सरकारी बैंक और लंबे समय से काम कर रहे प्राइवेट बैंक अपने कर्मचारियों के लिए लगभग 15 फीसदी वेतन में बढ़ोतरी के लिए बातचीत कर रहे हैं। अब खबर है कि आने वाले समय में ये बैंक सप्ताह में पांच दिन वर्किंग लागू करने की योजना बना रहे हैं। TOI के अनुसार, इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने वेतन में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का सुझाव दिया, लेकिन रिपोर्टों से पता चलता है कि यूनियन अन्य बदलावों के साथ-साथ और अधिक बढ़ोतरी पर जोर दे रहे हैं।
वेतन में बढ़ोतरी पर काम शुरू
दूसरी ओर पीएनबी जैसे कुछ बैंकों ने वेतन में बढ़ोतरी के लिए प्रावधान करना शुरू कर दिया है। सितंबर तिमाही में 10 प्रतिशत वृद्धि के लिए बजट बनाने के बजाय पीएनबी ने 15 प्रतिशत बढ़ोत के लिए धनराशि अलग रखी है। कर्मचारी और यूनियन तर्क दे रहे हैं कि बैंकों ने हाल के वर्षों में मुनाफे शानदार बढ़ोतरी हासिल की है। कर्मचारियों ने कोविड के दौरान काम करने और सरकार की योजनाओं को आगे बढ़ाने के अलावा बैंकों को पटरी पर लाने के लिए जो प्रयास किए हैं, उन्हें देखते हुए वे बेहतर कंपनसेशन के हकदार हैं। वित्त मंत्रालय चल रही बातचीत पर करीब से नजर रख रहा है।
कब तक हो जाएगा फैसला?
अगले साल आगामी आम चुनावों को देखते हुए यह उम्मीद की जाती है कि वेतन समझौता उससे पहले हो जाएगा। क्योंकि बैंक कर्मचारी एक महत्वपूर्ण वोटर समूह है। 2020 में पिछला वेतन समझौता तीन साल की बातचीत प्रक्रिया के बाद हुआ था। भारतीय बैंकिंग एसोसिएशन द्वारा पांच दिन वर्किंग को पहले ही मंजूरी दे दी गई है, लेकिन वित्त मंत्रालय और आरबीआई की मंजूरी का इंतजार है।
सप्ताह में पांच दिन काम
रोजाना 70 फीसदी से अधिक नकदी-संबंधित लेनदेन डिजिटल रूप से होने के बाद बैंकिंग उद्योग का तर्क है कि चुनिंदा सप्ताहों के दौरान छह-दिवसीय वर्किंग की आवश्यकता कम हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक बैंक शाखाएं मुख्य रूप से ग्राहक सेवा केंद्र के रूप में काम करती हैं, जिससे खाता खोलने और समस्याओं के समाधान करने में सुविधा होती है।
