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Budget 2026: बही-खाता से ब्लू शीट, ये मजेदार बातें शायद आप नहीं जानते होंगे

क्या आप जानते हैं कि बजट की सबसे बड़ी शक्ति एक 'नीली शीट' (Blue Sheet) में छिपी होती है जिसे वित्त मंत्री भी मंत्रालय से बाहर नहीं ले जा सकतीं? या फिर वह 'हलवा सेरेमनी' जो बजट की छपाई से पहले अधिकारियों को दुनिया से पूरी तरह काट देती है? औपनिवेशिक ब्रीफकेस की जगह 'बही-खाता' के आने से लेकर शाम 5 बजे की बजाय सुबह 11 बजे बजट पेश होने तक, भारतीय बजट के इतिहास में ऐसे कई रोचक मोड़ हैं जो इसे किसी रोमांचक कहानी जैसा बनाते हैं आइए जानते हैं उनके बारे में।

Budget 2026

Budget 2026

भारत में हर साल पेश होने वाला केंद्रीय बजट सिर्फ आंकड़ों और घोषणाओं का दस्तावेज नहीं है, बल्कि इसके साथ दशकों पुरानी परंपराएं और गहरी गोपनीयता जुड़ी होती है। वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश होने की तैयारी के बीच, इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े कुछ ऐसे रोचक तथ्य हैं जिनके बारे में आम जनता को कम ही पता होता है। 'बही-खाता' की वापसी से लेकर उस रहस्यमयी 'ब्लू शीट' तक, आइए जानते हैं बजट से जुड़ी कुछ मजेदार और अनसुनी बातें।

1. ब्रीफकेस से 'बही-खाता' और फिर डिजिटल इंडिया

बजट के इतिहास में सबसे बड़ा बदलाव इसके 'स्वरूप' में आया है। सालों तक हमने वित्त मंत्रियों को ब्रिटिश परंपरा के अनुसार लेदर का ब्रीफकेस ले जाते देखा था। लेकिन साल 2019 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस परंपरा को तोड़ते हुए लाल कपड़े में लिपटा हुआ 'बही-खाता' पेश किया, जिसे भारतीय संस्कृति का प्रतीक माना गया। अब बजट पूरी तरह डिजिटल हो चुका है और वित्त मंत्री 'मेड इन इंडिया' टैबलेट के जरिए बजट भाषण पढ़ती हैं, जो बदलते और आधुनिक होते भारत की तस्वीर पेश करता है।

2. सबसे गोपनीय दस्तावेज है 'ब्लू शीट'?

बजट की तैयारी के दौरान सबसे महत्वपूर्ण और गोपनीय कोई चीज होती है, तो वह है 'ब्लू शीट'। यह बजट की रीढ़ मानी जाती है। नीले रंग की इस शीट में बजट के सबसे अहम आंकड़े और गणनाएं होती हैं। इसकी गोपनीयता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह शीट किसी भी अधिकारी को अपने साथ घर ले जाने की अनुमति नहीं होती। बजट निर्माण की पूरी प्रक्रिया के दौरान इस शीट की सुरक्षा किसी कीमती खजाने की तरह की जाती है ताकि कोई भी जानकारी लीक न हो सके।

3. हलवा सेरेमनी और 'कैद' हो जाते हैं अधिकारी

बजट छपने से पहले वित्त मंत्रालय में 'हलवा सेरेमनी' का आयोजन किया जाता है। वित्त मंत्री खुद अपने हाथों से अधिकारियों को हलवा परोसते हैं। इसके तुरंत बाद, बजट से जुड़े करीब 100 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में स्थित प्रिंटिंग प्रेस में चले जाते हैं। यहां से शुरू होता है 'लॉक-इन' पीरियड। बजट पेश होने तक ये अधिकारी बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाते हैं। वे न तो अपने परिवार से बात कर सकते हैं और न ही बाहर जा सकते हैं। यहां तक कि मंत्रालय की सुरक्षा के लिए तैनात इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के जवान भी उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखते हैं।

4. शाम 5 बजे से सुबह 11 बजे तक का सफर

आजादी के बाद कई दशकों तक भारत में बजट शाम को 5 बजे पेश किया जाता था। यह भी एक ब्रिटिश परंपरा थी क्योंकि जब भारत में शाम के 5 बजते थे, तब ब्रिटेन की संसद में दोपहर होती थी। इस औपनिवेशिक परंपरा को साल 1999 में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बदला और बजट पेश करने का समय सुबह 11 बजे कर दिया गया। तब से अब तक यह सुबह ही पेश किया जाता है ताकि बाजार और आम जनता को इस पर चर्चा करने का पर्याप्त समय मिल सके।

5. रेल बजट का विलय और तारीखों का बदलाव

पहले भारत में रेल बजट और आम बजट अलग-अलग पेश होते थे, लेकिन साल 2017 में 92 साल पुरानी इस परंपरा को खत्म कर दोनों का विलय कर दिया गया। इसके अलावा, पहले बजट फरवरी की आखिरी तारीख को पेश होता था, जिसे बदलकर अब 1 फरवरी कर दिया गया है। इससे सरकार को नए वित्त वर्ष की शुरुआत (1 अप्रैल) से पहले सभी विधायी कार्यों को पूरा करने का अतिरिक्त समय मिल जाता है।

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रिचा त्रिपाठी
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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