7th Pay Commission DA hike: केंद्र सरकार केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में दूसरी बढ़ोतरी के बारे में सितंबर में घोषणा कर सकती है। यह जुलाई 2024 से लागू माना जाएगा। अनुमान है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इस चरण के दौरान DA और DR में 3% की बढ़ोतरी को मंजूरी दे सकती है। DA या महंगाई भत्ता कम कर रहे सरकारी कर्मचारियों को दिया जाता है जबकि DR या महंगाई राहत पेंशनभोगियों को आवंटित की जाती है। सितंबर के लिए निर्धारित अनुमानित 3% वृद्धि के साथ कुल महंगाई भत्ता (DA) 53% तक बढ़ जाना तय है। इसके बावजूद यह संभावना कम है कि सरकार COVID-19 महामारी के बीच रोके गए DA और DR के लिए 18 महीने के बकाया का वितरण करेगी।
कितनी बढ़ जाएगी सैलरी?
अगर सरकार कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता बढ़ाती है तो टेक होम सैलरी में भी इजाफा होगा। मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50000 रुपये है तो 50% पर उनका महंगाई भत्ता 25000 रुपये है। वहीं अगर महंगाई भत्ता (DA) में 3 प्रतिशत बढ़ोतरी के बाद 53 प्रतिशत हो जाता है तो उनका महंगाई भत्ता बढ़कर 26500 रुपये हो जाएगा। इस तरह कर्मचारियों के वेतन में 26500 रुपये - 25,000 रुपये = 1500 रुपये बढ़ोतरी होगी।
मूल वेतन में विलय नहीं होगा डीए
केंद्र सरकार सितंबर 2024 में महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 3 फीसदी की बढ़ोतरी की घोषणा कर सकती है, जो 1 जुलाई 2024 से प्रभावी होगी। डीए को 50 फीसदी से अधिक बढ़ने पर भी मूल वेतन में विलय नहीं किया जाएगा। यह 8वें वेतन आयोग के गठन तक ऐसे ही जारी रहेगा। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक विलय के बजाय डीए 50 फीसदी से अधिक होने पर एचआरए समेत भत्ते बढ़ाने का प्रावधान है, जिसे पहले ही बढ़ा दिया गया है।
हर साल जनवरी और जुलाई से लागू DA-DR वृद्धि
पिछली बार DA बढ़ोतरी की घोषणा 7 मार्च 2024 को की गई थी और यह 1 जनवरी 2024 से प्रभावी हुई थी। उस समय DA को बढ़ाकर 50% कर दिया गया था। DA में इस बढ़ोतरी के कारण पिछले कुछ महीनों में हाउस रेंट अलाउंस (HRA) समेत विभिन्न भत्तों में वृद्धि हुई है। सरकार आमतौर पर मार्च और सितंबर में अपडेट साझा करने के साथ हर दो साल में DA या DR वृद्धि की घोषणा करती है। हालांकि ये वृद्धि हर साल जनवरी और जुलाई से लागू होती रही है।
डीए की गणना के लिए आधार वर्ष 2016
डीए बढ़ोतरी की गणना अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) के आधार पर निर्धारित की जाती है, जो विभिन्न क्षेत्रों में खुदरा कीमतों में बदलाव की निगरानी करता है। शुरुआत में डीए वृद्धि की गणना आधार वर्ष 2001 के साथ उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का उपयोग करके की गई थी। हालांकि सितंबर 2020 से शुरू होकर सरकार ने डीए की गणना के लिए आधार वर्ष 2016 के साथ एक नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में बदलाव किया।
