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बैंक अकाउंट बंद कर रहे हैं? पहले ये चीजें नहीं देखी तो भरनी पड़ेगी मोटी फीस

बैंक अकाउंट बंद करने से पहले कुछ जरूरी बातों की जांच करना बेहद महत्वपूर्ण है, वरना बाद में अनचाहे चार्ज आपके खाते से काट लिए जा सकते हैं। कई बार मिनिमम बैलेंस न रखने की पेनल्टी, पुराने चार्ज के कारण बना निगेटिव बैलेंस, डेबिट कार्ड की सालाना फीस या ऑटो-डेबिट जैसी सुविधाएं अकाउंट क्लोजर के समय परेशानी पैदा कर देती हैं।

Bank Account Close

कई लोग सोचते हैं कि बैंक अकाउंट बंद करना बहुत आसान काम है फॉर्म भरिए, पैसा दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर कर दीजिए और प्रोसेस पूरा। लेकिन सच यह है कि अकाउंट क्लोज करते समय कई छोटी–छोटी गलतियां भारी पड़ जाती हैं और बाद में ऐसे चार्ज लग जाते हैं जिनकी जानकारी पहले कभी नहीं दी गई होती। खासकर तब जब आपका अकाउंट लंबे समय से इस्तेमाल में न हो या उसमें न्यूनतम बैलेंस न हो। बैंक ऐसी स्थिति में कुछ पेनल्टी या सर्विस चार्ज काट सकता है। इसलिए अकाउंट बंद करने से पहले एक सही चेकलिस्ट देख लेना बहुत जरूरी है, ताकि आपका पैसा सुरक्षित रहे और कोई अतिरिक्त खर्च न लगे।

1. सबसे पहले मिनिमम बैलेंस की जांच करें

अधिकतर बैंक सेविंग अकाउंट में एक निश्चित मिनिमम बैलेंस रखने का नियम रखते हैं। अगर आपने पिछले महीनों में यह नियम पूरा नहीं किया है, तो बैंक ने पेनल्टी पहले ही जोड़ दी होगी। कई ग्राहक बिना स्टेटमेंट देखे अकाउंट बंद करने पहुंच जाते हैं और बाद में पता चलता है कि पहले से ही कुछ कटौती हो चुकी है। इसलिए अकाउंट बंद करने से पहले 2–3 महीने का बैंक स्टेटमेंट जरूर डाउनलोड करें और देखें कि कोई पेनल्टी लगी तो नहीं। अगर लगी है, तो उसे पहले ही क्लियर कर दें ताकि क्लोज़र के समय कोई दिक्कत न आए।

2. कहीं आपका अकाउंट निगेटिव बैलेंस में तो नहीं?

बहुत से लोग पुराने अकाउंट यूज़ करना बंद कर देते हैं और सोचते हैं कि बिना इस्तेमाल के कोई चार्ज नहीं लगेगा। जबकि असलियत यह है कि कई सर्विस चार्ज जैसे SMS अलर्ट, कार्ड चार्ज, अकाउंट मेंटेनेंस फीस अपने आप जुड़ते रहते हैं। अगर बैलेंस जीरो है और चार्ज कटते रहते हैं, तो अकाउंट निगेटिव में चला जाता है। जब आप अकाउंट बंद करने जाते हैं, बैंक कहता है कि पहले यह निगेटिव रकम जमा करें, तभी अकाउंट बंद होगा। इसलिए अकाउंट की वर्तमान स्थिति जरूर चेक करें और अगर बैलेंस निगेटिव है, तो उसे भर दें, ताकि आगे कोई झंझट न हो।

3. डेबिट कार्ड या अन्य सर्विस चार्ज तो पेंडिंग नहीं?

कई बार लोग महीनों से अपना डेबिट कार्ड इस्तेमाल नहीं करते और मान लेते हैं कि अब उस पर कोई चार्ज नहीं लगेगा, लेकिन ऐसा नहीं है। बैंक हर साल डेबिट कार्ड की वार्षिक फीस लेता है, चाहे कार्ड उपयोग हो या नहीं। इसके अलावा चेकबुक फीस, ATM चार्ज, SMS अलर्ट फी, और कुछ अन्य सर्विस चार्ज भी बकाया रह सकते हैं। अगर आप सीधे अकाउंट बंद करवा देते हैं और ये चार्ज सिस्टम में पेंडिंग हों, तो ये बंद होने से पहले काट लिए जाते हैं। इसलिए अकाउंट में लगे सभी चार्ज की जानकारी पहले ही ले लें।

4. ऑटो-डेबिट और ECS जरूर अपडेट करें

यह कदम सबसे जरूरी है क्योंकि आपके पुराने अकाउंट से जुड़े सभी ऑटो-पेमेंट्स अकाउंट बंद होते ही रुक जाएंगे। अगर आपके खाते से लोन EMI, SIP, इंश्योरेंस प्रीमियम, बिजली-पानी के बिल या नेटफ्लिक्स जैसे OTT सब्सक्रिप्शन अपने आप कटते हैं, तो अकाउंट बंद होने के बाद ये सभी भुगतान असफल हो जाएंगे। इससे लेट फीस लग सकती है, पेनल्टी भरनी पड़ सकती है और यहां तक कि इंश्योरेंस पॉलिसी भी लैप्स हो सकती है। इसलिए अकाउंट बंद करने से पहले सभी ऑटो-डेबिट और ECS आदेश को नए बैंक अकाउंट में अपडेट करना बेहद जरूरी है, ताकि आगे कोई वित्तीय परेशानी न हो।

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5. क्या लगेगी अकाउंट क्लोजर फीस?

कई लोगों को यह पता ही नहीं होता कि कुछ बैंक अकाउंट बंद करते समय भी अलग से फीस वसूलते हैं। आमतौर पर सेविंग अकाउंट एक साल पूरा होने के बाद बिना किसी शुल्क के बंद हो जाते हैं, लेकिन यदि आप पहले 6–12 महीनों के भीतर अकाउंट बंद करवाते हैं तो बैंक क्लोजर फीस लगा सकता है। वहीं सैलरी अकाउंट में आमतौर पर कोई क्लोजर चार्ज नहीं लिया जाता। दूसरी ओर, करंट अकाउंट में अक्सर अकाउंट बंद करने पर निश्चित शुल्क लागू होता है। इसलिए अपना अकाउंट बंद कराने से पहले यह अच्छी तरह जांच लें कि आपके अकाउंट टाइप के अनुसार बैंक कौन-कौन से चार्ज ले सकता है।

6. छोटी तैयारी, बड़ी बचत

अकाउंट बंद करने से पहले कुछ छोटे लेकिन जरूरी काम आपको बड़ी परेशानियों से बचा सकते हैं। सबसे पहले अपना बैंक स्टेटमेंट अच्छी तरह जांच लें, ताकि कोई पेनल्टी, सर्विस चार्ज या बाकी कटौती नजरअंदाज न हो जाए। इसके बाद सभी बकाया फीस या चार्ज तुरंत क्लियर कर दें, ताकि अकाउंट क्लोजर के समय कोई अतिरिक्त रकम न देनी पड़े। साथ ही, अगर आपके पुराने अकाउंट से EMI, SIP, इंश्योरेंस प्रीमियम या बिल भुगतान ऑटो-डेबिट में जुड़े हैं, तो उन्हें नए अकाउंट में अपडेट कर लें। इन तीनों कामों को पूरा करने के बाद आपका अकाउंट बिना किसी रुकावट, अतिरिक्त चार्ज या झंझट के आसानी से बंद हो जाएगा।

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रिचा त्रिपाठी
रिचा त्रिपाठी Author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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