आज के समय में कई भारतीय परिवारों के बच्चे पढ़ाई, नौकरी या बेहतर भविष्य के लिए विदेश में बस जाते हैं। कई लोग तो भारत की नागरिकता छोड़कर दूसरे देश की नागरिकता भी ले लेते हैं। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि अगर बेटी विदेशी नागरिक बन गई है, तो क्या उसे भारत में अपने पिता की संपत्ति में हिस्सा मिलेगा? क्या NRI या विदेशी नागरिक होने के कारण बेटी का विरासत का अधिकार खत्म हो जाता है? इसका जवाब है- नहीं। केवल विदेश में रहने या विदेशी नागरिकता लेने से बेटी का संपत्ति पर कानूनी अधिकार खत्म नहीं होता।
पिता की संपत्ति में बेटी को कितना अधिकार मिलता है?
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के तहत बेटी को पिता की संपत्ति में कानूनी अधिकार दिया गया है। अगर पिता की मृत्यु बिना वसीयत बनाए हो जाती है, तो उनकी संपत्ति का बंटवारा कानून के अनुसार होता है। इस स्थिति में बेटी को प्रथम श्रेणी का कानूनी वारिस यानी Class-I Heir माना जाता है। इसका मतलब है कि बेटी को बेटे के बराबर हिस्सा मिल सकता है। बेटी भारत में रह रही हो, विदेश में नौकरी कर रही हो या उसने किसी दूसरे देश की नागरिकता ले ली हो, केवल इस आधार पर उसका विरासत का अधिकार खत्म नहीं होता।
हालांकि, अगर पिता ने अपनी संपत्ति के लिए वैध वसीयत बनाई है, तो संपत्ति का बंटवारा वसीयत में लिखी शर्तों के अनुसार होगा। इसलिए बिना वसीयत और वसीयत के आधार पर संपत्ति मिलने के नियम अलग-अलग हो सकते हैं।
पैतृक संपत्ति में भी बेटियों को बराबर हक
बेटियों के अधिकारों को लेकर साल 2005 में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में बड़ा बदलाव किया गया था। इस संशोधन के बाद बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार मिला। यानी बेटी को परिवार की पैतृक संपत्ति में जन्म से सहदायिक अधिकार मिलता है। यह अधिकार केवल इसलिए खत्म नहीं होता कि बेटी शादी के बाद विदेश चली गई है या उसने विदेशी नागरिकता अपना ली है।
क्या विदेशी नागरिक बेटी खेती की जमीन विरासत में ले सकती है?
खेती की जमीन के मामले में नियम थोड़े अलग हैं। फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत NRI और OCI कार्डधारक आमतौर पर भारत में कृषि भूमि, फार्महाउस या प्लांटेशन प्रॉपर्टी खरीद नहीं सकते। लेकिन जमीन खरीदने और विरासत में मिलने के नियम अलग हैं। FEMA के प्रावधानों के तहत भारत में रहने वाले व्यक्ति से कृषि भूमि समेत अचल संपत्ति विरासत में हासिल की जा सकती है।
हालांकि, कृषि भूमि पर संबंधित राज्य के कानून भी लागू होते हैं। कुछ राज्यों में जमीन के उत्तराधिकार और बंटवारे को लेकर विशेष नियम हैं। इसलिए किसी भी मामले में संपत्ति के दस्तावेज, उत्तराधिकार कानून और राज्य के नियमों की जांच करना जरूरी है।
