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Bikanervala Success Story : केदारनाथ अग्रवाल ने बीकानेर की भुजिया को कैसे बनाया इंटरनेशनल ब्रांड?

Bikanervala Success Story: केदारनाथ अग्रवाल ने 1950 के दशक में दिल्ली के ठेले से बीकानेर की भुजिया बेचना शुरू किया। अपनी बेहतरीन गुणवत्ता, 'बीकाणो' पैकेजिंग और दूरदर्शिता से उन्होंने 'बीकानेरवाला' को एक इंटरनेशनल ब्रांड बनाया।

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बीकानेर की गलियों से ग्लोबल किचन तक: कैसे केदारनाथ अग्रवाल ने 'बीकानेरवाला' को बनाया इंटरनेशनल ब्रांड (तस्वीर-X)

Bikanervala Success Story : भारत में जब भी शाम की चाय के साथ नमकीन का जिक्र होता है या त्योहारों पर मिठाइयों की बात आती है, तो सबसे पहला नाम जुबां पर 'बीकानेरवाला' का आता है। कभी राजस्थान के बीकानेर की तंग गलियों में एक छोटी सी दुकान से शुरू हुआ यह सफर आज दुनिया भर के देशों तक फैल चुका है। इस नमकीन और मिठाई के साम्राज्य को खड़ा करने के पीछे काकाजी यानी केदारनाथ अग्रवाल और उनके परिवार की अटूट मेहनत, दूरदर्शिता और स्वाद से कभी समझौता न करने की जिद थी। आइए जानते हैं बीकानेर की भुजिया के ग्लोबल ब्रांड बनने की दिलचस्प कहानी।

बीकानेर की तंग गलियों से शुरुआत

इस कहानी की शुरुआत राजस्थान के बीकानेर शहर से होती है। साल 1905 के आसपास अग्रवाल परिवार बीकानेर में एक छोटी सी दुकान चलाता था, जिसे 'लालजी' के नाम से जाना जाता था। यहां वे हाथ से बनी बीकानेरी भुजिया और पारंपरिक मिठाइयां बेचा करते थे। बीकानेर की भुजिया का स्वाद वहां के लोगों के दिलों में बसा हुआ था, लेकिन इस परिवार के सपने बीकानेर की सीमाओं तक सीमित नहीं थे। वे अपने इस अनोखे स्वाद को देश के कोने-कोने तक पहुंचाना चाहते थे।

खाली हाथ दिल्ली आगमन और पुरानी दिल्ली की चुनौतियां

देश की आजादी के कुछ समय बाद, 1950 के दशक में केदारनाथ अग्रवाल अपने भाई सत्यनारायण अग्रवाल के साथ एक बड़ा सपना लेकर दिल्ली आ गए। उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे, लेकिन हाथों में हुनर और दिल में कुछ बड़ा करने का जुनून था। दिल्ली आकर उन्होंने पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में ठेले पर भुजिया और रसगुल्ले बेचना शुरू किया। उस समय दिल्ली के लोगों के लिए बीकानेरी भुजिया का यह तीखा और चटपटा स्वाद एकदम नया था।

'बीकानेरवाला' नाम कैसे पड़ा?

चांदनी चौक की सड़कों पर ठेला लगाने वाले इन दोनों भाइयों के नमकीन का स्वाद धीरे-धीरे लोगों की जुबां पर चढ़ने लगा। लोग उन्हें पहचान के तौर पर 'बीकानेर वाले' कहकर बुलाने लगे। जब उनकी बिक्री बढ़ी और लोगों का प्यार मिलने लगा, तो दोनों भाइयों ने चांदनी चौक में ही एक छोटी सी दुकान किराए पर ले ली। उन्होंने अपनी दुकान का नाम वही रख लिया जो लोग उन्हें बुलाते थे 'बीकानेरवाला'। यही वह पल था जब एक छोटे से स्ट्रीट वेंडर ने एक औपचारिक ब्रांड का रूप लेना शुरू किया।

गुणवत्ता और स्वाद से कोई समझौता नहीं

केदारनाथ अग्रवाल का मानना था कि व्यापार में अगर टिके रहना है, तो गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। वे खुद हर सामग्री की जांच करते थे। बीकानेरी भुजिया बनाने के लिए बीकानेर से ही खास बेसन, मसाले और पानी का इस्तेमाल किया जाता था ताकि असली पारंपरिक स्वाद बरकरार रहे। शुद्ध देसी घी से बनी मिठाइयों और चटपटी नमकीन की वजह से बीकानेरवाला का नाम पूरे दिल्ली-एनसीआर में मशहूर हो गया।

'बीकाणो' का जन्म और पैकेजिग की क्रांति

जैसे-जैसे समय बदला, केदारनाथ अग्रवाल और उनके परिवार ने यह समझ लिया कि सिर्फ ताजा मिठाई बेचने से काम नहीं चलेगा, बल्कि नमकीन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक पैकेजिंग की जरुरत है। इसी सोच के साथ उन्होंने 'बीकाणो' (Bikano) ब्रांड की शुरुआत की। बीकाणो के तहत नमकीन और मिठाइयों को 'एयर-टाइट' और आकर्षक पैकेटों में बेचना शुरू किया गया। इस कदम ने बीकानेरवाला को केवल दुकानों तक सीमित न रखकर ग्रॉसरी स्टोर्स और सुपरमार्केट्स के शेल्फ तक पहुँचा दिया।

सात समंदर पार बीकानेर का स्वाद

जब बीकाणो की पैकेजिंग सफल रही, तो केदारनाथ अग्रवाल परिवार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की ओर रुख किया। विदेशों में रहने वाले भारतीयों (NRIs) को हमेशा अपने देश के खाने और स्वाद की याद सताती थी। बीकानेरवाला ने अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, यूएई (दुबई), ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में अपने आउटलेट्स और प्रोडक्ट्स का निर्यात करना शुरू किया। देखते ही देखते, बीकानेर की गलियों में बनने वाली भुजिया लंदन और न्यूयॉर्क के सुपरमार्केट्स की शान बन गई।

एक छोटी दुकान से अरबों का साम्राज्य

केदारनाथ अग्रवाल के मार्गदर्शन में बीकानेरवाला केवल एक नमकीन की दुकान नहीं रहा, बल्कि यह एक विशाल रेस्टोरेंट चेन और पैकेज्ड फूड जायंट बन गया। आज भारत और विदेशों में बीकानेरवाला के सैकड़ों भव्य रेस्टोरेंट्स और आउटलेट्स हैं। बीकाणो ब्रांड का टर्नओवर आज अरबों रुपये में है। ठेले से शुरू हुआ यह सफर आज भारतीय व्यापार जगत की सबसे सफल कहानियों में से एक गिना जाता है।

केदारनाथ अग्रवाल की विरासत और सीख

नवंबर 2023 में 86 वर्ष की आयु में केदारनाथ अग्रवाल का निधन हो गया, लेकिन वे अपने पीछे एक समृद्ध सांस्कृतिक और व्यावसायिक विरासत छोड़ गए हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि अगर आपके पास हुनर है, ईमानदारी है और कड़ी मेहनत करने का जज्बा है, तो एक छोटी सी शुरुआत भी दुनिया को फतेह कर सकती है। बीकानेरवाला आज सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि भारतीय स्वाद और भारतीय उद्यमिता (Entrepreneurship) का एक अंतरराष्ट्रीय प्रतीक बन चुका है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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