Banking sector Reform: बंधन बैंक के संस्थापक और समूह चेयरमैन चंद्र शेखर घोष ने केंद्रीय बजट में बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े एक अहम प्रस्ताव का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग पर एक उच्चस्तरीय कमिटी बनाने का प्रस्ताव भारत को “विकसित भारत” के लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद करेगा। यह समिति वित्तीय स्थिरता बनाए रखने, आम लोगों को बैंकिंग से जोड़ने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए बैंकिंग सेक्टर को देश की विकास यात्रा से जोड़ने का काम करेगी।
बजट में क्या है कमिटी का प्रस्ताव
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में बैंकिंग सेक्टर की व्यापक समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन का प्रस्ताव रखा। इस समिति का मकसद यह देखना होगा कि आने वाले समय में बैंकिंग क्षेत्र को कैसे मजबूत बनाया जाए, ताकि वह देश की अर्थव्यवस्था की जरूरतों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सके। समिति वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण जैसे अहम मुद्दों पर ध्यान देगी।
एनबीएफसी को लेकर भी अहम सुझाव
बजट में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए भी कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि एनबीएफसी के लिए ऋण वितरण और नई तकनीक अपनाने को लेकर स्पष्ट लक्ष्य तय किए जाने चाहिए। इसके साथ ही, सार्वजनिक क्षेत्र की बड़ी एनबीएफसी जैसे पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी) के पुनर्गठन का सुझाव भी दिया गया है, ताकि उनका आकार बढ़े और कामकाज में अधिक दक्षता आए।
सूक्ष्म लोन और वित्तीय समावेशन पर जोर
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक चंद्र शेखर घोष ने कहा कि प्रस्तावित समिति बैंकों के लिए भविष्य की नीतियां तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। खासतौर पर उन बैंकों के लिए जो सूक्ष्म ऋण (माइक्रोफाइनेंस) और वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत को विकसित देश बनाना है, तो सूक्ष्म ऋण उद्योग को और ज्यादा योगदान देना होगा।
सबसे निचले पायदान तक पहुंच जरूरी
घोष ने कहा कि सूक्ष्म ऋण का सबसे बड़ा उद्देश्य समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा कि अगर हम विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं, तो सूक्ष्म ऋण उद्योग को ज्यादा योगदान देना होगा, खासकर गरीब और कमजोर वर्ग को आत्मनिर्भर बनाने में। उनके मुताबिक, छोटे कर्ज से लोग अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं, अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं और धीरे-धीरे औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ सकते हैं।
सूक्ष्म वित्त क्षेत्र को होगा फायदा
चंद्र शेखर घोष का मानना है कि प्रस्तावित बैंकिंग समिति की सिफारिशों से सूक्ष्म वित्त क्षेत्र में काम करने वाले ऋणदाताओं को सीधा फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब बैंकिंग सेक्टर की समीक्षा पूरी होगी और नई नीतियां सामने आएंगी, तो इससे सूक्ष्म वित्त संस्थानों और इस क्षेत्र को ऋण देने वाले बैंकों को मजबूती मिलेगी।
बैंकों और ग्राहकों दोनों के लिए फायदेमंद
घोष ने उम्मीद जताई कि इस समीक्षा का असर केवल संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम ग्राहकों को भी इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि मजबूत नीतियों से बैंकों का जोखिम कम होगा, कर्ज वितरण बेहतर होगा और ग्राहकों को सुरक्षित व भरोसेमंद सेवाएं मिलेंगी। कुल मिलाकर, यह पहल बैंकिंग सेक्टर, सूक्ष्म वित्त संस्थानों और देश की अर्थव्यवस्था, तीनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
