भारत के सबसे चर्चित स्टार्टअप्स में शुमार एडटेक दिग्गज बायजू (Byju’s) के फाउंडर बायजू रवींद्रन (Byju Raveendran) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अर्श से फर्श पर आ चुकी भारत की सबसे बड़ी यूनिकॉर्न कंपनी Byju's को हाल ही में सिंगापुर की अदालत से एक बहुत बड़ा झटका लगा है, जहां कोर्ट ने उन्हें 6 महीने की जेल की सजा सुनाई है। अदालत के मुताबिक, रवींद्रन ने अप्रैल 2024 से अपनी निजी और कंपनी की संपत्ति से जुड़े कई न्यायिक आदेशों का बार-बार और लगातार उल्लंघन किया है, जिसके कारण उन्हें कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) का दोषी पाते हुए यह कड़ी सजा दी गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा मामला एक कानूनी विवाद और संपत्तियों के खुलासे से जुड़ा हुआ है। सिंगापुर की अदालत ने बायजू रवींद्रन को 'बीयर इन्वेस्टको प्राइवेट लिमिटेड' (Byju's संबंधित एक एंटिटी जो शेयर्स होल्ड करती है) के कानूनी मालिकाना हक को साबित करने वाले सभी जरूरी दस्तावेज तुरंत पेश करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, अदालत ने उन्हें कानून के सामने सरेंडर करने का भी हुक्म जारी किया है। जेल की सजा के अलावा, अदालत ने रवींद्रन पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया है, जिसके तहत उन्हें 90,000 सिंगापुर डॉलर (यानी करीब 70,500 अमेरिकी डॉलर) की कानूनी लागत का भुगतान करना होगा। ऐसे में आइए आपको बताते हैं बायजूस के पतन की कहानी।
कैसे अर्श से फर्श पर आ गया Byjus
कभी सफलता के सातवें आसमान पर चमकने वाला भारत का सबसे बड़ा एडटेक (EdTech) साम्राज्य आज पूरी तरह मिट्टी में मिल चुका है। एक दौर था जब देश के कोने-कोने में 'बायजू' का नाम गूंजता था, दुनिया के बड़े से बड़े निवेशक इस कंपनी में पैसा लगाने के लिए कतार में खड़े रहते थे और भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पर इस ब्रांड का लोगो शान से चमकता था। लेकिन समय का पहिया ऐसा घूमा कि कभी 22 अरब डॉलर (करीब 22 लाख करोड़ रुपये) के विशाल वैल्यूएशन वाली यह कंपनी आज 'जीरो' यानी शून्य पर आ खड़ी हुई है। हद तो तब हो गई जब इसके फाउंडर बायजू रवींद्रन को कोर्ट की अवमानना के मामले में सिंगापुर में 6 महीने जेल की सजा सुना दी गई। एक सफल शिक्षक से अरबपति कारोबारी और फिर जेल की सलाखों तक का यह सफर कड़े सबक सिखाता है कि कैसे अति-महत्वाकांक्षा और गलत फैसले एक हंसते-खेलते कॉर्पोरेट साम्राज्य को तबाह कर सकते हैं।
रविंद्रन बायजू की 5 बड़ी गलतियां
सबसे बड़ी गलती
बायजू के इस महा-पतन की कहानी को समझने के लिए हमें उसकी उन 5 बड़ी गलतियों को देखना होगा, जो इसके विनाश का कारण बनीं। पहली और सबसे बड़ी गलती थी बिना सोचे-समझे किया गया अंधाधुंध और आक्रामक विस्तार। कोरोना महामारी (Covid-19) के दौरान जब पूरी दुनिया में लॉकडाउन लगा था, तब ऑनलाइन पढ़ाई का क्रेज चरम पर था। बायजू ने इसे एक परमानेंट ट्रेंड मान लिया और अंधाधुंध कमाई के लालच में विदेशी और घरेलू कंपनियों को पानी की तरह पैसा बहाकर खरीदना शुरू कर दिया। उन्होंने व्हाइटहैट जूनियर (WhiteHat Jr) और आकाश एजुकेशनल सर्विसेज (Aakash) जैसी कंपनियों को खरीदने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए। महामारी खत्म होते ही जब बच्चे वापस स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में लौटने लगे, तो बायजू का यह दांव पूरी तरह उल्टा पड़ गया और कंपनी भारी कर्ज के दलदल में धंस गई।
