बजट 2026

Budget 2024: कंपनियों का बोझ घटाएगी सरकार, 1 लाख से कम सैलरी के कर्मचारी रखने पर मिलेंगे हर महीने 3000 रुपये

Budget 2024: सरकार 1 लाख से कम सैलरी वाले अतिरिक्त कर्मचारी रखने पर कंपनियों को ईपीएफओ में 3000 रुपये का अंशदान देगी। यानी कर्मचारी के पीएफ खाते में पैसा तो जमा होगा, लेकिन कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा। इस योजना के तहत 50 लाख अतिरिक्त रोजगार के अवसर मिलने की संभावना है।

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Budget 2024

Budget 2024: मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले बजट में युवाओं का खास ध्यान रखा गया है। युवाओं को रोजगार के अवसर देने के लिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में कई प्रावधान किए हैं। इनमें टॉप 500 कंपनियों में इंटर्नशिप, पहली नौकरी पर ईपीएफओ में 15000 रुपये से लेकर कई घोषणाएं शामिल हैं। हालांकि, नए रोजगार पैदा करने में प्राइवेट कंपनियों पर ज्यादा बोझ न पड़े, सरकार ने इसका भी ख्याल रखा है।

बजट में किए गए प्रावधान के मुताबिक, सरकार 1 लाख से कम सैलरी वाले अतिरिक्त कर्मचारी रखने पर कंपनियों को ईपीएफओ में 3000 रुपये का अंशदान देगी। यानी कर्मचारी के पीएफ खाते में पैसा तो जमा होगा, लेकिन कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा। इससे कंपनियां अतिरिक्त जॉब क्रिएट कर पाएंगी।

50 लाख अतिरिक्त रोजगार का टारगेट

बजट की घोषणा के मुताबिक, सभी क्षेत्रों में अतिरिक्त रोजगार को शामिल किया जाएगा। 1 लाख रुपये प्रतिमाह के वेतन से अंदर के सभी अतिरिक्त रोजगारों की गणना की जाएगी। सरकार, प्रत्येक अतिरिक्त कर्मचारी के संबंध में नियोक्ताओं के ईपीएफओ अंशदान के लिए उन्हें 2 वर्षों तक 3000 रुपये प्रतिमाह की प्रतिपूर्ति करेगी। इस योजना से 50 लाख व्यक्तियों को अतिरिक्त रोजगार प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

पहली नौकरी पर सरकार की तरफ से गिफ्ट

सरकार ने पहली बार नौकरी पाने वाले युवाओं को तोहफा देने की भी योजना बनाई है। इसके तहत संगठित क्षेत्र में पहली बार नौकरी की शुरुआत करने वालों को एक महीने का वेतन दिया जाएगा। यह वेतन तीन किस्तों में जारी होगा। इसकी अधिकतम राशि 15 हजार रुपये होगी। यानी ईपीएफओ में पहली बार पंजीकृत होने वाले युवाओं को सरकार की तरफ से तीन किश्तों में 15 हजार रुपये रिए जाएंगे। यह रुपये उन कर्मचारियों को मिलेंगे, जिनकी सैलरी 1 लाख रुपये से कम होगी। इससे 2.10 करोड़ युवाओं को फायदा होगा।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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