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बोर्डरूम से लीक 'सीक्रेट', तबाह निवेशक! क्या है 'Insider Trading', जिससे अरबपति भी पहुंचे जेल

शेयर बाजार में इनसाइडर ट्रेडिंग ऐसा गुनाह, जिसके चलते कई बार अरबपतियों को भी जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा है। आखिर यह क्या है और कैसे आम निवेशकों के लिए सबसे बड़ा खतरा है?

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इनसाइडर ट्रेडिंग बड़ा अपराध

Insider Trading : शेयर बाजार में मुनाफे की अंधी दौड़ के बीच कई बार ऐसा खेल खेला जाता है, जिसमें कुछ चुनिंदा लोग करोड़ों रुपये कमाते हैं, जबकि आम निवेशकों को इसकी भनक तक नहीं लगती। कल्पना कीजिए कि किसी बड़ी कंपनी के विलय, बोनस, बड़े ऑर्डर, शानदार नतीजों या किसी अन्य अहम फैसले की जानकारी आधिकारिक घोषणा से पहले कुछ लोगों तक पहुंच जाए और वे उसी आधार पर शेयर खरीद या बेच दें। यही खेल इनसाइडर ट्रेडिंग कहलाता है।

क्यों माना जाता है अपराध?

यह शेयर बाजार के सबसे गंभीर वित्तीय अपराधों में से एक है, क्योंकि इससे बाजार में समान अवसर (Fair Play) का सिद्धांत खत्म हो जाता है और आम निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता है। सरल भाषा में कहें तो यह परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने जैसा मामला है। यदि किसी व्यक्ति को कंपनी की ऐसी गोपनीय जानकारी मिल जाती है जो अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है और वह उसी जानकारी के आधार पर शेयरों की खरीद-फरोख्त करता है, तो इसे इनसाइडर ट्रेडिंग माना जाता है।

क्या हैं सेबी के नियम?

सेबी के नियमों के मुताबिक ऐसी गोपनीय जानकारी को Unpublished Price Sensitive Information (UPSI) कहा जाता है। इसमें कंपनी के वित्तीय नतीजे, विलय-अधिग्रहण, बड़े ऑर्डर, बोनस, डिविडेंड, प्रबंधन में बदलाव, नए उत्पाद या किसी अन्य ऐसी जानकारी को शामिल किया जाता है जिससे शेयर की कीमत पर बड़ा असर पड़ सकता है।

कौन होता है 'इनसाइडर'?

इनसाइडर केवल कंपनी का मालिक या निदेशक ही नहीं होता। ऐसे कई लोग इस दायरे में आते हैं। सबसे पहले कंपनी के प्रमोटर, निदेशक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी, जिन्हें कंपनी के अहम फैसलों की पहले से जानकारी होती है। दूसरे, कंपनी से जुड़े ऑडिटर, वकील, निवेश सलाहकार, मर्चेंट बैंकर और अन्य पेशेवर, जो अपने काम के दौरान गोपनीय जानकारी तक पहुंच रखते हैं। तीसरे, ऐसे रिश्तेदार, दोस्त या अन्य लोग, जिन्हें किसी इनसाइडर द्वारा यह जानकारी दी जाती है और जो उसी के आधार पर शेयर बाजार में कारोबार करते हैं। इन्हें अक्सर 'टिप्पी' (Tippee) कहा जाता है।

सेबी कितनी सख्ती से करता है कार्रवाई?

भारत में इनसाइडर ट्रेडिंग पर रोक लगाने की जिम्मेदारी सेबी (SEBI) की है। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ इनसाइडर ट्रेडिंग के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। सेबी अवैध कमाई वापस लेने के साथ-साथ भारी आर्थिक जुर्माना लगा सकता है। गंभीर मामलों में दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल की सजा भी हो सकती है। इसके अलावा संबंधित व्यक्ति को शेयर बाजार में कारोबार करने, किसी सूचीबद्ध कंपनी के बोर्ड में शामिल होने या अन्य बाजार गतिविधियों से भी प्रतिबंधित किया जा सकता है।

दुनिया और भारत के चर्चित इनसाइडर ट्रेडिंग मामले

मामलाक्या हुआ था?कार्रवाई / नतीजा
राज राजरत्नम (Galleon Group, अमेरिका)कंपनियों की गोपनीय जानकारी लेकर करोड़ों डॉलर की अवैध ट्रेडिंग की।11 साल जेल और 92 मिलियन डॉलर से अधिक का जुर्माना।
रजत गुप्ता (Goldman Sachs, अमेरिका)गोल्डमैन सैक्स बोर्ड की गोपनीय जानकारी राज राजरत्नम को देने का दोषी पाए गए।2 साल जेल, जुर्माना और निगरानी अवधि।
मार्था स्टीवर्ट (ImClone, अमेरिका)इनसाइडर ट्रेडिंग जांच से जुड़े मामले में जांच एजेंसियों से झूठ बोलने और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने का दोषी पाया गया।5 महीने जेल, जुर्माना और निगरानी।
Hindustan Lever–Brook Bond Lipton (भारत)विलय की घोषणा से पहले शेयर खरीदने के आरोप में सेबी की कार्रवाई हुई।भारतीय इनसाइडर ट्रेडिंग कानून का शुरुआती और ऐतिहासिक मामला बना।
राकेश अग्रवाल (ABS Industries, भारत)अधिग्रहण (Acquisition) से जुड़ी अप्रकाशित जानकारी के दौरान शेयर सौदे का आरोप।मामला SAT तक पहुंचा, फैसले ने भारतीय कानून की व्याख्या को प्रभावित किया।
WhatsApp Earnings Leak (भारत, 2017)कई कंपनियों के तिमाही नतीजे आधिकारिक घोषणा से पहले व्हाट्सऐप पर लीक हुए।सेबी ने व्यापक जांच की, डिजिटल फॉरेंसिक और कई लोगों से पूछताछ हुई।
IndusInd Bank पूर्व अधिकारी (भारत, 2025-26)डेरिवेटिव घाटे की अप्रकाशित जानकारी सार्वजनिक होने से पहले शेयर बेचने के आरोप।सेबी ने अंतरिम आदेश जारी कर बाजार में कारोबार पर रोक समेत नियामकीय कार्रवाई की; मामला अभी आगे की प्रक्रिया में है।

भारत में इनसाइडर ट्रेडिंग के कई मामलों में सेबी आर्थिक दंड, बाजार से प्रतिबंध और अन्य नियामकीय कार्रवाई करती है। जेल की सजा केवल तभी संभव होती है जब संबंधित अदालत में आपराधिक कार्रवाई के बाद दोष सिद्ध हो जाए।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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