खराब गवर्नेंस
दूसरी सबसे बड़ी गलती थी कॉर्पोरेट गवर्नेंस का पूरी तरह अभाव और वित्तीय रिकॉर्ड्स में हेराफेरी। जैसे-जैसे कंपनी बड़ी हुई, बायजू रवींद्रन और उनके प्रबंधन ने पारदर्शिता को ताक पर रख दिया। कंपनी ने सालों तक अपनी वित्तीय रिपोर्ट (Financial Audit) समय पर जारी नहीं की। जब ऑडिट रिपोर्ट सामने आई, तो भारी नुकसान और खर्चों का ऐसा लेखा-जोखा दिखा जिसने निवेशकों के होश उड़ा दिए। इसके साथ ही, कंपनी पर विदेशी फंडिंग नियमों के उल्लंघन (FEMA) और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगे, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इसके ठिकानों पर छापेमारी की। इस वित्तीय कुप्रबंधन के कारण बोर्ड के बड़े स्वतंत्र निदेशकों और डेलॉयट (Deloitte) जैसे नामी ऑडिटर ने कंपनी का साथ छोड़ दिया, जिससे बाजार में बायजू की साख पूरी तरह खत्म हो गई।

Byjus Downfall
मार्केटिंग और ग्राहक
तीसरी बड़ी गलती थी बेहद आक्रामक मार्केटिंग और सेल्स की गलत नीतियां। बायजू ने बाजार पर कब्जा करने के लिए विज्ञापनों और ब्रांडिंग पर पानी की तरह पैसा बहाया। उन्होंने फीफा वर्ल्ड कप को स्पॉन्सर किया और सुपरस्टार शाहरुख खान से लेकर लियोनेल मेसी तक को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया। लेकिन दूसरी तरफ, जमीनी हकीकत यह थी कि उनके सेल्स एग्जीक्यूटिव्स पर कोर्सेस बेचने का भारी दबाव था। आरोप लगे कि कंपनी के कर्मचारियों ने गरीब और मध्यमवर्गीय माता-पिता को डराकर और गुमराह करके महंगे-महंगे कोर्सेस और लोन जाल में फंसाया। जब पेरेंट्स ने रिफंड की मांग की, तो उन्हें प्रताड़ित किया गया। सोशल मीडिया पर कंपनी की इस बदनामी ने इसकी रीढ़ तोड़ दी और नए ग्राहकों ने बायजू से दूरी बना ली।
निवेशकों से विवाद और लीगल बैटल
चौथी गलती थी अपने ही निवेशकों (Investors) के साथ टकराव मोल लेना और लगातार कानूनी लड़ाइयों में उलझना। जब कंपनी संकट में आई, तो बोर्ड के निवेशकों ने बायजू रवींद्रन की कार्यशैली पर सवाल उठाए और उन्हें सीईओ पद से हटाने की मांग की। लेकिन रवींद्रन ने अपनी गलती मानने के बजाय निवेशकों से सीधा मोर्चा ले लिया। कर्जदाताओं (Lenders) के 1.2 अरब डॉलर के टर्म लोन को चुकाने में डिफॉल्ट करने के बाद अमेरिकी अदालतों में मुकदमेबाजी शुरू हो गई। हाल ही में फंड ट्रांसफर को लेकर सिंगापुर की अदालत में चल रहे एक मामले में जब बायजू रवींद्रन ने कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया, तो उन्हें कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) का दोषी पाते हुए 6 महीने की जेल की सजा सुना दी गई। इस लीगल बैटल ने बची-कुची उम्मीदों को भी दफन कर दिया।
छंटनी, इस्तीफे और टाउनहॉल
पांचवीं और आखिरी गलती थी अपने वर्कफोर्स यानी कर्मचारियों की अनदेखी करना। संकट गहराते ही कंपनी ने हजारों कर्मचारियों को बिना किसी नोटिस के नौकरी से निकाल दिया। जो बचे, उनकी सैलरी महीनों तक रोकी गई और उनके पीएफ (PF) के पैसे तक जमा नहीं किए गए। बायजू रवींद्रन लगातार अपने कर्मचारियों को भावुक ईमेल भेजकर 'मजबूत वापसी' का भरोसा देते रहे, लेकिन उनके कथनी और करनी के इस अंतर ने कंपनी के अंदरूनी भरोसे को पूरी तरह खत्म कर दिया। आज स्थिति यह है कि देश के सबसे गौरवशाली स्टार्टअप का तमगा रखने वाला बायजू, इतिहास के सबसे बड़े कॉर्पोरेट फेल्योर (Failure) के रूप में याद किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी इसके मैनेजमेंट और संस्थापक की गलतियों पर जाती है।
