भारत में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसके पास सेविंग अकाउंट (Saving Account) न हो। हम अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए इसे सबसे अच्छा जरिया मानते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आपकी कुछ छोटी-छोटी गलतियां बैंक को यह मौका दे देती हैं कि वह आपके खाते से पैसे काट ले? अक्सर लोग सेविंग अकाउंट को 'करंट अकाउंट' या 'पिगी बैंक' की तरह इस्तेमाल करने लगते हैं, जिससे वे अनजाने में बैंक के नियमों का उल्लंघन कर देते हैं। आरबीआई और बैंकों के कड़े नियमों के कारण अब एक छोटी सी चूक भी भारी पेनाल्टी या इनकम टैक्स के नोटिस का कारण बन सकती है।
1. मिनिमम बैलेंस की अनदेखी
ज्यादातर सेविंग अकाउंट (जीरो बैलेंस खातों को छोड़कर) में एक न्यूनतम औसत बैलेंस (AMB) बनाए रखना जरूरी होता है। कई लोग एक साथ कई बैंक खाते खोल लेते हैं और उनमें पैसा रखना भूल जाते हैं। जैसे ही आपका बैलेंस तय सीमा से नीचे जाता है, बैंक 'नॉन-मेंटेनेंस चार्ज' के नाम पर पैसे काटना शुरू कर देता है। कभी-कभी यह चार्ज इतना ज्यादा होता है कि आपका बैलेंस नेगेटिव में भी जा सकता है।
2. कैश ट्रांजैक्शन की लिमिट को पार करना
सेविंग अकाउंट मुख्य रूप से बचत के लिए होता है, बिजनेस के लिए नहीं। आयकर विभाग (Income Tax Department) के नियमों के अनुसार, यदि आप एक वित्तीय वर्ष में अपने सेविंग अकाउंट में 10 लाख रुपये या उससे अधिक नकद जमा करते हैं, तो बैंक इसकी रिपोर्ट सीधे टैक्स विभाग को देता है। इसके अलावा, बैंक भी एक महीने में निश्चित संख्या से ज्यादा नकद लेनदेन (जमा या निकासी) पर प्रति ट्रांजैक्शन 150 रुपये तक का शुल्क वसूलते हैं।
3. एटीएम (ATM) निकासी की फ्री लिमिट
अक्सर हम बिना सोचे-समझे किसी भी एटीएम से पैसे निकाल लेते हैं। ध्यान रखें कि अपने बैंक के एटीएम से महीने में 5 बार और दूसरे बैंक के एटीएम से केवल 3 बार (महानगरों में) ही फ्री निकासी की अनुमति होती है। इसके बाद हर ट्रांजैक्शन पर आपको 21 रुपये प्लस जीएसटी (GST) देना पड़ता है। छोटी-छोटी रकम बार-बार निकालने की आदत आपके खाते से सैकड़ों रुपये 'एटीएम चार्ज' के रूप में साफ कर सकती है।
4. नॉमिनी (Nominee) अपडेट न करना
यह एक ऐसी गलती है जिसकी कीमत बैंक नहीं, बल्कि आपका परिवार चुकाता है। यदि खाताधारक के साथ कोई अनहोनी हो जाए और खाते में नॉमिनी का नाम न हो, तो बैंक से पैसा निकालना कानूनी उलझनों के कारण बहुत मुश्किल हो जाता है। बैंक इस पैसे को 'अनक्लेम्ड डिपॉजिट' की श्रेणी में डाल सकते हैं, जिससे आपके अपनों को अपनी ही रकम के लिए सालों भटकना पड़ सकता है।
5. बहुत ज्यादा 'ऑटो-डेबिट' फेल होना
अगर आपने ईएमआई (EMI) या म्यूचुअल फंड की एसआईपी (SIP) लगा रखी है और खाते में बैलेंस न होने के कारण पेमेंट फेल हो जाता है, तो बैंक 'बाउंस चार्ज' वसूलता है। यह चार्ज प्रति फेल ट्रांजैक्शन 250 से 500 रुपये तक हो सकता है। बार-बार पेमेंट फेल होना न केवल आपका पैसा काटता है, बल्कि आपके सिबिल (CIBIL) स्कोर को भी बुरी तरह खराब कर देता है।
6. केवाईसी (KYC) अपडेट न रखना
आरबीआई के नियमों के मुताबिक, समय-समय पर केवाईसी अपडेट करना अनिवार्य है। यदि आप बैंक के बार-बार याद दिलाने के बावजूद अपना आधार, पैन या पता अपडेट नहीं करते हैं, तो बैंक आपके खाते को 'फ्रीज' कर सकता है। ऐसी स्थिति में आप अपने ही पैसे का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे और खाता दोबारा शुरू कराने के लिए आपको बैंक के चक्कर काटने पड़ेंगे।
7. फालतू के डेबिट कार्ड और एसएमएस चार्ज
हम अक्सर उन सेवाओं पर ध्यान नहीं देते जो बैंक हमें 'फ्री' कहकर देता है लेकिन बाद में चार्ज वसूलता है। सालाना डेबिट कार्ड फीस और एसएमएस अलर्ट चार्ज छोटे लगते हैं, लेकिन अगर आपके पास कई खाते हैं तो यह एक बड़ी राशि बन जाती है। यदि आप किसी खाते का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो उसे चालू रखने के बजाय बंद कर देना ही बेहतर है।
