बजट 2026

Budget 2025: शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों को मिलेगी खुशखबरी? जानें बजट 2025 से क्या उम्मीदें

Demand to remove STT: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से एसटीटी को हटाने की मांग, जानिए एसटीटी टैक्स क्या है और क्यों निवेशक इस पर जोर दे रहे हैं।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

Photo : Times Now Digital

Demand to remove STT: भारत में 1 फरवरी 2025 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी सरकार 3.0 का दूसरा बजट पेश करने जा रही हैं। इस बजट से भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों को कई उम्मीदें हैं, खासकर एसटीटी (Securities Transaction Tax) को खत्म करने के लिए। इस मुद्दे पर लगातार चर्चा हो रही है और पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने वित्त मंत्री से एसटीटी को हटाने के लिए कदम उठाने की अपील की है।

एसटीटी (Securities Transaction Tax) क्या है?

एसटीटी एक ऐसा टैक्स है जो भारत में शेयर बाजार में होने वाले लेन-देन पर लगाया जाता है। इसका उद्देश्य शेयर बाजार के लेन-देन को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाना था। एसटीटी को साल 2004 में लागू किया गया था और यह टैक्स शेयर खरीदने और बेचने दोनों पर लगता है। इसके अलावा, डेरिवेटिव (Futures और Options) में लेन-देन पर भी एसटीटी की अलग-अलग दरें लगती हैं।

एसटीटी की दरें

शेयर पर डिलीवरी-आधारित ट्रेडिंग: 0.1% एसटीटी लगता है।

  • इंट्राडे ट्रेडिंग: बिक्री पर 0.025% एसटीटी लगता है।
  • डेरिवेटिव (Futures): 0.01% एसटीटी लगता है।
  • ऑप्शंस (सिर्फ बिक्री पर): 0.05% एसटीटी लगता है।

एसटीटी को हटाने की अंतर्राष्ट्रीय मांग

अमेरिका, सिंगापुर, और हांगकांग जैसे देशों में लेन-देन टैक्स या तो बहुत कम है या बिल्कुल नहीं है। यूरोपीय यूनियन के कुछ देशों में लेन-देन टैक्स तो है, लेकिन यह भारतीय एसटीटी से काफी कम है।

क्या एसटीटी हटाना संभव है?

कई निवेशक और ब्रोकरेज कंपनियां एसटीटी को पूरी तरह से हटाने की मांग कर रही हैं ताकि भारतीय शेयर बाजार वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और भी मजबूती से उभर सके। हालांकि, यदि एसटीटी हटाना संभव नहीं है, तो निवेशकों ने इसके दरों को कम करने की मांग की है, विशेष रूप से डेरिवेटिव और इंट्राडे ट्रेडिंग पर।

एसटीटी को हटाने या कम करने की मांग से भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों को राहत मिल सकती है। यदि वित्त मंत्री इस पर विचार करती हैं, तो इससे निवेशकों की व्यापार लागत कम हो सकती है और भारतीय शेयर बाजार की लिक्विडिटी में सुधार हो सकता है। एसटीटी को हटाने या कम करने से न केवल भारतीय निवेशकों को लाभ होगा, बल्कि यह भारतीय बाजार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बना सकता है।

Ashish Kushwaha
आशीष कुशवाहाauthor

<p>आशीष कुमार कुशवाहा Timesnowhindi.com में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। वह 2023 से Timesnowhindi.com के साथ जुड़े हैं। वह यहां शेयर बाजार, स्टॉक्स, IPO, पर्सनल फाइनेंस, बिजनेस न्यूज, कंपनी डेवलपमेंट, सक्सेस स्टोरी, यूटिलिटी, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और गैजेट से जुड़ी स्टोरी पर काम करते हैं। उनके पास पिछले 3 साल के भारतीय बजट को भी कवर करने का एक्सपीरियंस है। उनके पास ऑटो एक्सपो 2023 को कवर करने का अनुभव है। इसके अलावा ग्राउंड की स्टोरी और रिसर्च बेस्ड स्टोरी करने में विशेष रुचि रखते हैं। उनके पास डिजिटल मीडिया में कुल 3 साल से ज्यादा का एक्सपीरियंस है। इससे पहले इन्होंने वन इंडिया, दैनिक भास्कर डिजिटल में काम किया है। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वहीं ग्रेजुएशन की पढ़ाई रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से मास कम्यूनिकेशन में की है। उन्हें शुरू से ही डिबेट करने, सामाजिक मुद्दों पर बात करने और शेयर बाजार में रुचि थी। उन्हें बचपन से ही अखबार के संपादकीय पेज और न्यूज पढ़ने का सौख था। स्कूल के समय उन्होंने कई क्विज कंपटीशन में भी हिस्सा लिया और प्राइज जीते हैं।</p>

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