आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण दुनियाभर में लाखों नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। कई आईटी कंपनियों में हजारों कर्मचारियों की छंटनी भी की गई है। इस बीच नौकरीपेशा वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। एक चीनी अदालत ने फैसला सुनाया है कि कंपनियां, कर्मचारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण नौकरी से नहीं निकाल सकती है। ऐसा तब हो रहा है जब अधिकारी एक तरफ घरेलू लेबर मार्केट को स्थिर रखने की ज़रूरत और दूसरी तरफ़ AI टेक्नोलॉजी विकसित करने की वैश्विक होड़ के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह फैसला भले ही चीन से जुड़ा है लेकिन इसका असर आने वाले दिनों में भारत समेत दुनियाभर में होगा। कंपनियां AI के नाम पर मनमानी नहीं कर पाएंगी।
चीन से जुड़ा है मामला
हांग्जो इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट के एक बयान के अनुसार, अदालत ने फैसला दिया कि पूर्वी चीन की एक टेक कंपनी ने अपने एक कर्मचारी को गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकाल दिया था। कर्मचारी ने तब डिमोशन (पद घटाए जाने) को स्वीकार करने से मना कर दिया था, जब AI के जरिए उसकी नौकरी को ऑटोमेटेड कर दिया गया था। 28 अप्रैल के एक अदालत ने कहा कि कंपनी ने नौकरी से निकालने के जो कारण बताए, वे बिजनेस में कटौती या कामकाज में मुश्किलों जैसी नकारात्मक परिस्थितियों के दायरे में नहीं आते थे, न ही वे उस कानूनी शर्त को पूरा करते थे जिसके तहत 'रोजगार का अनुबंध जारी रखना असंभव' हो जाता। इसी मामले का हवाला देते हुए, अदालत ने एक अलग बयान में कहा कि कंपनियां तकनीकी प्रगति के कारण कर्मचारियों को एकतरफा तरीके से नौकरी से नहीं निकाल सकतीं या उनकी सैलरी में कटौती नहीं कर सकतीं।
AI सिस्टम लागू करने की होड़
चीनी कंपनियां टेक सेक्टर में दबदबा बनाने के लिए सरकार के निर्देश पर AI सिस्टम लागू करने की होड़ में लगी हैं। वहीं दूसरी ओर, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के योजनाकारों ने लेबर मार्केट में स्थिरता को प्राथमिकता देने की इच्छा जताई है, क्योंकि देश धीमी होती अर्थव्यवस्था और युवाओं में बढ़ती बेरोज़गारी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
AI से वैश्विक स्तर पर नौकरियों पर संकट
गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार, AI दुनिया भर में 30 करोड़ नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। वहीं, आईएमएफ का अनुमान है कि दुनिया भर में लगभग 40% नौकरियां एआई के प्रभाव में आएंगी। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह आंकड़ा 60% तक हो सकता है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के अनुसार, फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 5 वर्षों में वैश्विक स्तर पर 1.4 करोड़ (14 million) शुद्ध नौकरियों (Net Jobs) की कमी आ सकती है, क्योंकि ऑटोमेशन की रफ्तार नई नौकरियों के सृजन से तेज होगी।
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