सोने की कीमत में इस साल अभी तक बड़ी गिरावट आ चुकी है। सोना अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 20 प्रतिशत टूट गया है। वह भी तब जब ईरान संकट जारी है। यह पहली बार हुआ है कि युद्ध के बीच सोने की कीमत में कमी आई है। आखिर, ऐसा क्यों हुआ है? अमूमन युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के बीच सोने की कीमत में तेजी रहती थी लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है? इसकी वजह कई है लेकिन जो सबसे बड़ी वजह है वह दुनिया के सेंट्रल बैंक द्वारा सोने की बिकवाली है। हाल के दिनों में तुर्की और रूस के सेंट्रल बैंकों द्वारा सोने की कीमत में बड़ी बिकवाली की गई है, जिससे सोने की कीमत गिरी है। क्या यह ट्रेंड दुनिया के और बैंक अपना सकते हैं? अगर ऐसा हुआ तो सोने की कीमत और गिरेगी? ऐसे कई सवाल के जवाब आईए आपको देते हैं।
सोने बेचने की नौबत क्यों आई?
दुनिया तनाव में है और मध्य-पूर्व में तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे। इसके चलते दो बड़े देशों ने अपने सोने के भंडार का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की ने फरवरी में 8 टन और रूस ने 6 टन सोना बेचा है। तुर्की ने अपने भंडार से लगभग 58 टन सोने की बिक्री की है। तुर्की की व्यापक आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। तुर्की में महंगाई आसमान छू रही है — 2022 में यह अपने उच्चतम स्तर लगभग 85% से नीचे आई है, लेकिन अभी भी यह लगभग 30% पर बनी हुई है, और ब्याज दरें लगभग 37% के आसपास हैं।
विदेशी रिजर्व कम होने के कारण, सोने का इस्तेमाल करना ही तुर्की के पास अब एकमात्र विकल्प बचा है। तुर्की के अलावा रूस के सेंट्रल बैंक ने भी सोना बेचा है। इसके अलावा दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों द्वारा सोने की खरीद में साफ तौर पर कमी आई है। 2025 में, मासिक औसत 26 टन था। वहीं 2026 में मासिक औसत घटकर 12.5 टन रह गया है। वहीं, जनवरी 2026 में सोना अपने ऑल-टाइम हाई ($5,596) पर था। इतने ऊंचे दाम देखने के बाद बड़े निवेशकों ने अपना मुनाफा निकालने के लिए सोना बेचना शुरू कर दिया है, जिससे कीमतों में 20% की गिरावट दर्ज की गई है।
क्या सोने की कीमत में और बड़ी गिरावट आएगी?
सर्राफा सेक्टर के जानकारों का कहना है कि अभी ईरान युद्ध जारी है, जिसके चलते तेल की बढ़ती कीमतें, डॉलर को मजबूती दे रहा हैं। यह सोने की कीमत पर दबाब बनाने का काम कर रही है। इससे सोने की कीमत गिर रही है, लेकिन संघर्ष खत्म होने के बाद ही स्थिति ज्यादा साफ हो पाएगी। आने वाले महीनों में क्या बदलाव होंगे, यह तो देखना बाकी है, लेकिन डॉलर पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यह संभवतः सोने की अगली चाल का संकेत देगा। वहीं, कुछ जानकारों का कहना है कि ईरान संकट के कारण दुनिया में महंगाई बढ़ेगी। इसको रोकने के लिए दुनियाभर के सेंट्रल बैंक ब्याज दर बढ़ाएंगे। इसके चलते सोने की कीमत में और गिरावट आएगी।
