Budget 2025 Expectations: होम लोन सेक्टर में कई तरह के सुधारों की जरुरत है। ऐसे में आगामी बजट 2025-26 गेमचेंजर साबित हो सकता है, अगर सरकार होम लोन लेने वालों को ध्यान में रखते हुए बजट का ऐलान करें। उद्योग जगत के विशेषज्ञ बजट से कुछ सुझावों की उम्मीद रखते हैं, जिनका डिटेल इस लेख में दिया गया है। पिछले साल के दौरान आर्थिक और राजनैतिक उथल-पुथल के बीच इस सेक्टर में उतार-चढ़ाव बने रहे- ऐसे में आगामी बजट इस सेक्टर में सुधार ला सकता है। नए साल की शुरूआत के साथ रियल एस्टेट सेक्टर को बजट से ढेरों उम्मीदें हैं। खासतौर पर होम लोन सेक्टर में ब्याज़ दर, टैक्स ब्रेकेट, साइबरसिक्योरिटी को लेकर कई तरह की उम्मीदें की जा रही हैं।
होम लोन में टैक्स के फायदे बढ़ाए जाएं
होम लोन के ब्याज़ पर कर में छूट को आयकर की धारा 24 बी के तहत रु 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख किया जाना चाहिए। इसके अलावा धारा 80 सी के तहत प्रिंसिपल रीपेमेंट पर कटौती को भी रु 1.5 लाख से बढ़ाकर रु 2.5 लाख कर देना चाहिए। इससे घर के खरीददारों को राहत मिलेगा और होम लोन ज्यादा किफायती हो जाएगा। ऐसा करने से रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और अधिक से अधिक लोग घर खरीदना चाहेंगे।
नए रीजीम के तहत टैक्स के फायदे बढ़ाए जाएं
पुराने टैक्स रीजीम के विपरीत नए रिजीम में करदाता (अपने कब्ज़े की प्रॉपर्टी के लिए) होम लोन के ब्याज पर रु 2 लाख तक की कटौती के लिए क्लेम नहीं कर सकता। हालांकि नए रीजीम में कई तरह की छूट दी गई है, (खासतौर पर किराए की प्रॉपर्टी के लिए), लेकिन इसमें कई सीमाएं भी हैं। अगर होम लोन पर ब्याज रेंटल इंकम से ज्यादा हो जाता है तो अतिरिक्त राशि को अन्य स्रोतों से आने वाले इंकम से एडजस्ट नहीं किया जा सकता। इसका सबसे ज़्यादा असर मध्यम वर्ग के आयकरदाता पर पड़ता है, खासतौर पर उन लोगों पर जो प्रॉपर्टी खरीदने के लिए होम लोन लेते हैं। ऐसे में नए टैक्स रीजीम के तहत होम लोन के ब्याज़ में रु 2 लाख तक कटौती की अनुमति दी जानी चाहिए।
टैक्स के फायदों को एक ही धारा में शामिल किया जाए
कर संबंधी कानूनों और कर से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए, होम लोन के ब्याज़, प्रिंसिपल रीपेंमेंट को एक ही सेक्शन में डालना चाहिए। खासतौर पर होम लोन के मामले में ऐसा करना जरुरी है।
क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना वापस लाई जाए
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना को वापस लाने से ईडब्ल्यूएस, एलआईजी और एमआईजी के लिए हाउसिंग सेक्टर ज़्यादा अफॉर्डेबल हो जाएगा। मौजूदा स्थितियों को देखते हुए ऐसा करने से घर खरीदने वालों पर आर्थिक बोझ कम होगा। इससे हाउसिंग सेक्टर में मांग बढ़ेगी, साथ ही कन्स्ट्रक्शन एक्टिविटी बढ़ने से रोज़गार के अवसर भी बढेंगे। इसके अलावा सीएलएसएस आवास पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए ऐप्लीकेशन और सब्सिडी वितरण को आसान बनाने से घर खरीदने वालों का लाभ होगा। ऐसा करने से सभी के लिए आवास के सपने को साकार किया जा सकेगा और शहरों के विकास और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
अफॉर्डेबल हाउसिंग की मांग बढ़ाने पर ध्यान दिया जाए
अफॉर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर जीएसटी को मौजूदा 1 फीसदी से कम कर 0.5 फीसदी करना चाहिए, इससे खरीददारों के लिए कुल लागत कम हो जाएगी। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन पर स्टाम्प ड्यूटी कम करने से भी मांग बढ़ेगी। साथ ही अफॉर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के अनुमोदन को आसान बनाना चाहिए डेवलपर्स को सब्सिडी और कर में छूट दी जानी चाहिए, ऐसा करने से सेगमेन्ट में सप्लाई बढ़ेगी। इन सब उपायों से न सिर्फ रियल एस्टेट सेक्टर को गति मिलेगी बल्कि सरकार के मिशन ‘सभी के लिए आवास’ को भी साकार किया जा सकेगा।
मध्यम वर्ग के घर के खरीददारों के लिए ब्याज में सब्सिडी
मध्यम वर्ग के लिए ब्याज़ में सब्सिडी रिहायशी रियल एस्टेट सेक्टर के लिए गेमचेंजर हो सकती है, इससे घर खरीदना ज़्यादा अफॉर्डेबल हो जाएगा और हाउसिंग की मांग बढ़ेगी। वर्तमान में यह सब्सिडी ज़्यादातर ईडब्ल्यूएस और एलआईजी तक ही सीमित है, लेकिन एमआईजी पर अभी भी उंचे ब्याज़ का बोझ है, जिसके चलते मध्यम वर्ग को प्रॉपर्टी की ज़्यादा कीमत चुकानी पड़ती है। मध्यम वर्ग को ब्याज़ में सब्सिडी देने से प्रॉपर्टी की लागत कम हो जाएगी और उनकी खरीद क्षमता बढ़ेगी। उदाहरण के लिए सीएलएसएस के तहत एमआईजी खरीददार को होम लोन पर रु 2.35 लाख तक की सब्सिडी मिलती है, जिससे उनके लिए घर खरीदना अधिक आसान हो जाता है।
ऐसा करने से मांग बढ़ेगी ओर डेवलपर्स भी अफॉर्डेबल एवं मिड-सेगमेन्ट हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर ज़्यादा ध्यान देंगे। जिससे मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर दूर होगा। साथ ही सेल्स बढ़ने से बिना बिकी इन्वेंटरी इकट्ठा नहीं होगी। जो सेक्टर की बड़ी चुनौती रही है। कन्स्ट्रक्शन एक्टिविटी बढ़ने से इस सेक्टर में रोज़गार के अवसर उत्पन्न होंगे और जीडीपी के विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सरकार के मिशन के अनुसार ‘सभी के लिए आवास’ के सपने को साकार करने में मदद मिलेगी।
ग्रीन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया जाए
ग्रीन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में कर में छूट, सब्सिडी देकर हरित निर्माण प्रथाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इससे कार्बन फुटप्रिन्ट को कम करने और पर्यावरण संरक्षण की समस्या को हल करनेमें योगदान दिया जा सकेगा। इसके अलावा घर के खरीददारों के लिए अफॉर्डेबल एवं ग्रीन हाउसिंग के विकल्प उपलब्ध होंगे और लम्बी अवधि में उनकी लागत बचेगी एवं जीवन की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
(बेसिक होम लोन के सीईओ एवं सह-संस्थापक अतुल मोंगा ने यह आर्टिकल लिखी है, यह सिर्फ जानकारी के लिए है।)
