावना रहती है
  • रोजगार पर भी असर पड़ता है
  • राज्य और केंद्र सरकारों के खजाने पर चपत लगती है
  • पालतू पशुओं की मौत से आम लोगों को आर्थिक नुकसान होता है
  • बिपारजॉय भी इस तरह के तमाम नुकसान पहुंचा सकता है

बीते सालों में कितनी राशि आवंटित हुई

  • 2019-20 में ऐसी आपदाओं के लिए केंद्र और राज्यों ने 13465 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की
  • 2020-21 में यह आंकड़ा 23186.40 करोड़ रु का रहा
  • 2021-22 में ये आंकड़ा 23186.40 करोड़ रुपये का रहा

रिलायंस इंडस्ट्रीज और अडानी ग्रुप ने रोका काम

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बिपारजॉय के कारण गुजरात के सिक्का बंदरगाह से डीजल और अन्य तेल उत्पादों की शिपिंग रोक दी है। वहीं अडानी ग्रुप ने भी फिलहाल इस क्षेत्र में ऑपरेशन रोक दिया है। अडानी पोर्ट्स का मुंद्रा ऑपरेशन, भारत का सबसे बिजी कंटेनर हार्बर, वाडिनार और सिक्का के तेल बंदरगाहों के साथ-साथ कांडला, ओखा, बेदी और नवलखी ने अपनी एक्टिविटीज को फिलहाल बंद कर दिया है।

3 सालों में आए कौन-कौन से तूफान

बीते 3 सालों में तीन बड़े तूफान आए हैं। इनमें गाजा' 'तितली' और 'बुलबुल' शामिल हैं, जिन्होंने कई राज्यों में काफी नुकसान किया। 'बुलबुल' ने पश्चिम बंगाल में बहुत तबाही मचाई थी। तब राज्य ने राहत एवं बचाव कार्य के लिए केंद्र से 7317 करोड़ रुपये की मदद मांगी थी। 2019 में ओडिशा में 'फनी' तूफान के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से 5227.61 करोड़ रुपये मांगे थे। तब केंद्र ने 3114.46 करोड़ रुपये की राशि दी थी।

Kashid Hussain
काशिद हुसैन author

<p>काशिद हुसैन अप्रैल 2023 से Timesnowhindi.Com (टाइम्स नाउ नवभारत) के साथ काम कर रहे हैं। यहां पर वे सीनियर कॉरेस्पोंडेंट हैं। टाइम्स नाउ नवभारत की बिजनेस टीम में वह शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और आर्थिक जगत से जुड़ी सभी तरह की स्टोरी और वेब स्टोरी करते हैं। रिसर्च आधारित स्टोरी के लिए नए एंगल तलाश करना और रीडर्स की रुचि के अनुसार कॉपी लिखने पर फोकस रहता है। शेयर बाजार में खास रुचि है और इससे जुड़ी रियल टाइम खबरें कम समय में लगाने में विशेषज्ञता है। मीडिया में काम करने का 8 वर्षों का अनुभव है, जिसमें गुडरिटर्न्स और शेयर मंथन वेबसाइटों के अलावा निवेश मंथन पत्रिका में भी काम किया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में ग्रेजुएशन के बाद आईआईएमसी, नई दिल्ली से रेडियो एंव टेलीविजन में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। ग्रेजुएशन के दौरान सहारा समय और सिटी न्यूज में इंटर्नशिप के साथ-साथ अखबार और वेबसाइट के लिए लिखना शुरू कर दिया था। काशिद को किताबें पढ़ना, फिल्में देखना और क्रिकेट में रुचि है। बिजनेस के अलावा खेल जगत और इंटरनेशनल खबरों में भी रुचि है।<br></p>

और पढ़ें
End of Article