अपोलो माइक्रो सिस्टम (Apollo Micro Systems) के शेयरों में 6.4 फीसदी की बढ़त देखने को मिली। इसके साथ यह 139.50 के हाई लेवल पर पहुंचा। यह तेजी कंपनी के प्रेफरेंशियल इक्विटी शेयर अलॉटमेंट की घोषणा के बाद आई। कंपनी के मुताबिक 25 फीसदी अमाउंट अलॉटमेंट के समय और शेष 75% छह महीनों में वसूली जाएगी। यह प्रोसेस SEBI की ICDR गाइडलाइंस के तहत नौ महीनों में पूरी की जाएगी।
हिस्सेदारी में बदलाव और रेगुलेटरी अपडेट
Apollo Micro Systems ने अपने शेयरहोल्डिंग पैटर्न में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अंशु भार्गव की हिस्सेदारी 0.034% से बढ़कर 0.168% हो गई है, जबकि वसुदेव राव धनिकुला की हिस्सेदारी 0.008% से बढ़कर 0.033% तक पहुंच गई है। इसके साथ ही, कंपनी ने NSE की ऑब्जर्वेशन के आधार पर कुछ दस्तावेजों में संशोधन किया है, जिसमें "and Private Sector" जैसे शब्दों को हटाया गया है।
कंपनी की सब्सिडियरी अपोलो डिफेंस इंडस्ट्री ने हाल ही में हिंदुजा ग्रुप से 107 करोड़ रुपये में IDL एक्सप्लोसिव का अधिग्रहण किया है। जिसकी स्थापना 1961 में हुई थी। इस सौदे से अपोलो को म्यूनिशन मैनुफैक्चरिंग के सेक्टर में मजबूती मिलेगी और वह एंड-टू-एंड डिफेंस सॉल्यूशंस प्रदान करने में सक्षम हो सकेगा। वित्तीय मोर्चे पर भी कंपनी का प्रदर्शन शानदार रहा है। Q3FY25 में नेट सेल्स 62.5% बढ़कर ₹148.39 करोड़ रही, जबकि मुनाफा (PAT) 83.1% उछलकर ₹18.24 करोड़ तक पहुंच गया। FY25 के पहले नौ महीनों में नेट सेल्स ₹400.30 करोड़ रही, जो 69.5% की सालाना बढ़त दर्शाता है, और PAT 133.2% बढ़कर ₹42.40 करोड़ हो गया। वहीं, FY24 में भी कंपनी ने 24.91% की सेल्स ग्रोथ और 66.01% की मुनाफे की उछाल दर्ज की।
स्टॉक परफॉर्मेंस की बात करें तो Apollo Micro Systems ने पिछले पांच वर्षों में 1450% का रिटर्न दिया है, जिससे यह एक मल्टीबैगर स्टॉक बन गया है। मौजूदा समय में शेयर ₹157.00 के 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर से 11% नीचे ट्रेड कर रहा है, जबकि अक्टूबर 2024 में ₹88.10 के लो से अब तक इसमें 58% की बढ़त देखी गई है।
डिस्क्लेमर : यहां शेयर बाजार में निवेश की सलाह नहीं दी गई है। इक्विटी मार्केट में जोखिम होता है, इसलिए निवेश अपने जोखिम पर करें। निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।
