Crude Price At 4 Month Low: कच्चा तेल की कीमतें 4 महीने के निम्नतम स्तर पर आ गई हैं। ब्रेंट क्रूड 3.76 डॉलर यानी 4.6 फीसदी गिरकर 77.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। वहीं यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड (डब्ल्यूटीआई) 3.76 डॉलर यानी 4.9 फीसदी गिरकर 72.90 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। साफ है कि कच्चा तेल जिस तरह सस्ता हो रहा है, उससे सस्ते पेट्रोल-डीजल की आस बढ़ गई है। अब देखना यह है कि भारत में पेट्रोलियम कंपनियां लोगों को राहत देती हैं या नहीं। मई 2022 के बाद से देश में पेट्रोल और डीजल सस्ता नहीं हुआ है।
क्यों सस्ता हो रहा है कच्चा तेल
तेल की अच्छी सप्लाई और बढ़ते भंडार के संकेतों ने ओपेक प्लस , सऊदी अरब और रूस की ओर से गिरावट को कंट्रोल करने की कोशिशें नाकाम साबित हुई हैं। इसके अलावा इजराइल-हमास युद्ध का भी असर नहीं हुआ है। इसके अलावा चीनी तेल रिफाइनरी थ्रूपुट में मंदी की आशंका ने भी निवेशकों की डिमांड को रोका है। जिसका असर वायदा कीमतों पर दिख रहा है। इसके अलावा दुनिया में कच्चे तेल के सबसे बड़े आयातक चीन में रिफाइनर्स ने अक्टूबर में डेली प्रोसेसिंग रेट घटा दिए। यानी उत्पादन कम कर दिया है। वहीं पिछले सात महीनों में पहली बार हुआ है , जब अमेरिका में पेट्रोल-डीजल की बिक्री में गिरावट आई है।
LPG के बाद अब पेट्रोल-डीजल की बारी है
जिस तरह कच्चा तेल 80 डॉलर से नीचे आ गचा है। उससे साफ है कि पेट्रोलियम कंपनियों की लागत कम हो गई है। और उनके कमाई को देखा जाय तो हालिया तिमाही परिणामों से साफ है कि कंपनियों को सस्ते कच्चे तेल का फायदा मिला है। ऐसे में करीब डेढ़ साल से कीमतों में कमी का इंतजार कर रहे लोगों को राहत का इंतजार है। देश में इस समय पेट्रोल और डीजल के दाम 100 और 90 रुपये के करीब हैं। यह उम्मीद इसलिए बढ़ गई है क्योंकि सरकार ने महंगाई पर नियंत्रण करने के लिए सितंबर से एलपीजी के दाम 200-300 रुपये तक घटा दिए हैं।
